कैबिनेट की ऐतिहासिक पहल: ₹23,731 करोड़ गोवर्धन योजना से गांव-गांव बनेगी बायोगैस
किसानों को गोबर और कृषि अवशेष से होगी अतिरिक्त कमाई, ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर नई दिल्ली, 06
कैबिनेट की ऐतिहासिक पहल: ₹23,731 करोड़ गोवर्धन योजना से गांव-गांव बनेगी बायोगैस
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कम शब्दों में कहें तो: किसानों को गोबर और कृषि अवशेष से होगी अतिरिक्त कमाई, ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर।
नई दिल्ली, 06 अगस्त 2026। भारत सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ₹23,731 करोड़ की गोवर्धन (GOBARdhan) योजना को मंजूरी दे दी है। यह योजना 2026-27 से शुरू होकर 2035-36 तक लागू रहेगी, और इसका प्रमुख लक्ष्य गोबर, फसल अवशेष, जैविक कचरे एवं अन्य बायोमास से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन बढ़ाना है। यह कदम न केवल किसानों के लिए आय का एक नया स्रोत बनेगा, बल्कि ग्रामीण विकास में भी अत्यधिक सहायक सिद्ध होगा।
किसानों को मिलेगी अतिरिक्त आय
इस योजना के अंतर्गत, किसानों को गोबर और कृषि अवशेष बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा। इससे न केवल आर्थिक लाभ होगा, बल्कि इससे पराली जलाने जैसी समस्याओं में भी कमी आएगी, जो पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। बायोगैस संयंत्रों की स्थापना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे स्थानीय जनता को लाभ होगा।
बायोगैस उत्पादन में होगा इजाफा
सरकार का लक्ष्य देशों में बायोगैस का उत्पादन मौजूदा स्तर से लगभग 10 गुना बढ़ाना है। इसके लिए नए सीबीजी प्लांट स्थापित किए जाएंगे और निजी निवेश को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे ना केवल बायोगैस का उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि यह ग्रामीण विकास की दिशा में भी सकारात्मक कदम होगा।
परियोजना में मिलेगी सुविधा
सरकार द्वारा योजना में बायोगैस की खरीद की गारंटी, स्थिर मूल्य, पूंजीगत सब्सिडी, पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार, एमएसएमई और उद्यमियों के लिए आसान ऋण एवं ऋण गारंटी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा, जिला स्तर पर परियोजनाओं के समर्थन के लिए विशेष फंड का भी प्रावधान किया जाएगा।
राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा का पथ प्रशस्त
इस योजना के माध्यम से प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भरता कम होगी और इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाएगा। जैविक कचरे का बेहतर उपयोग होने से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भी कमी आएगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, गोवर्धन योजना का यह कदम न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाएगा, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। इससे ग्रामीण समाज में स्थायी विकास की दिशा में एक नई पहचान मिलेगी।
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सादर,
टीम नेटाअगरि,
प्रिया शर्मा
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