जिला बदर होने से बिल्डर पुनीत अग्रवाल को मिले राहत: हाई कोर्ट ने कमिश्नर के आदेश पर लगाई रोक

Rajkumar Dhiman, Dehradun: देहरादून की एटीएस कॉलोनी में गुंडागर्दी के मामले में बिल्डर पुनीत अग्रवाल को जिला बदर करने के डीएम के आदेश पर रोक लगाने के मामले में नया मोड़ आया है। डीएम देहरादून ने पुनीत को मई 2026 में 06 माह के लिए जिला बदर कर दिया था। इस आदेश को कमिश्नर गढ़वाल … The post बिल्डर पुनीत अग्रवाल को जिला बदर होने से रोकने वाला कमिश्नर का आदेश स्टे, हाई कोर्ट ने लगाई रोक appeared first on Round The Watch.

Sep 4, 2026 - 18:37
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जिला बदर होने से बिल्डर पुनीत अग्रवाल को मिले राहत: हाई कोर्ट ने कमिश्नर के आदेश पर लगाई रोक
जिला बदर होने से बिल्डर पुनीत अग्रवाल को मिले राहत: हाई कोर्ट ने कमिश्नर के आदेश पर लगाई रोक

जिला बदर होने से बिल्डर पुनीत अग्रवाल को मिले राहत: हाई कोर्ट ने कमिश्नर के आदेश पर लगाई रोक

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड हाई कोर्ट ने बिल्डर पुनीत अग्रवाल को जिला बदर करने के डीएम के आदेश पर रोक लगाई है। इस फैसले ने पुनीत के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को लेकर एक नई जटिलता उत्पन्न कर दी है।

राजकुमार धीमान, देहरादून: देहरादून की एटीएस कॉलोनी में गुंडागर्दी के मामले में बिल्डर पुनीत अग्रवाल को जिला बदर करने के डीएम के आदेश पर रोक लगाने के मामले में नया मोड़ आया है। डीएम देहरादून ने मई 2026 में पुनीत को छह महीने के लिए जिला बदर कर दिया था। लेकिन जुलाई 2026 में गढ़वाल कमिश्नर ने इस आदेश को निरस्त कर दिया था। अब उत्तराखंड हाई कोर्ट ने कमिश्नर के आदेश पर रोक लगा दी है। इस निर्णय ने बिल्डर पर फिर से कानूनी कार्रवाई का खतरा मंडरा दिया है, हालांकि पुलिस अब तक इस कार्रवाई को प्रभावी नहीं बना पाई थी।

कानूनी टिप्पणी और हाई कोर्ट की सुनवाई

हाई कोर्ट ने इस मामले में महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश नियंत्रण गुंडा अधिनियम, 1970 की धारा 6 के अनुसार अपीलीय प्राधिकारी को मामले को जिला मजिस्ट्रेट के पास रिमांड करने की शक्ति नहीं दी गई है। न्यायमूर्ति आलोक महरा की पीठ ने 3 सितंबर 2026 को हेम शिखा की याचिका पर यह आदेश दिया। अदालत ने फिलहाल 18 जुलाई 2026 को गढ़वाल मंडल के कमिश्नर द्वारा पारित आदेश के प्रभाव और संचालन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है, जो कि 22 सितंबर को होगी।

जिला बदर का आदेश और इसके पीछे की कहानी

इस मामले का संबंध उत्तराखंड में लागू गुंडा एक्ट के तहत बिल्डर पुनीत अग्रवाल के खिलाफ की गई कार्रवाई से है। प्रारंभ में जिला मजिस्ट्रेट ने इस कार्रवाई की। इसके बाद मामले ने अपीलीय स्तर पर प्रवेश किया। कमिश्नर ने अपना आदेश देते हुए कहा कि मामले को फिर से डीएम के पास दोबारा सुना जाने के लिए भेजा जाए। याचिकाकर्ता ने इस पर यह सवाल उठाया कि क्या कमिश्नर को केस वापस भेजने का अधिकार था या नहीं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का संदर्भ

इस कानूनी बहस में इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक अहम फैसले का हवाला दिया गया, जिसमें कमिश्नर के पास मामले को रिमांड करने का अधिकार नहीं माना गया था। इसी दृष्टिकोण को स्वीकार करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया सहमति जताई है, जिससे बिल्डर को एक नई प्रशासनिक राहत मिली है।

प्रतिवादी और याचिकाकर्ता के तर्क

मामले में प्रतिवादी की ओर से यह दलील भी दी गई कि यदि कमिश्नर के आदेश से कोई पक्ष प्रभावित है, तो वह राज्य है, जो कि इस आदेश को चुनौती नहीं दे रहा है। लेकिन हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि याचिकाकर्ता ने मामले में सक्रिय रूप से भाग लिया है, इस कारण वह निश्चित रूप से "aggrieved party" है।

कमिश्नर के आदेश पर ब्रेक

हाईकोर्ट ने कमिश्नर गढ़वाल मंडल के आदेश के प्रभाव और संचालन पर रोक लगाते हुए प्रतिवादी को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। अब यह मामला 22 सितंबर 2026 को फिर से अदालत में आएगा।

बिल्डर पर लगे गंभीर आरोप

जिला प्रशासन ने पुनीत अग्रवाल के खिलाफ गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई की और उन्हें छः महीने के लिए जिला बदर किया, क्योंकि उनके गतिविधियों से कानून-व्यवस्था में बाधा उत्पन्न हो रही थी। विभिन्न मामलों में उनके खिलाफ कई आपराधिक मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं, जिनमें एक डीआरडीओ वैज्ञानिक के साथ मारपीट, बच्चों पर पिस्टल तानना, और सामाजिक सुरक्षा को खतरे में डालने के गंभीर आरोप शामिल हैं।

स्थानीय लोगों की शिकायतें

एटीएस कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि वर्ष 2021 से पुनीत अग्रवाल का व्यवहार लगातार आक्रामक और दबंगई भरा रहा है। कई बार उन्हें पुलिस के माध्यम से शिकायत की गई, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय लोग मानते हैं कि समय रहते उचित कदम ना उठाने से पुनीत के हौसले लगातार बढ़ते गए हैं।

निष्कर्ष

इस नए मोड़ ने न केवल कानून में एक पक्ष को आशा दी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कानूनी प्रक्रिया में कई बार जटिलताएं होती हैं, जिन्हें समझना आवश्यक है। अब यह देखना होगा कि 22 सितंबर 2026 को सुनवाई के बाद इस मामले में क्या नया मोड़ आता है। सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि कोर्ट अब किस दिशा में निर्णय लेता है।

संक्षेप में, बिल्डर पुनीत अग्रवाल के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई अब हाई कोर्ट के हाथ में है, जो कि इसकी आगामी कानूनी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

आप और जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाइट पर जाएं: Netaa Nagari

संपर्क: टीम नेटा नगरी, नाम: राधिका शर्मा

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