हादसों से जुड़ता ट्रांस भारत एविएशन कंपनी का नाम, 02 आपात लैंडिंग के बाद अब क्रैश से उठे सवाल
Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाएं श्रद्धालुओं के लिए आवागमन का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। लेकिन इन्हीं सेवाओं से जुड़ी दुर्घटनाओं, तकनीकी खराबी और आपात लैंडिंग की लगातार सामने आती घटनाओं ने हवाई सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बदरीनाथ से देहरादून आ रहे ट्रांस भारत एविएशन के हेलीकॉप्टर VT-HCX … The post हादसों से जुड़ता ट्रांस भारत एविएशन कंपनी का नाम, 02 आपात लैंडिंग के बाद अब क्रैश से उठे सवाल appeared first on Round The Watch.
Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाएं श्रद्धालुओं के लिए आवागमन का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। लेकिन इन्हीं सेवाओं से जुड़ी दुर्घटनाओं, तकनीकी खराबी और आपात लैंडिंग की लगातार सामने आती घटनाओं ने हवाई सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बदरीनाथ से देहरादून आ रहे ट्रांस भारत एविएशन के हेलीकॉप्टर VT-HCX के 30 अक्टूबर 2026 को ज्योतिर्मठ घाटी के ऊपर लापता होने की घटना ने एक बार फिर इस बहस को केंद्र में ला दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम में ट्रांस भारत एविएशन की भूमिका विशेष रूप से ध्यान खींचती है। वर्ष 2025 में केदारनाथ क्षेत्र में हुए बड़े हादसे के बाद कंपनी के दो पायलटों के लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित किए गए थे। मई 2026 में कंपनी के हेलीकॉप्टर की हाईटेंशन लाइन से टकराने के बाद आपात लैंडिंग हुई। अक्टूबर में भी इसी कंपनी के एक अन्य हेलीकॉप्टर को तकनीकी खराबी के कारण नई टिहरी के बौराड़ी स्टेडियम में उतारना पड़ा। अब कंपनी का एक हेलीकॉप्टर क्रैश ही हो गया।
उत्तराखंड में हवाई उड़ान और हादसों के सफर का अंत कब?
बीते साल की बात करें तो 15 जून 2025 को केदारनाथ से गुप्तकाशी लौट रहा आर्यन एविएशन का बेल-407 हेलीकॉप्टर गौरीकुंड के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसमें पांच यात्रियों, एक शिशु और एक चालक दल के सदस्य समेत सात लोगों की मौत हुई थी।
इस हादसे के बाद केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने तत्काल कार्रवाई की थी। मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, ट्रांस भारत एविएशन के दो हेलीकॉप्टर भी खराब मौसम की परिस्थितियों में उड़ान भरते पाए गए थे।
इनमें VT-TBC के पायलट कैप्टन योगेश ग्रेवाल और VT-TBF के पायलट कैप्टन जितेंद्र हरजाई शामिल थे। दोनों के पायलट लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित कर दिए गए थे।
इसके अलावा 15 और 16 जून को क्षेत्र में सभी चार्टर और शटल हेलीकॉप्टर सेवाएं एहतियातन बंद कर दी गई थीं। मंत्रालय ने DGCA को क्षेत्र में अधिकारियों की तैनाती और हेलीकॉप्टर संचालन की निगरानी के निर्देश दिए थे।
अब 2026 में दो बार आपात लैंडिंग
ट्रांस भारत एविएशन से जुड़ी घटनाएं 2026 में भी सामने आईं।
20 मई 2026 को हेलीकॉप्टर हाईटेंशन लाइन से टकरा गया था। बदरीनाथ से देहरादून लौट रहा कंपनी का हेलीकॉप्टर टिहरी जिले के धनोल्टी क्षेत्र में नवागांव-सत्यौं के पास 33 केवी हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गया था। हेलीकॉप्टर में पायलट समेत सात लोग सवार थे।
बिजली लाइन से टकराने के बाद हेलीकॉप्टर के पिछले हिस्से को नुकसान पहुंचा। पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए उसे खेत में उतार दिया। सभी लोग सुरक्षित बच गए। यात्रियों को सड़क मार्ग से देहरादून भेजा गया और तकनीकी टीम ने हेलीकॉप्टर की जांच शुरू की।
