नंदा की चौकी पुल धंसने के पीछे की वजहें: जानें टौंस नदी की स्थिति और सुरक्षा उपाय
Round The Watch News: देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राजमार्ग पर नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी पर करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से बने नए पुल की एप्रोच रोड में निर्माण के महज 16 दिन बाद हुए धंसाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि पुल को यातायात के लिए … The post नंदा की चौकी पुल में धंसाव की असल वजह सामने, 80 मीटर लंबे पुल के नीचे सिर्फ 20 मीटर में सिमटी टौंस नदी appeared first on Round The Watch.
नंदा की चौकी पुल धंसने के पीछे की वजहें: जानें टौंस नदी की स्थिति और सुरक्षा उपाय
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कम शब्दों में कहें तो, हाल में किए गए एक गहन निरीक्षण से नंदा की चौकी पुल के धंसने की कई संभावित वजहें सामने आई हैं, जिनमें टौंस नदी का संकुचन और निर्माण कार्य से जुड़ी खामियां शामिल हैं।
पिछले माह देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राजमार्ग पर स्थित नंदा की चौकी पर बने नए पुल की एप्रोच रोड में भारी धंसाव के कारणों की जांच अब पूरी हो चुकी है। इस पुल के निर्माण में कुल 16 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, लेकिन पुल के चालू होने के केवल 16 दिन बाद हुए इस धंसाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुल को ट्रैफिक के लिए खोलने से पहले इसका लोड टेस्ट बीएचयू के विशेषज्ञों द्वारा सफलतापूर्वक किया गया था, साथ ही लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) द्वारा एप्रोच रोड की तकनीकी जांच भी की गई थी। इसके बावजूद अचानक हुए धंसाव ने सभी को चौंका दिया।
80 मीटर लंबे पुल के नीचे केवल 20 मीटर में बह रही थी नदी
समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने पाया कि नंदा की चौकी पुल की कुल लंबाई लगभग 80 मीटर है, लेकिन बारिश के दौरान टौंस नदी का वास्तविक बहाव केवल 20 मीटर के हिस्से तक ही सीमित रहा। इसका मतलब है कि नदी का पानी पुल के नीचे समान रूप से नहीं फैला, जिससे सुरक्षा दीवार पर एकतरफा दबाव बना। इसकी वजह से पुल के नीचे की मिट्टी का कटाव हुआ और धंसने की स्थिति उत्पन्न हुई।
अस्थाई पुलिया के अवशेष भी बने वजह
जांच में यह भी पाया गया कि पिछले वर्ष क्षतिग्रस्त पुल के लिए बनाई गई अस्थाई पुलिया के कुछ अवशेष अब भी नदी के किनारे दीवार के रूप में मौजूद थे। ये अवशेष नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित कर रहे थे और पानी की दिशा को बदलने में सहायक बने।
गौशाला निर्माण से और बदली नदी की दिशा
अधिकारियों ने एक और महत्वपूर्ण पहलू भी उठाया। एप्रोच रोड के पास एक गौशाला का निर्माण किया गया था, जिससे नदी का पानी सीधे बहने के बजाय पुल की सुरक्षा दीवार की ओर मोड़ दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका भी धंसाव में बड़ा योगदान है। जब भारी बारिश के दौरान टौंस नदी का जलस्तर बढ़ा, तो नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव आया, जिससे पानी का वेग बढ़ गया।
नीचे से सुरक्षा दीवार को काटता हुआ पहुंचा पानी
नदी के तेज बहाव ने सुरक्षा दीवार के नीचे से रास्ता बनाकर एप्रोच रोड की नींव तक पहुंच गया। लगातार कटाव के चलते एप्रोच रोड का हिस्सा धंस गया, जिससे यह गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई।
धारा को फिर प्राकृतिक स्वरूप देने की तैयारी
अधिकारियों का मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए आवश्यक है कि अस्थाई पुलिया की एप्रोच रोड के बचे हुए हिस्से को हटाया जाए और नदी किनारे बने अवरोधों को हटाने के साथ टौंस नदी की धारा को उसके प्राकृतिक स्वरूप में बहाल किया जाए। इससे नदी का दबाव किसी एक हिस्से पर केंद्रित नहीं होगा और पुल की सुरक्षा भी बेहतर बनेगी।
सूत्रों के अनुसार, लोक निर्माण विभाग ने इस दिशा में प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई भी शुरू कर दी है, हालांकि धंसाव के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी तय करने के लिए तकनीकी जांच अभी जारी है।
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Team Netaa Nagari, प्रियंका शर्मा
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