नैनीताल में निजी स्कूलों की अवैध फीस वसूली पर कार्रवाई, अभिभावकों को लौटाए गए ₹39 लाख
देहरादून/हल्द्वानी नैनीताल जिले में निजी स्कूलों की मनमानी के चलते अवैध रूप से फीस वसूली पर शिक्षा विभाग ने शिकंजा कस दिया है। बीते अप्रैल माह में हुई जांच के…
नैनीताल में निजी स्कूलों की अवैध फीस वसूली पर कार्रवाई
कम शब्दों में कहें तो, नैनीताल जिले में निजी विद्यालयों द्वारा की जा रही अवैध फीस वसूली पर शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। प्रशासन के निर्देश पर 46 स्कूलों ने अभिभावकों को ₹39 लाख से अधिक की फीस वापस लौटाई है।
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शिक्षा विभाग की जांच का नतीजा
देहरादून/हल्द्वानी — नैनीताल जिले में निजी स्कूलों ने लंबे समय से अवैध रूप से फीस वसूली की थी, जिसके चलते शिक्षा विभाग ने हाल में जांच की। इस जांच में पाया गया कि 87 निजी विद्यालयों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए अतिरिक्त शुल्क वसूला था।
इस जांच के दौरान प्रशासन ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए निर्देश दिए कि 46 स्कूली संस्थानों को अभिभावकों को ₹39 लाख 5 हजार 405 रुपये की अतिरिक्त फीस लौटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, कई स्कूलों ने ट्यूशन फीस, परीक्षा शुल्क और पंजीकरण शुल्क में भी कमी की है।
दूसरे विद्यालयों की स्थिति
इसके अंतर्गत, 8 विद्यालयों ने नियमों के मुताबिक बढ़ाई गई ट्यूशन फीस को कम किया है जबकि 39 विद्यालयों ने परीक्षा शुल्क में भी कमी की है। सूचना के अनुसार, 15 निजी विद्यालयों ने पंजीकरण शुल्क को कम या शून्य कर दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि जांच में ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) शुल्क पर भी मनमानी वसूली का मामला सामने आया था। सरकार द्वारा निर्धारित टीसी शुल्क केवल ₹1 है, लेकिन कई विद्यालय इससे 100 से लेकर 1000 रुपये तक का वसूली कर रहे थे। प्रशासन के आदेश के बाद अब टीसी शुल्क को भी घटाकर ₹1 कर दिया गया है और अतिरिक्त वसूली की गई रकम वापस की जा रही है।
क्या आगे की कार्रवाई होगी?
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि निजी विद्यालय आगे भी नियमों का उल्लंघन करते पाए जाते हैं, तो उनकी मान्यता समाप्त करने की संस्तुति की जा सकती है। यह कदम भविष्य में शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने में सहायक साबित होगा।
इस कार्रवाई का अभिभावकों ने स्वागत किया है और इस उम्मीद के साथ कहा है कि यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहनी चाहिए ताकि निजी संस्थानों की मनमानी पर काबू पाया जा सके। शिक्षा के अधिकार की रक्षा हेतु यह एक सकारात्मक कदम है।
उम्मीदें और प्रतिस्पर्धा
नैनीताल के अभिभावक और छात्र इन कदमों से उम्मीद कर रहे हैं कि निजी स्कूलों में पारदर्शिता एवं विधिकता का पालन होगा। यदि यह पहल सफल होती है, तो अन्य जिलों में भी इसे लागू किया जा सकता है, जिससे पूरी राज्य में निजी शिक्षा संस्थानों की स्वास्थ्य परीक्षाएं संभव होंगी।
इसके अलावा, छात्रों की शिक्षा का स्तर और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए अत्यन्त आवश्यक है कि निजी शिक्षण संस्थान भी अपनी सुविधाएं और फीस संरचना का अनुगमन करें।
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— टीम नेटा नागरी, स्नेहा शर्मा
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