देहरादून में भारतीय जनता पार्टी की धर्म सभा संपन्न, संस्कृति और धर्म को आगे बढ़ाने पर जोर
देहरादून टपकेश्वर महादेव मंदिर देहरादून के श्रीमहंत 108 कृष्ण गिरी महाराज के पावन सानिध्य में धर्म संस्कृति मठ धर्मशाला प्रकोष्ठ के संयोजक प्रसिद्ध कथा व्यास आचार्य शिव प्रसाद ममगाई की…
भारतीय जनता पार्टी धर्म- संस्कृति मठ धर्मशाला प्रकोष्ठ की धर्म सभा जंगम शिवालय में संपन्न
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में टपकेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित धर्म सभा में प्रदेश की धार्मिक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया गया।
देहरादून: देहरादून के टपकेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित धर्म सभा में भारतीय जनता पार्टी फॉर धर्म- संस्कृति मठ धर्मशाला प्रकोष्ठ की बैठक संपन्न हुई। इस सभा में श्रीमहंत 108 कृष्ण गिरी महाराज के पावन सानिध्य में प्रसिद्ध कथा व्यास आचार्य शिव प्रसाद ममगाई की अध्यक्षता में विभिन्न धार्मिक विचार साझा किए गए। साथ ही सह संयोजक योगाचार्य डा. बिपिन जोशी ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस सभा में देहरादून के कई मंदिरों के सम्मानित पुजारियों और धर्माचार्यों ने भाग लिया।
संपूर्ण उत्तराखंड की संस्कृति का संरक्षण
धर्मसभा में सभी वक्ताओं ने जोर देते हुए कहा कि उत्तराखंड की देवभूमि की देवत्व की रक्षा और उसके संरक्षण के लिए सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे। सभी ने एक स्वर में कहा कि "धर्मों रक्षति रक्षित", अर्थात जो समाज धर्म की रक्षा करेगा, धर्म भी उनकी रक्षा करेगा। इस पर वक्ताओं ने विस्तृत विचार रखा और सरकार से समाज के कल्याण के लिए उचित कदम उठाने की अपेक्षा की।
भारतीय ऋषि मुनि परंपरा का महत्व
टपकेश्वर महादेव मंदिर के महंत कृष्ण गिरी महाराज ने सभी ब्राह्मण बंधुओं का स्वागत करते हुए भारतीय ऋषि मुनि परंपरा को आगे बढ़ाने का महत्व बताया। उन्होंने इसके माध्यम से समाज में एकता और समरसता का संदेश दिया।
धर्म सभा की अध्यक्षता कर रहे आचार्य शिव प्रसाद ममगाई ने मंदिर समितियों और पुजारियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने बुजुर्ग पुजारियों के लिए पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति भी सरकार और मंदिर समितियों की ओर से सहयोग की अपील की।
धर्म संस्कृति का वैभवशाली अतीत
योगाचार्य डा. बिपिन जोशी ने कहा कि धर्म संस्कृति का अतीत गौरवशाली है और वर्तमान में इसे संजोकर रखना हर सनातनी का धर्म और कर्तव्य है। उन्होंने सभी को 'राष्ट्र प्रथम' और 'सनातन प्रथम' का आहवान किया।
विद्वत सभा देहरादून के अध्यक्ष आचार्य हर्षपति गोदियाल ने नई पीढ़ी को संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने की आवश्यकता को रेखांकित किया। सुप्रसिद्ध कथा व्यास आचार्य सुभाष जोशी ने वर्तमान समय में भक्ति और आध्यात्मिकता के महत्व को बताते हुए कहा कि इसे सामाजिक स्तर पर भी प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
नई पीढ़ी का सही मार्गदर्शन
आचार्य उदय शंकर भट्ट ने मंदिरों में अधिक से अधिक संख्या में सनातन धर्मियों के जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने इसे नई पीढ़ी को सही दिशा दिखाने के लिए एक रामबाण उपाय बताया।
इस धर्म सभा में कई प्रमुख धार्मिक नेताओं और समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने श्री कृष्ण जन्माष्टमी की अग्रिम बधाई भी दी, जिससे त्यौहार की धूमधाम को बढ़ावा मिला।
कुल मिलाकर यह धर्म सभा धर्म संस्कृति को आगे बढ़ाने और उत्तराखंड की पहचान को मजबूती देने का एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
इसके साथ ही, धर्म संस्कृति मठ धर्मशाला प्रकोष्ठ के सह संयोजक घनश्याम शर्मा, सह संयोजक शेखर श्रीवास्तव, महानगर संयोजक आशीष बलूनी, सह संयोजक विजय डबराल सहित अन्य प्रमुख लोग भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
इस प्रकार, इस सभा ने यह सिद्ध किया कि जब धर्म और संस्कृति का संरक्षण होता है, तब वह समाज को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करता है।
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सादर,
टीम नेटaa नगरी
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