24 अक्टूबर 2026: बौराड़ी स्टेडियम में आपात लैंडिंग
सहस्रधारा से गुप्तकाशी जा रहे ट्रांस भारत एविएशन के हेलीकॉप्टर में उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी आ गई। इसके बाद पायलट ने नई टिहरी के बौराड़ी स्टेडियम में हेलीकॉप्टर उतार दिया। हेलीकॉप्टर में छह लोग सवार थे। करीब 40 मिनट तक निरीक्षण किए जाने के बाद उसे दोबारा उड़ान की अनुमति मिली। इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ।
30 अक्टूबर 2026: बदरीनाथ से देहरादून के बीच हेलीकॉप्टर क्रैश
ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर VT-HCX बदरीनाथ से सहस्रधारा के लिए दोपहर 1:14 बजे रवाना हुआ था। ज्योतिर्मठ घाटी के ऊपर उड़ान के दौरान उसका संपर्क टूट गया। ट्रैकिंग सिस्टम भी उसकी स्थिति बताने में असमर्थ हो गया। फिर पता चला कि हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया।
यूसीएडीए की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इसमें कैप्टन हिमांशु समेत पांच यात्री सवार थे। भारतीय सेना, जिला प्रशासन और एसडीआरएफ ने तलाशी अभियान शुरू किया। इस घटना की जांच में विमान की अंतिम लोकेशन, तकनीकी स्थिति, मौसम और उड़ान से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।
DGCA के ऑडिट में मिलीं गंभीर खामियां
हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा को लेकर सबसे महत्वपूर्ण जानकारी छह अगस्त 2026 को लोकसभा में दिए गए नागरिक उड्डयन मंत्रालय के जवाब से सामने आती है। मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2025 में हिमालयी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर संचालन करने वाली आठ कंपनियों का विशेष सुरक्षा ऑडिट किया गया था।
इनमें शामिल थीं:
1. ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड।
2. हिमालयन हेली सर्विसेज।
3. एरो एयरक्राफ्ट सेल्स एंड चार्टर्स।
4. आर्यन एविएशन।
5. थंबी एविएशन।
6. केस्टरल एविएशन।
7. पवन हंस।
8. ग्लोबल वेक्ट्रा हेलिकॉर्प।
ऑडिट में सामने आई प्रमुख खामियां थीं:
– पायलटों की उड़ान ड्यूटी समय सीमा (Flight Duty Time Limitation) की प्रभावी निगरानी नहीं की जा रही थी।
– पर्वतीय क्षेत्रों में तीर्थयात्रा उड़ानों के लिए जारी ऑपरेशन सर्कुलर 02/2023 का प्रभावी अनुपालन नहीं हो रहा था।
– रखरखाव से जुड़े कार्यों को पूरा करने और प्रमाणित करने की मानकीकृत प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा था।
– उपकरणों की जांच करने वाली कैलिब्रेशन एजेंसियों के लिए निर्धारित नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं का अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया गया।
– आंतरिक सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट और उन पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट DGCA को नियमित रूप से नहीं भेजी जा रही थी।
– गुप्तकाशी के आपातकालीन प्रतिक्रिया प्लान में जरूरी आपात संपर्क नंबर और दुर्घटनाग्रस्त विमान को हटाने की प्रक्रिया तक शामिल नहीं थी।
ये निष्कर्ष आठों कंपनियों के विशेष ऑडिट से संबंधित समेकित निष्कर्ष हैं। संसदीय जवाब में प्रत्येक खामी को किसी एक कंपनी के नाम से अलग-अलग नहीं जोड़ा गया है। इसलिए इन्हें केवल ट्रांस भारत एविएशन की व्यक्तिगत खामियां ऑडिट के रूप में नहीं बताया गया है।
संसद में सामने आए उत्तराखंड के दुर्घटना आंकड़े
