जौनसार बावर सांस्कृतिक महोत्सव: मुख्यमंत्री धामी ने चकराता-कालसी के विकास के लिए ₹120 करोड़ की घोषणा
मुख्य उद्देश्य: 08 जून 2026 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जौनसार बावर क्षेत्र के पारंपरिक सांस्कृतिक महोत्सव में प्रतिभाग किया। इसका उद्देश्य क्षेत्र की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक कलाओं…
जौनसार बावर सांस्कृतिक महोत्सव में मुख्यमंत्री धामी की विशेष घोषणाएँ
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 08 जून 2026 को जौनसार बावर क्षेत्र के पारंपरिक सांस्कृतिक महोत्सव में भाग लेते हुए इस क्षेत्र की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को सहेजने और इसके विकास के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएँ की।
मुख्यमंत्री का लक्ष्य
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में जौनसार बावर की पारंपरिक सांस्कृतिक महोत्सव की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह क्षेत्र न केवल जनजातीय संस्कृति का केंद्र है, बल्कि इसे सहेजने की आवश्यकता है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस सांस्कृतिक धरोहर को जिएँ।
महासू देवता मंदिर का विकास
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि महासू देवता मंदिर का विकास ₹120 करोड़ की लागत से किया जाएगा। यह मंदिर स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है।
विकास परियोजनाएँ
इसके अलावा, चकराता और कालसी ब्लॉक के विकास के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं की भी घोषणा की गई। इनमें शामिल हैं:
- समरजेंस मोटर मार्ग का चौड़ीकरण और डामरीकरण
- यमुना नदी पर 60 मीटर स्पैन पुल का निर्माण
इन विकास परियोजनाओं का उद्देश्य स्थानीय आधारभूत संरचना को मजबूत बनाना और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को सुधारना है।
सांस्कृतिक महोत्सव का महत्व
यह महोत्सव स्थानीय कलाकारों और जनजातीय समुदायों के लिए अपने प्रतिभाओं को प्रदर्शित करने का एक मौका है। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नृत्य, संगीत और लोक कला की प्रस्तुतियाँ शामिल थीं, जो दर्शकों को आकर्षित करती हैं।
भविष्य की दिशा
मुख्यमंत्री धामी ने इस बात पर जोर दिया कि इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देते हैं बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त किया जा सकता है।
जौनसार बावर क्षेत्र और महासू देवता मंदिर के विकास की इन घोषणाओं से यह साफ है कि राज्य सरकार इस क्षेत्र के प्रति गंभीर है और इसे विकास की नई ऊँचाइयों पर ले जाने का इरादा रखती है।
इस महोत्सव में स्थानीय लोगों की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि वे अपने समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
देश के विभिन्न हिस्सों में इस तरह के महोत्सवों का आयोजन होना चाहिए ताकि हमारी संस्कृति और परंपराएँ जीवित रह सकें।
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सादर,
सोनिया रानी,
टीम नेटaa नागरी
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