निहंगों पर एफआईआर, कुल्हाल बॉर्डर पर बैरिकेडिंग तोड़ने का मामला बढ़ा

Rajkumar Dhiman, Dehradun: देहरादून की ओर बढ़ने और फिर वापस लौटने के बाद निहंग सिखों का जत्था फिलहाल हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में ही रुका हुआ है। प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बाद तत्काल उत्तराखंड कूच टाल दिया गया था। हालांकि, निहंग नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्रमुख मांगों … The post अज्ञात निहंगों पर एफआईआर, कुल्हाल बॉर्डर पर बैरिकेडिंग तोड़ने और वाहनों को पहुंचाया नुकसान appeared first on Round The Watch.

Jun 27, 2026 - 09:37
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निहंगों पर एफआईआर, कुल्हाल बॉर्डर पर बैरिकेडिंग तोड़ने का मामला बढ़ा
निहंगों पर एफआईआर, कुल्हाल बॉर्डर पर बैरिकेडिंग तोड़ने का मामला बढ़ा

निहंगों पर एफआईआर, कुल्हाल बॉर्डर पर बैरिकेडिंग तोड़ने का मामला बढ़ा

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कम शब्दों में कहें तो, अज्ञात निहंगों पर प्रशासन ने FIR दर्ज की है, जिसमें उन पर बैरिकेडिंग तोड़ने और वाहनों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। ये घटना कुल्हाल बॉर्डर पर हुई है, जहां निहंग सिखों का जत्था पांवटा साहिब में रुका हुआ है।

राजकुमार धिमान, देहरादून: देहरादून की ओर बढ़ने के बाद निहंग सिखों का जत्था फिलहाल हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में रुका हुआ है। प्रशासन ने निहंग प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद तत्काल उत्तराखंड जाने की योजना को टाल दिया है। निहंग नेतृत्व ने कहा है कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो वे आगे की रणनीति तय करेंगे।

निहंग जत्था

इस बीच हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नवनीत सिंह भुल्लर और देहरादून के अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा पांवटा साहिब पहुंचे और निहंग जत्थेदारों के साथ विस्तार से वार्ता की। उन्होंने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

कुल्हाल बॉर्डर पर दर्ज हुई एफआईआर

कुल्हाल चौकी प्रभारी की ओर से अज्ञात निहंग सिखों के खिलाफ हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि 25 जून को उत्तराखंड-हिमाचल सीमा पर पुलिस, पीएसी और आईटीबीपी द्वारा रोके जाने के बावजूद निहंगों ने छोटे-छोटे समूहों में आगे बढ़ने की कोशिश की।

पुलिस कार्रवाई

पुलिस का आरोप है कि जत्था हथियारों के साथ सामूहिक रूप से आगे बढ़ने और गिरफ्तार साथियों की रिहाई की मांग पर अड़ा रहा। इसके बाद कथित रूप से बैरिकेडिंग तोड़ी गई और डंपरों में तोड़फोड़ की गई। पुलिस बल पर वाहन चढ़ाने का भी प्रयास किया गया था।

निहंग नेतृत्व की प्रतिक्रिया

निहंग जत्थेदार अकाली जगदीप सिंह के अनुसार, प्रशासन ने उनकी मांगों पर विचार करने के लिए दो दिन का समय मांगा है। इस आश्वासन के आधार पर, जत्था फिलहाल पांवटा साहिब में स्थिर रहेगा।

निहंग प्रतिनिधि

उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य मांगों में गिरफ्तार चार निहंग साथियों की रिहाई, दर्ज मुकदमे की निष्पक्ष जांच और पुलिस कार्रवाइयों की जांच शामिल है।

सूचनाएं और सुरक्षा हालात

सूत्रों से पता चला है कि निहंगों को पंजाब के मोहाली स्थित सोहाना गुरुद्वारा से लगातार निर्देश मिल रहे हैं। उत्तराखंड पुलिस इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस विवाद का रुख उत्तराखंड की ओर मोड़ने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, यह दावा सरकार या प्रशासन द्वारा पुष्ट नहीं किया गया है।

बॉर्डर पर अधिकारियों की उपस्थिति

शुक्रवार सुबह देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान और एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने उत्तराखंड सीमा पर सुरक्षा का जायजा लिया। प्रशासन का कहना है कि स्थिति सामान्य बनी हुई है।

हाल ही में प्रशासन ने बताया कि पंजाब और चंडीगढ़ से आए अधिकांश निहंग वापस पांवटा साहिब लौट गए हैं। डीएम आशीष चौहान के अनुसार, देर रात हुई वार्ता के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

देर रात का तनाव

प्रशासन के मुताबिक, देर रात निहंग समुदाय के कुछ लोग हिमाचल सीमा से उत्तराखंड में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे। इस दौरान उनके और सुरक्षा बलों के बीच बहस हुई, जिसके बाद बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की गई।

वहां से गुजरते समय तलवारें लहराई गईं और पुलिस द्वारा लगाए गए डंपरों में भी तोड़फोड़ की गई। रात करीब एक बजे 10 से 15 निहंग देहरादून के रेसकोर्स गुरुद्वारे पहुंचे और पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

लगातार वार्ता के बाद, जत्था वापस पांवटा साहिब लौटने पर सहमत हुआ।

मुख्य मांगें अभी भी मौजूद

उत्तराखंड रवाना होने से पहले अपनी मुख्य मांगों को लेकर निहंगों ने सभा की थी, जिसमें चार निहंगों की रिहाई और एफआईआर रद्द करने की मांग की गई थी। हालांकि, ये मांगें अब भी पूरी नहीं हुई हैं।

विवाद का इतिहास

यह विवाद 16 जून को कर्णप्रयाग में हुई हिंसक झड़प से जुड़ा है, जिसमें निहंगों का एक जत्था विवाद में उलझ गया था। इस घटना में कई लोगों के घायल होने की खबरें आई थीं। पुलिस ने चार निहंगों को गिरफ्तार किया था।

बाद में, एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए सिख समुदाय ने आत्मरक्षा का दावा किया और दूसरे पक्ष के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई।

इन हालातों के बीच, नैतिक दबाव बढ़ने के साथ, निहंगों का नया जत्था 25 जून को उत्तराखंड की ओर रवाना हुआ, लेकिन प्रशासन ने उन्हें रोकने की कोशिश की।

देर रात की वार्ता के बाद स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की गई और जत्था वापस लौट गया है। सीमा क्षेत्र में शांति बनी हुई है। अधिक अपडेट के लिए यहां क्लिक करें.

संपादित: टीम नेटा नगरी - प्रियंका शर्मा

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