सैन्यधाम निर्माण में देरी और बढ़ती लागत: कांग्रेस का तीखा हमला, मंत्री जोशी के इस्तीफे की माँग

देहरादून उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल रामरतन नेगी ने सैन्यधाम के निर्माण में हो रही देरी, लगातार बढ़ती लागत और परियोजना से जुड़े वित्तीय एवं प्रशासनिक…

Sep 7, 2026 - 00:37
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सैन्यधाम निर्माण में देरी और बढ़ती लागत: कांग्रेस का तीखा हमला, मंत्री जोशी के इस्तीफे की माँग
सैन्यधाम निर्माण में देरी और बढ़ती लागत: कांग्रेस का तीखा हमला, मंत्री जोशी के इस्तीफे की माँग

सैन्यधाम निर्माण में देरी और बढ़ती लागत: कांग्रेस का तीखा हमला, मंत्री जोशी के इस्तीफे की माँग

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड कांग्रेस ने सैन्यधाम निर्माण में हो रही देरी और बढ़ती लागत को लेकर सरकार से सवाल उठाए हैं।

देहरादून में उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल रामरतन नेगी ने सैन्यधाम के निर्माण में हो रही देरी, वित्तीय और प्रशासनिक चुनौतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि, सैन्यधाम केवल एक भवन नहीं है, बल्कि यह भारतीय सेना के उन वीर जवानों की स्मृति का प्रतीक है जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी।

सैन्यधाम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कर्नल नेगी ने सैन्यधाम के निर्माण की पूरी टाइमलाइन को साझा करते हुए बताया कि 4 नवंबर 2019 को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा सैन्यधाम की घोषणा की गई। इसके बाद 23 जनवरी 2021 को पुरकुल गांव में इसका शिलान्यास किया गया। 15 दिसंबर 2021 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसका दूसरा शिलान्यास किया। तब इसकी अनुमानित लागत 63 करोड़ रुपये थी एवं इसे दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि, सैन्यधाम के निर्माण के लिए 1,734 शहीद परिवारों की पवित्र मिट्टी लाई गई है, जो इस परियोजना की महत्वता को और बढ़ाती है।

बढ़ती लागत पर उठे सवाल

हाल के दिनों में, परियोजना की लागत को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। 2022 में प्राप्त RTI जानकारी के अनुसार, परियोजना की लागत 48 करोड़ रुपये थी, जबकि 2024 में यह बढ़कर 99 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। कर्नल नेवी ने सवाल किया कि परियोजना के दायरे को बढ़ाने का तर्क क्या सच में उचित है? उन्होंने सरकार से यह जानने का अधिकार मांगा कि संशोधित DPR कब और किसने स्वीकृत की?

कर्नल नेगी ने कहा, "लगभग 48 करोड़ रुपये की परियोजना की लागत अचानक 99 करोड़ रुपये कैसे पहुंच गई? इसका वित्तीय विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है?"

मंत्री जोशी की टिप्पणी पर पार्टी का तीखा प्रतिक्रिया

कर्नल रामरतन नेगी ने मंत्री गणेश जोशी के उस बयान की भी आलोचना की जिसमें उन्होंने कहा था कि सैन्यधाम का "चुनावी लाभ" उठाया जाएगा। कर्नल ने कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह उन सैनिकों और शहीद परिवारों का सम्मान है जिन्होंने देश के लिए बलिदान दिया। इस कारण कर्नल ने मंत्री जोशी के इस्तीफे की मांग की।

कांग्रेस नेत्री सुजाता पॉल ने भी इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाई और कहा, "सैन्यधाम में लाई गई मिट्टी किसी राजनीतिक पार्टी की संपत्ति नहीं है। यह देश और राज्य की सम्पत्ति है।" उन्होंने बताया कि, "हर मां जो अपने बेटे को भारत माता की सेवा के लिए सीमा पर भेजती है, वह उसे किसी पार्टी के लिए नहीं बल्कि देश के लिए भेजती है।"

हर शहीद की स्मृति का सम्मान

सुजाता पॉल ने यह भी व्यक्त किया कि, "जिस शहीद की शहादत पूरे देश की है, उसकी स्मृति को किसी दल के चुनावी लाभ से जोड़ना क्या सही है? शहीद की मिट्टी और सम्मान पूरे देश का है।"

इस विषय पर एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया जिसमें कर्नल रामरतन नेगी, उपाध्यक्ष कर्नल मोहन सिंह रावत, लेफ्टिनेंट सहदेव शर्मा, सुजाता पॉल, और अन्य कांग्रेस नेता शामिल हुए। उनके सवालों और टिप्पणियों ने इस मुद्दे को और अधिक उजागर किया है।

कांग्रेस के इस तीखे हमले ने सरकार पर एक बार फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सरकार सैन्यधाम के निर्माण में पारदर्शिता और जवाबदेही को सुनिश्चित कर पाएगी? यह तो समय ही बताएगा।

अधिक जानकारी के लिए, दौरा करें Netaa Nagari.

इस समाचार को तैयार किया है, टीम नेटाअगर की सदस्य, संगीता वर्मा द्वारा।

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