सेवा ही धर्म: आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की निस्वार्थ जनसेवा और नैतिकता की प्रेरणा

देहरादून/उत्तराखंड। अमित भट्ट जहाँ एक ओर सरकारी पदों पर बैठे लोगों पर अक्सर सुविधाओं के दुरुपयोग और व्यक्तिगत लाभ के

Apr 16, 2026 - 09:37
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सेवा ही धर्म: आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की निस्वार्थ जनसेवा और नैतिकता की प्रेरणा
सेवा ही धर्म: आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की निस्वार्थ जनसेवा और नैतिकता की प्रेरणा

सेवा ही धर्म: आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की निस्वार्थ जनसेवा और नैतिकता की प्रेरणा

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कम शब्दों में कहें तो: उत्तराखंड के आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने अपने उदाहरण से साबित किया है कि सच्ची सेवा भावना आज भी जीवित है। उन्होंने ₹3 लाख की राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करके जनसेवा की आदर्श मिसाल पेश की है।

उत्तराखंड के देहरादून में, आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने एक बार फिर साबित किया है कि सरकारी पद और विशेषाधिकार का उपयोग केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं किया जा सकता। जब आमतौर पर हम सरकारी अधिकारियों के खिलाफ आरोप सुनते हैं, तब चतुर्वेदी का यह कदम समाज में विश्वास और प्रेरणा का स्रोत बनता है।
उन्होंने अपने आधिकारिक दौरे के दौरान प्राप्त ₹3 लाख की राशि को मुख्यमंत्री राहत कोष में दान करके एक नायाब उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह राशि उन्हें 17 जून 2016 से 31 अगस्त 2025 के बीच 447 दिनों के लिए मिलने वाले भत्ते के रूप में मिली थी।

सेवा भावना का मूल — देवभूमि के प्रति समर्पण
चतुर्वेदी ने एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से स्पष्ट किया कि उनका यह कदम दिखावे का नहीं, बल्कि उत्तराखंड के प्रति उनकी आंतरिक संवेदना की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक विरासत को सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। यदि उनकी मदद से किसी जरूरतमंद को सहायता मिल सके, तो यही उनके लिए सबसे बड़ी संतुष्टि है।

पहले भी कर चुके हैं कई प्रेरणादायक कार्य

संजीव चतुर्वेदी का सेवा का यह रास्ता नया नहीं है। उन्होंने पहले भी कई प्रेरणादायक कार्य किए हैं।
वर्ष 2015 में उन्हें एशिया के प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। इस पुरस्कार की पूरी राशि उन्होंने प्रधानमंत्री राहत कोष में दान कर दी थी।
फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवान के परिवार को उन्होंने लगभग ₹2.50 लाख की सहायता भी प्रदान की। इसके अलावा, दिसंबर 2015 में उन्हें मिले भ्रष्टाचार विरोधी पुरस्कार की राशि ₹2.4 लाख भी उन्होंने एक जरूरतमंद परिवार को दी थी।

इन सभी कार्यों के माध्यम से यह प्रमाणित होता है कि चतुर्वेदी के लिए सेवा केवल एक कर्तव्य नहीं, बल्कि उनके जीवन का उद्देश्य है।

प्रशासनिक ईमानदारी का जीवंत उदाहरण

आज के समय में, जब प्रशासनिक तंत्र पर पारदर्शिता और जिम्मेदारी को लेकर लगातार सवाल उठते रहते हैं, ऐसे में श्री चतुर्वेदी जैसे अधिकारी इस व्यवस्था को मजबूत करने का कार्य कर रहे हैं। उनकी यह पहल यह संदेश देती है कि यदि ईमानदारी और नीयत साफ हो, तो सरकारी पद भी जनसेवा का सशक्त माध्यम बन सकते हैं।

उनका कार्य केवल आर्थिक योगदान नहीं है, बल्कि एक नैतिक संदेश भी है। यह संदेश समाज के सभी वर्गों—जैसे कि सरकारी अधिकारी, व्यापारी या आम नागरिक—को अपनी सामर्थ्य के अनुसार समाज को योगदान देने की प्रेरणा देता है।
संजीव चतुर्वेदी का यह प्रेरणादायक कदम न केवल उत्तराखंड के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक सबक है। उन्होंने दर्शाया है कि सच्ची सेवा केवल पद या प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि नीयत और कर्म से होती है। ऐसे उदाहरण ही समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव रखते हैं और आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा दिखाते हैं।

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सादर,
टीम नेटा नगरी
नमिता शर्मा

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