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने छह अगस्त 2026 को लोकसभा में बताया कि वर्ष 2023 से 2025 के बीच हिमालयी राज्यों में कुल छह हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं हुईं और सभी उत्तराखंड में दर्ज की गईं। वहीं सिर्फ चारधाम यात्रा के दौरान पांच वर्षों के दुर्घटना आंकड़ों पर एक अन्य संसदीय जवाब में यह विवरण दिया गया था:
वर्ष| हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं
2021| 0
2022| 1
2023| 1
2024| 0
2025 (जून तक)| 4
कुल| 6
नोट: ये आंकड़े चारधाम यात्रा के दौरान हुई दुर्घटनाओं के हैं, राज्य में हेलीकॉप्टर से जुड़ी हर तरह की घटना के नहीं।
उत्तराखंड में पिछले प्रमुख हादसे और आपात लैंडिंग
पिछले वर्षों की घटनाओं पर नजर डालें तो केदारनाथ, गौरीकुंड, गरुड़चट्टी, उत्तरकाशी और टिहरी के पर्वतीय क्षेत्रों में कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं।
18 अक्टूबर 2022, गरुड़चट्टी: आर्यन एविएशन का हेलीकॉप्टर केदारनाथ से गुप्तकाशी लौटते समय दुर्घटनाग्रस्त हुआ। पायलट समेत सात लोगों की मौत हुई।
21 जून 2013, रामबाड़ा: आपदा राहत अभियान में लगा निजी हेलीकॉप्टर VT-PED दुर्घटनाग्रस्त हुआ। AAIB के रिकॉर्ड में यह दुर्घटना दर्ज है।
28 जून 2013, हर्षिल: हेलीकॉप्टर VT-PHZ दुर्घटनाग्रस्त हुआ। यह भी AAIB के आधिकारिक दुर्घटना रिकॉर्ड में शामिल है।
24 जुलाई 2013, केदारनाथ: हेलीकॉप्टर VT-TBE दुर्घटनाग्रस्त हुआ। इस घटना की जांच भी AAIB के रिकॉर्ड में दर्ज है।
23 अप्रैल 2023, केदारनाथ: केस्टरल एविएशन के हेलीकॉप्टर VT-RNK के टेल रोटर की चपेट में आने से यूसीएडीए के एक अधिकारी की मौत हो गई। यह उड़ान के दौरान नहीं, बल्कि जमीन पर हुई दुर्घटना थी। AAIB की जांच रिपोर्ट में बताया गया कि हेलीकॉप्टर का इंजन बंद नहीं हुआ था और यात्री पीछे की ओर जाने के दौरान घूमते टेल रोटर की चपेट में आ गया।
24 मई 2024, केदारनाथ: केस्टरल एविएशन का हेलीकॉप्टर VT-CLR छह यात्रियों को लेकर केदारनाथ हेलीपैड पर उतरने के दौरान नियंत्रण संबंधी समस्या से प्रभावित हुआ। AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार हाइड्रोलिक सिस्टम का दबाव कम हुआ और हेलीकॉप्टर जमीन से टकराते हुए घूम गया। यह निर्धारित हेलीपैड से करीब 320 फीट पहले रुका। इसमें सातों लोग सुरक्षित रहे।
8 मई 2025, गंगनानी: एयरो ट्रांस कंपनी का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ। इस हादसे में छह लोगों की मौत हुई और एक व्यक्ति घायल हुआ।
17 मई 2025, केदारनाथ: एम्स ऋषिकेश से मरीज को लेने जा रहा पिनेकल एयर का हेलीकॉप्टर VT-KBS हेलीपैड से पहले जमीन पर आ गिरा। इसमें डॉक्टर और नर्स समेत तीन लोग सवार थे। सभी सुरक्षित रहे। AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट में घाटी के वास्तविक मौसम की जानकारी उपलब्ध नहीं होने और मौसम संबंधी सूचना के लिए केवल देहरादून की रिपोर्ट पर निर्भर रहने की बात सामने आई।
15 जून 2025, गौरीकुंड: आर्यन एविएशन का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ। इसमें सात लोगों की मौत हुई। मंत्रालय ने खराब दृश्यता और बादलों के बीच उड़ान को संभावित जोखिम बताया था। वास्तविक कारण के निर्धारण के लिए AAIB जांच की बात कही गई थी।
7 जून 2025, बदासू: केदारनाथ के लिए उड़ान भरते समय हेलीकॉप्टर को तकनीकी समस्या के कारण सड़क पर उतारना पड़ा। हेलीकॉप्टर के पिछले रोटर की एक खड़ी कार से टक्कर हुई। पांच यात्री सुरक्षित निकले, जबकि पायलट को मामूली चोट आई।
हादसों के बाद सरकार ने क्या बदला?
