देहरादून में मदरसे का औचक निरीक्षण: शिक्षा व सुविधाओं की खामियों ने बढ़ाई चिंता
देहरादून, 24 अप्रैल 2026। उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने मदरसा बोर्ड के समाप्त होने
देहरादून में मदरसे का औचक निरीक्षण: शिक्षा व सुविधाओं की खामियों ने बढ़ाई चिंता
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कम शब्दों में कहें तो देहरादून के मदरसे में शिक्षा एवं बुनियादी सुविधाओं की स्थिति गंभीर रूप से चिंताजनक है, जैसा कि हाल ही में किए गए औचक निरीक्षण में उजागर हुआ।
देहरादून, 24 अप्रैल 2026। उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने मदरसा बोर्ड के समाप्त होने के बाद, नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत पर आजाद कॉलोनी स्थित एक मदरसे का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान आयोग के सचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल और बाल मनोवैज्ञानिक डॉ. निशात इकबाल भी मौजूद रहे।
निरीक्षण में बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिन्हें आयोग ने चिंताजनक बताया।
अस्वच्छता और खराब रहन-सहन व्यवस्था
मदरसे में बच्चों के लिए अस्वच्छ बिस्तरों की व्यवस्था देखी गई। भीषण गर्मी के बावजूद बच्चों को रजाई का उपयोग करते पाया गया। बच्चों के सोने और पढ़ाई की व्यवस्था एक ही स्थान पर थी, जहां चौकी पर ही पढ़ाई कराई जा रही थी। निरीक्षण के दौरान कई बच्चे सोते मिले, जबकि वह पढ़ाई का समय था।
शिक्षा व्यवस्था में गंभीर कमी
आयोग द्वारा किए गए शैक्षिक आकलन में बड़ा असंतुलन सामने आया। बड़ी उम्र के छात्र छोटी कक्षाओं में पढ़ते पाए गए और मदरसे में गणित, अंग्रेजी और हिंदी जैसी मूलभूत विषयों की किताबों का अभाव था। प्रबंधन ने बताया कि मुख्य रूप से कुरान शरीफ की शिक्षा दी जाती है।
अपर्याप्त शिक्षक और ढांचा
मदरसे में केवल दो शिक्षकों की नियुक्ति बताई गई, जिनमें से एक निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित था। अनुपस्थित शिक्षक ने फोन पर बताया कि वह पेशे से वकील हैं और समय मिलने पर पढ़ाने आएंगे। कक्षाएं हवादार नहीं थीं और वेंटिलेशन की कमी साफ देखी गई।
बाहरी बच्चों की मौजूदगी पर सवाल
निरीक्षण में कुछ बच्चे बिहार से और कुछ मेहूंवाला क्षेत्र से आए हुए पाए गए, जिससे उनके प्रवेश और देखरेख को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
रसोई और स्वच्छता व्यवस्था बदहाल
रसोईघर में साफ-सफाई का अभाव पाया गया, जबकि रसोइये ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 65 लोगों का भोजन तैयार किया जाता है।
दस्तावेजों और वैधता पर संदेह
मदरसे के संचालन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज निरीक्षण के दौरान प्रस्तुत नहीं किए गए। यह स्पष्ट नहीं हुआ कि संस्थान पूर्व में मदरसा बोर्ड में पंजीकृत था या नहीं। यू-डाइस (UDISE) पंजीकरण और नियमानुसार संचालन को लेकर भी स्थिति अस्पष्ट रही।
आयोग ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि बच्चों के अधिकारों और भविष्य के साथ इस तरह की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। साथ ही, बाहरी बच्चों की मौजूदगी को देखते हुए मानव तस्करी की समस्या पर भी जाँच आवश्यक बताई गई।
आयोग की सख्त टिप्पणी
आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा कि बच्चों को निर्धारित नियमों के तहत आवासीय सुविधाएं दी जानी चाहिए। गरीब बच्चों के लिए कई सरकारी आवासीय योजनाएं उपलब्ध हैं, ऐसे में उन्हें मुख्यधारा से दूर रखना उनके भविष्य के साथ अन्याय है।
इस सामूहिक चौकसी के माध्यम से हमें यह सीखने को मिलता है कि बच्चों की शिक्षा और उनकी भलाई हमेशा प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके अधिकारों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है।
स्रोत: Netaa Nagari
सादर,
टीम नेटा नगरी
स्नेहा शर्मा
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