हिमालय: आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का आधार - ‘हिमालयन संस्कृति’ पत्रिका के विमोचन पर सीएम पुष्कर सिंह धामी की महत्वपूर्ण बातें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिन्दी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में हिमालयी संस्कृति, समृद्ध परंपराओं और लोक जीवन को समर्पित पत्रिका ‘हिमालयन संस्कृति’…

Sep 15, 2026 - 09:37
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हिमालय: आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का आधार - ‘हिमालयन संस्कृति’ पत्रिका के विमोचन पर सीएम पुष्कर सिंह धामी की महत्वपूर्ण बातें
हिमालय: आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का आधार - ‘हिमालयन संस्कृति’ पत्रिका के विमोचन पर सीएम पुष्कर सिंह धामी की महत्वपूर्ण बातें

हिमालय: आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का आधार

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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिन्दी दिवस के अवसर पर ‘हिमालयन संस्कृति’ पत्रिका का विमोचन किया, जिसमें हिमालयी संस्कृति और परंपराओं पर प्रकाश डाला गया।

हिन्दी दिवस के मौके पर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में 'हिमालयन संस्कृति' नामक पत्रिका के प्रवेशांक का विधिवत विमोचन किया। इस पत्रिका का उद्देश्य हिमालयी संस्कृति, समृद्ध परंपराओं एवं लोक जीवन को उजागर करना है।

हिमालय: एक भौगोलिक पहचान से अधिक

इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हिमालय केवल एक भौगोलिक भूभाग नहीं है, बल्कि यह भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक चेतना का महत्वपूर्ण आधार है। उनके अनुसार, हिमालय की अद्भुत सुंदरता और समृद्धि हमारे भारतीय संस्कृति के गहरे तत्वों को प्रदर्शित करती है।

उन्हें यह भी कहना था कि हिमालय की पर्वतमाला भारतीय समाज में न केवल एक भौतिक पहचान देती है, बल्कि यह आध्यात्मिकता, संस्कृति, और शनिवार त्योहारों से जुड़ी अनेक परंपराओं का स्रोत भी है। उन्होंने सुझाव दिया कि सभी भारतीयों को हिमालय की इस अद्वितीयता को समझना और सराहना चाहिए।

हिमालयी संस्कृति की विविधता

‘हिमालयन संस्कृति’ पत्रिका के जरिए, मुख्यमंत्री ने हिमालयी क्षेत्रों की सांस्कृतिक धरोहर, कलाओं, परंपराओं और जीवन शैली को साझा करने की अपील की। यह पत्रिका विभिन्न हिमालयी समुदायों की विशेषताओं, टोपी, वस्त्र, और आचार-विचार के साथ-साथ उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाएगी।

उन्होंने कहा, "यह आवश्यक है कि हम अपनी पारंपरिक सांस्कृतिक पहचान को सहेजें और इसे आने वाली पीढ़ियों को सौंपें। केवल तभी हम अपनी समृद्ध विरासत को जीवित रख सकेंगे।" मुख्यमंत्री धामी ने इस पत्रिका के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को जोड़ने और उनकी जड़ों से संपर्क में रहने को प्रेरित किया।

समय की आवश्यकता

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आज के समय में दुनिया भर में सांस्कृतिक दृष्टिकोण से बहुत परिवर्तन आ रहा है। ऐसे में, यह जरूरी है कि हम अपनी जड़ों को पहचानें एवं बाल सभा, विश्वविद्यालयों, और अन्य संस्थानों में इन सांस्कृतिक मूल्यों का प्रोत्साहन करें।

हिमालय की संस्कृति का संरक्षण और विकास आज की आवश्यकता है, ताकि इसकी विशेषताएं और परंपराएं किसी प्रकार की भूले नहीं जाएं। मुख्यमंत्री ने इस दिशा में सरकार और समाज के सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

अंत में, मुख्यमंत्री ने हिमालय की विशेषताओं को उजागर करते हुए आग्रह किया कि हम सभी को अपने सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान करना चाहिए और इसे संरक्षण देने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

संपूर्ण समारोह में उपस्थित सभी व्यक्तियों ने मुख्यमंत्री की विचारधाराओं का समर्थन किया और हिमालय की सांस्कृतिक समृद्धि को बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया हमारे पोर्टल पर विजिट करें: Netaa Nagari.

सादर, टीम नेटा नागरी - साक्षी शर्मा

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