झारखंड में 2034 हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति में उच्च न्यायालय का आदेश लंबित, युवा जिद्दी

Jharkhand Teacher Recruitment: झारखंड में 2034 हाईस्कूल शिक्षक पदों पर नियुक्ति हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद लंबित है. छह महीने बीतने के बाद भी जेएसएससी ने प्रक्रिया पूरी नहीं की. अभ्यर्थियों ने अवमानना याचिका दायर की है. यह मामला अब फिर हाईकोर्ट में पहुंच गया है, जिससे युवाओं में नाराजगी बढ़ रही है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें. The post झारखंड में 2034 पदों पर हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति नहीं, 6 महीने पहले हाईकोर्ट ने दिया था आदेश appeared first on Prabhat Khabar.

Apr 4, 2026 - 15:17
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झारखंड में 2034 हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति में उच्च न्यायालय का आदेश लंबित, युवा जिद्दी
झारखंड में 2034 हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति में उच्च न्यायालय का आदेश लंबित, युवा जिद्दी

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कम शब्दों में कहें तो, झारखंड में 2034 हाईस्कूल शिक्षक पदों पर नियुक्ति मुद्दा एक बार फिर गर्म हो गया है। छह महीने पहले दिए गए उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद, नियुक्ति प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है। इससे अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ी है और मामला फिर से अदालत में पहुंच गया है। पूरी खबर पढ़ें।

रांची से टीम Netaa Nagari की रिपोर्ट

झारखंड शिक्षक भर्ती: वर्ष 2016 से जारी स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा की प्रक्रिया में बार-बार हुई देरी ने छात्रों और अभ्यर्थियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। पिछले छह महीनों में एक भी नियुक्ति नहीं होने से अभ्यर्थियों की नाराजगी और बढ़ गई है। यह मामला अब फिर से झारखंड उच्च न्यायालय में पहुंच चुका है।

हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं हुई नियुक्ति

एक सितंबर 2025 को झारखंड उच्च न्यायालय ने 258 रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट आदेश दिया था कि रिक्त 2034 पदों को याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों से भरा जाए। अदालत ने इसके लिए एक समय सीमा भी निर्धारित की थी, जिसमें अभ्यर्थियों को आठ सप्ताह के भीतर अपने दस्तावेज झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) को सौंपने का निर्देश दिया गया था।

हालांकि, विधि का पालन करते हुए अभ्यर्थियों ने समय सीमा के भीतर सभी दस्तावेज जमा कर दिए, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया अब भी लंबित है। इस स्थिति से चिंतित अभ्यर्थियों ने अवमानना याचिका पर विचार करना शुरू कर दिया है।

200 से अधिक अभ्यर्थियों ने दायर की अवमानना याचिका

उच्च न्यायालय के आदेश का पालन न होने की स्थिति में 200 से अधिक अभ्यर्थियों ने झारखंड उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की है। इनकी ओर से अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने याचिका पेश की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जेएसएससी ने नियुक्ति प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया, इसे न्यायालय की अवमानना माना जा रहा है।

एकल पीठ का आदेश और परिस्थिति

इस विषय में जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया था और पूरे मामले की जांच के लिए उच्च न्यायालय के रिटायर्ड जस्टिस डॉ. एसएन पाठक की अध्यक्षता में एक सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया था।

कमेटी को रिपोर्ट सौंपने का आदेश

कमेटी को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट के साथ राज्य सरकार को जानकारी देने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर उस रिपोर्ट पर निर्णय लेना था। कोर्ट ने 2034 रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया को छह महीने के भीतर पूर्ण करने का आवाहन किया था।

कमीशन गठन में आई बाधा

हालांकि, इस प्रक्रिया में एक नई बाधा उत्पन्न हो गई है, क्योंकि जस्टिस डॉ. एसएन पाठक ने वन मैन कमीशन का अध्यक्ष बनने से असमर्थता जताई। इसके कारण अब कोर्ट को नए नामों पर विचार करना पड़ा है। इस मामले की आगे की सुनवाई अब 7 अप्रैल को निर्धारित की गई है, जिससे नियुक्तियों में और देरी की संभावनाएँ बढ़ गई हैं।

राज्य सरकार और जेएसएससी की चुनौती

इस बीच, राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की हैं। दोनों पक्षों का कहना है कि इस आदेश में कई विसंगतियां हैं और इसे निरस्त किया जाना चाहिए। हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि अब तक इस आदेश पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगी है।

नियुक्ति विवाद के पीछे की कहानी

यह पूरा मामला वर्ष 2016 में शुरू हुई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। जेएसएससी ने हाईस्कूल शिक्षकों के 17,786 पदों पर नियुक्ति के लिए परीक्षा का आयोजन किया था, जिसके आधार पर 26 विषयों की स्टेट मेरिट लिस्ट जारी की गई थी। इस प्रक्रिया में कई अभ्यर्थी, जिन्होंने कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए थे, नियुक्ति से वंचित रह गए और उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

अभ्यर्थियों में बढ़ती नाराजगी

इस लंबी प्रक्रिया के चलते अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। कई युवा वर्षों से अपनी नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं, और उनका कहना है कि सरकार और आयोग की लापरवाही ने उनके भविष्य को लटका दिया है।

शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव

2034 पदों पर नियुक्तियों की देरी का सीधा असर राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। स्कूलों में शिक्षकों की कमी से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। यदि समय पर नियुक्ति पूरी हो जाती, तो निश्चित रूप से स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सकता था।

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7 अप्रैल को होगी सुनवाई

अब सभी की निगाहें 7 अप्रैल को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई हैं। यह देखना अहम होगा कि अदालत इस मामले में क्या निर्णय लेगी और क्या जेएसएससी को जल्द से जल्द नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया जाएगा। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि सरकारी नियुक्तियों में देरी क्यों होती है और इसका प्रभाव हमेशा युवाओं पर ही क्यों पड़ता है।

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संपर्क करें: टीम नेटा नगरी | राधिका शर्मा

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