मुख्यमंत्री ने ऋण-जमा अनुपात बढ़ाने के लिए नियमित शिविर लगाने के दिए निर्देश

  *कम ऋण-जमा अनुपात वाले जनपदों में विशेष अभियान चलाने को कहा* *सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में लोगों को

Jul 9, 2026 - 18:37
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मुख्यमंत्री ने ऋण-जमा अनुपात बढ़ाने के लिए नियमित शिविर लगाने के दिए निर्देश
मुख्यमंत्री ने ऋण-जमा अनुपात बढ़ाने के लिए नियमित शिविर लगाने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री ने ऋण-जमा अनुपात बढ़ाने के लिए नियमित शिविर लगाने के दिए निर्देश

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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कम ऋण-जमा अनुपात वाले जनपदों में विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इस बारे में निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की 97वीं बैठक में बैंकिंग सेवाओं, ऋण वितरण, वित्तीय समावेशन तथा विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने इस अवसर पर बताया कि राज्य के आर्थिक विकास में बैंकिंग क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है और बैंकों को आम लोगों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और उद्यमियों तक ऋण का वितरण आसान बनाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए

मुख्यमंत्री ने कम ऋण-जमा अनुपात की समस्या को लेकर बागेश्वर, पौड़ी, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और टिहरी जनपदों में नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिया कि इन जिलों में नियमित शिविर लगाए जाएं ताकि जिला प्रशासन, लीड बैंक और संबंधित विभाग मिलकर पात्र लोगों की पहचान कर सकें और उन्हें समय पर ऋण उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकारी ऋण-जमा अनुपात को राष्ट्रीय औसत तक पहुंचाने के लक्ष्य के साथ कार्य करने की आवश्यकता है।

बैठक के दौरान

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना आवश्यक है। अगर किसी आवेदन में कमी हो तो उसे तुरंत निरस्त करने के बजाय संबंधित व्यक्ति का मार्गदर्शन किया जाए। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत राज्य ने वार्षिक ऋण योजना के आधार पर लगभग 96 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है। वहीं, एमएसएमई क्षेत्र में 111 प्रतिशत उपलब्धि का आंकड़ा, राज्य की आर्थिक प्रगति को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत पात्र व्यक्तियों को प्राथमिकता के आधार पर ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। इसमें मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना-2.0, वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना, होम-स्टे योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना तथा किसान क्रेडिट कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, पर्यटन और स्थानीय उत्पादों पर आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए बैंक से सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।

डिजिटल बैंकिंग और डिजिटल भुगतान को गांव-गांव तक पहुंचाने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेशन को और मजबूत बनाने के लिए जनधन योजना सहित सभी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना चाहिए। इस प्रकार, उत्तराखण्ड के समग्र विकास में बैंकिंग क्षेत्र की भूमिका और बढ़ जाएगी।

बैठक में मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने साइबर अपराधों को नियंत्रित करने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 को बैंक प्रतिनिधियों से जोड़ने का सुझाव दिया, ताकि साइबर ठगी से संबंधित मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। इस बैठक में अन्य अधिकारियों के अलावा राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की उप समिति की नियमित बैठक आयोजित करने पर भी चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री के इस प्रयास से न सिर्फ ऋण-जमा अनुपात में सुधार होगा, बल्कि संभावित रोजगार और उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलेगा। बैंकों और सरकार के बीच सहयोग से उत्तराखंड की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री आर.के सुधांशु, डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव श्री दिलीप जावलकर और अन्य महत्वपूर्ण अधिकारी उपस्थित रहे।

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सादर,
टीम नेटा नगरी
(नेहा शर्मा)

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