जून 2025 में लगातार हादसों के बाद केंद्र और राज्य सरकार ने हेली सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था में कई बदलाव किए।
सितंबर 2025 में मानसून के बाद चारधाम हेली सेवाएं दोबारा शुरू करने से पहले DGCA ने 13 से 16 सितंबर तक हेलीपैड, हेलीकॉप्टर, ऑपरेटरों की तैयारी और सहायक सुविधाओं का निरीक्षण किया।
इसके बाद कई नए सुरक्षा उपाय लागू किए गए
– पहली बार इस क्षेत्र में उड़ान भरने वाले या एक वर्ष से अधिक समय बाद लौटने वाले पायलटों के लिए अतिरिक्त परिचयात्मक उड़ानें।
– सभी पायलटों के लिए अनिवार्य रूट चेक और नियमित प्रशिक्षण।
– ऊंचाई वाले हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर के वजन पर नियंत्रण।
– प्रति घंटे शटल उड़ानों और प्रतिदिन चार्टर उड़ानों की सीमा तय करना।
– हेलीपैड पर एक समय में हेलीकॉप्टरों की संख्या नियंत्रित करना।
– सहस्रधारा और सीतापुर में नियंत्रण कक्ष स्थापित करना।
– मौसम की जानकारी के लिए IMD अधिकारियों और हवाई यातायात के लिए ATC अधिकारियों की तैनाती।
– सैटेलाइट आधारित हेलीकॉप्टर ट्रैकिंग और मौसम कैमरों की व्यवस्था।
केंद्र सरकार के अनुसार चारधाम हेली सेवाओं के लिए छह शटल ऑपरेटर और सात चार्टर ऑपरेटर/कंसोर्टियम को संचालन में शामिल किया गया था।
पहाड़ों में उड़ान क्यों चुनौतीपूर्ण?
उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर संचालन सामान्य मैदानी उड़ानों से अलग है। यहां घाटियों की भौगोलिक बनावट, ऊंचाई, अचानक बदलता मौसम और सीमित लैंडिंग स्थल पायलटों के सामने अतिरिक्त चुनौतियां खड़ी करते हैं।
विशेष रूप से तीन स्थितियां जोखिम बढ़ाती हैं। पहली, मौसम और दृश्यता: घाटियों में बादल तेजी से जमा हो सकते हैं। एक स्थान पर मौसम साफ होने का अर्थ यह नहीं कि आगे का पूरा उड़ान मार्ग भी सुरक्षित है।
दूसरी, ऊंचाई और हेलीकॉप्टर की क्षमता: अधिक ऊंचाई पर हवा का घनत्व कम होने से हेलीकॉप्टर के इंजन और रोटर की प्रदर्शन क्षमता प्रभावित होती है। यात्रियों, ईंधन और सामान का वजन भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
तीसरी, घाटियों में उड़ान और बाधाएं: पहाड़ी ढलानों, बिजली की लाइनों और संकरे उड़ान मार्गों के कारण पायलट के पास आपात स्थिति में विकल्प सीमित हो सकते हैं। इसीलिए उड़ान से पहले मौसम, वजन, ईंधन, तकनीकी स्थिति और वैकल्पिक लैंडिंग स्थल की जांच जरूरी है।
सबसे बड़ा सवाल: सुरक्षा व्यवस्था की जवाबदेही किसकी?
राज्य में हेली सेवाओं का संचालन यूसीएडीए के माध्यम से व्यवस्थित होता है, जबकि विमान की उड़ान सुरक्षा, एयरवर्थनेस और नियामकीय अनुपालन की जिम्मेदारी DGCA की है। हादसों की जांच AAIB करता है।
राज्यसभा की परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय समिति ने अगस्त 2025 की अपनी रिपोर्ट में चारधाम हेली सेवाओं की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए थे। समिति ने कहा कि DGCA और राज्य स्तरीय एजेंसियों के बीच निगरानी की जिम्मेदारियों में अस्पष्टता है। समिति ने यह भी रेखांकित किया कि हिमालयी क्षेत्रों में उड़ान भरने वाले पायलटों के लिए अनिवार्य, विशेष पर्वतीय उड़ान प्रशिक्षण और प्रमाणन की व्यवस्था में कमी थी।
समिति के अनुसार 2025 में दुर्घटनाओं के बाद की गई कई कार्रवाई प्रतिक्रियात्मक थी, जबकि ऐसे जोखिम वाले क्षेत्र में पहले से मजबूत सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।
अब 30 अक्टूबर की घटना के बाद कई सवालों के जवाब जांच से मिलने जरूरी हैं। हेलीकॉप्टर की अंतिम सैटेलाइट लोकेशन क्या थी? उड़ान से पहले तकनीकी जांच कब हुई थी? मौसम की जानकारी किस स्तर पर उपलब्ध थी? क्या उड़ान मार्ग पर निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था? और क्या कंपनी के विमान तथा पायलटों के पिछले रिकॉर्ड की भी समीक्षा होगी? क्योंकि, चारधाम यात्रा में हेलीकॉप्टर सेवाओं का महत्व अपनी जगह है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा से बड़ा कोई व्यावसायिक या परिचालन लक्ष्य नहीं हो सकता।
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