पीएनजी पीजी कॉलेज रामनगर में ‘मेरे सपनों का भारत, विकसित भारत 2047’ संगोष्ठी का आयोजन
‘मेरे सपनों का भारत’ संगोष्ठी में गूंजा विकसित भारत 2047 का संकल्प, युवाओं की भूमिका पर हुआ मंथनरामनगर, 13 अक्टूबर। पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रामनगर में समाजशास्त्र विभाग के तत्वावधान…
पीएनजी कॉलेज में ‘मेरे सपनों का भारत, विकसित भारत 2047’ विषय पर संगोष्ठी
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कम शब्दों में कहें तो, पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रामनगर में ‘मेरे सपनों का भारत, विकसित भारत 2047’ विषय पर एक प्रेरणादायक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का लक्ष्य छात्रों और शोधार्थियों को विकसित भारत के विचारों से अवगत कराना था।
संगोष्ठी का उद्देश्य
13 अक्टूबर को आयोजित इस संगोष्ठी में युवाओं की भूमिका और उनके योगदान पर विशेष जोर दिया गया। समाजशास्त्र विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों ने अपने विचार साझा किए और एक विकसित भारत की संकल्पना पर मंथन किया। यह संगोष्ठी न केवल विचारों का आदान-प्रदान करने का मंच थी, बल्कि यह उन युवाओं के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत थी, जो राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।
विकसित भारत का दृष्टिकोण
संगोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए वरिष्ठ अतिथियों ने भारत के विकास के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि 2047 में जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष का जश्न मनाएगा, तब यह देश कैसे दिखेगा और इसके लिए युवाओं को किस प्रकार की तैयारी करनी होगी। इस क्रम में, युवाओं की सोच, उनकी ऊर्जा और उत्साह को विकसित भारत की दिशा में कैसे मोड़ा जाए, इस पर चर्चा की गई।
युवाओं की भूमिका
संगोष्ठी में यह बात सामने आई कि हमारे युवा केवल भविष्य के नेता ही नहीं, बल्कि आज की समस्याओं के समाधान भी हैं। शिक्षा, तकनीक, और समाज सेवा के माध्यम से वे अपनी पहचान बना सकते हैं और एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।
निष्कर्ष
इस प्रकार, ‘मेरे सपनों का भारत’ संगोष्ठी ने नए विचार और दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। यह कार्यक्रम निश्चित रूप से रामनगर के युवाओं को प्रेरित करेगा, ताकि वे भविष्य के भारत के निर्माण में सार्थक योगदान दे सकें। इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि छात्रों को केवल शिक्षा नहीं दी जानी चाहिए, बल्कि उन्हें समाज के प्रति उनके दायित्वों के लिए भी तैयार किया जाना चाहिए।
इस विशेष संगोष्ठी ने यह भी प्रदर्शित किया कि हमें अपने सपनों को साकार करने के लिए क्रियाशील रहना होगा। संगोष्ठी के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने एकजुटता के साथ ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को दोहराया।
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यह लेख टीम नेटा नगरी की ओर से विस्तृत किया गया है।
— नीतू शर्मा, टीम नेटा नागरी
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