सीएम धामी की 'जीरो टॉलरेंस' नीति से भूमि धोखाधड़ी पर प्रशासन का सख्त एक्शन, 125 मामलों में सुनवाई
देहरादून गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में शनिवार को सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में पूर्व में दिए…
सीएम धामी की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का असर, भूमि धोखाधड़ी पर प्रशासन ने कसा शिकंजा
कम शब्दों में कहें तो, गढ़वाल आयुक्त की अध्यक्षता में भूमि धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई हुई, जिसमें प्रशासन ने कुल 125 मामलों का निस्तारण किया।
देहरादून में गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में शनिवार को सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में भूमि धोखाधड़ी समन्वय समिति की उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन हुआ। इस बैठक में पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा की गई।
बैठक में 20 लंबित और 105 नए मामलों सहित कुल 125 मामलों की सुनवाई की गई। परिषद ने 45 मामलों का निस्तारण करने के साथ ही 24 मामलों में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने के निर्देश दिए। इनमें से सबसे अधिक 74 मामले देहरादून जनपद के हैं। हरिद्वार के 15, पौड़ी के 13, टिहरी के 02 और चमोली का 01 प्रकरण शामिल है।
गढ़वाल आयुक्त ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य सरकार और मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के अंतर्गत भूमि धोखाधड़ी से संबंधित मामलों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन मामलों का त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करें और जिन मामलों में संयुक्त निरीक्षण की आवश्यकता हो, उन्हें शीघ्र पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
भूस्वामियों के हितों की सुरक्षा
गठित समिति द्वारा लैंड फ्रॉड से जुड़े मामलों की नियमित समीक्षा की जा रही है। आयुक्त ने कहा कि हर 15 दिनों पर इन मामलों की समीक्षा की जाती है। इस ताजा बैठक में, 125 मामलों पर चर्चा की गई, जिनमें से 24 मामले गंभीर पाए गए, जिनमें तत्काल एफआईआर दर्ज करने की आवश्यकता थी।
इन मामलों में खासकर भूमि पर कब्जा करने और जमीन को खुर्द-बुर्द करने की 13 शिकायतें शामिल हैं, जिनमें उदय सिंह, सुचेता सेमवाल, राजीव जायलवाल, गुलाब सिंह, किरन बागड़ी, अजय कुमार, संजीव गर्ग जैसे नाम शामिल हैं।
चौंकाने वाली जानकारियाँ
आयुक्त द्वारा जानकारी दी गई कि जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। कहीं बिना जमीन के बिक्री, कहीं खसरा नंबर में हेरफेर कर भूमि का अवैध दी जाना, और कुछ मामलों में भूमि को गलत तरीके से दो गुना बताकर बेचा जाना शामिल है। ऐसे गंभीर धोखाधड़ी मामलों में पुलिस को सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा, 24 एफआईआर योग्य मामलों के अतिरिक्त, 45 अन्य मामलों का भी निस्तारण किया गया है। इनमें कुछ मामलों में पक्षों के बीच आपसी समझौता किया गया है, जबकि अन्य में प्रशासनिक हस्तक्षेप के माध्यम से समस्याएं सुलझाई गई हैं।
भविष्य की दिशा
आयुक्त ने बड़े भू-क्षेत्र से जुड़े मामलों में कार्रवाई में देरी पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसे लंबित प्रकरणों में 15 दिनों के भीतर ठोस प्रगति सुनिश्चित कर कार्रवाई की जाए। उन मामलों में, जिनमें अवैध निर्माण सिद्ध हो गया है, त्वरित कार्रवाई की जाएगी। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि सभी भूमि धोखाधड़ी मामलों में एफआईआर दर्ज करने और कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
समिति की बैठक में गढ़वाल के पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप, अपर आयुक्त उत्तम सिंह चौहान, अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा, एसपी ग्रामीण जया बलूनी समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह बैठक न केवल भूमि धोखाधड़ी के मामलों को सुलझाने में उपयोगी साबित होगी बल्कि भूस्वामियों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी।
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Team Netaa Nagari, सुषमा रानी
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