जीएसटी चोरी का नया खुलासा: सिगरेट के बिलों में बेनकाब हुई धांधली

Rajkumar Dhiman, Dehradun: तंबाकू और सिगरेट कारोबार में जीएसटी चोरी का एक नया तरीका राज्य कर विभाग की जांच में सामने आया है। विभाग ने खुलासा किया है कि कुछ कारोबारियों ने 1 फरवरी 2026 के बाद बेची गई सिगरेटों के बिल जनवरी 2026 की तारीख में जारी कर दिए, ताकि बदले हुए कर ढांचे … The post सिगरेट की बिक्री बाद में और बिल पहले, जीएसटी चोरी का नया खेल बेनकाब appeared first on Round The Watch.

Jul 25, 2026 - 09:37
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जीएसटी चोरी का नया खुलासा: सिगरेट के बिलों में बेनकाब हुई धांधली
जीएसटी चोरी का नया खुलासा: सिगरेट के बिलों में बेनकाब हुई धांधली

जीएसटी चोरी का नया खुलासा: सिगरेट के बिलों में बेनकाब हुई धांधली

राजकुमार धीमान, देहरादून: तंबाकू और सिगरेट उद्योग में जीएसटी चोरी का एक नया तरीका राज्य कर विभाग की जांच में सामने आया है। हाल ही में एक बड़ी जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि कुछ कारोबारी 1 फरवरी 2026 के बाद बेची गई सिगरेटों के बिलों को जनवरी 2026 की तिथि में जारी कर रहे थे। इस तरह से वे पुराने कर दरों का लाभ उठाकर सरकारी राजस्व में भारी चूना लगा रहे थे। इसलिए, राज्य कर विभाग ने इन कारोबारियों के अभिलेखों को जब्त किया है और विस्तृत जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। देहरादून संभाग से अकेले 4.04 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा कराए गए हैं।

प्रतीक जैन, आयुक्त राज्य कर, उत्तराखंड।

राज्य कर विभाग को पिछले कुछ समय से सिगरेट, गुटखा, खैनी, पान मसाला और अन्य तंबाकू उत्पादों के कारोबार में कर चोरी की लगातार सूचनाएं मिल रही थीं। इसके जवाब में, आयुक्त प्रतीक जैन के नेतृत्व में, पूरे प्रदेश में एक विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान की तैयारी के लिए 15 दिन पहले से खुफिया सूचनाओं और कारोबारी गतिविधियों की जांच की गई।

देहरादून संभाग में उपायुक्त (वि.अनु.शा./प्रवर्तन) सुरेश कुमार की निगरानी में 23 जुलाई 2026 को 17 टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने देहरादून, ऋषिकेश और विकासनगर में तंबाकू उत्पादों के व्यापारियों के प्रतिष्ठानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच के दौरान व्यापारियों के स्टॉक, खरीद-बिक्री और कर संबंधित अभिलेखों की गहन परीक्षा की गई। इस कार्रवाई में एक ही मौके पर 4.04 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा कराए गए, साथ ही कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों और रिकॉर्डों को विभाग ने अपने कब्जे में लिया।

बैक डेटिंग का खेल कैसे बेनकाब हुआ

जांच में यह सामने आया कि सिगरेट पर सेस खत्म होने और कर की दर 40 प्रतिशत लागू होने के बाद भी कुछ व्यापारियों ने बिलों में हेराफेरी की। विभाग के अनुसार, 1 फरवरी 2026 के बाद हुई बिक्री के इनवॉइस को जनवरी 2026 की तिथि में जारी किया गया, जिससे बिक्री को पुरानी कर ढांचे के दौरान दिखाया जा सके। राज्य कर विभाग इसे सुनियोजित कर चोरी का तरीका मान रहा है और इससे जुड़े सभी अभिलेखों का फोरेंसिक परीक्षण किया जाएगा।

बैक डेटिंग के अलावा, जांच में स्टॉक में भारी अंतर, अपंजीकृत और अस्तित्वहीन व्यापारियों से खरीद-बिक्री, प्रदेश से बाहर बिक्री दिखाने तथा अघोषित व्यापारिक स्थलों से कारोबार करने जैसे कई गंभीर मामले भी उजागर हुए हैं। इन सभी मामलों में दस्तावेज जब्त कर विस्तृत जांच का कार्य शुरू कर दिया गया है।

कार्रवाई में राज्य कर विभाग के उपायुक्त अवधेश कुमार पाण्डेय और अन्य 50 अधिकारियों ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह अभियान 23 जुलाई को पूरे उत्तराखंड में तंबाकू कारोबारियों के 32 प्रतिष्ठानों पर एक साथ छापेमारी के रूप में चलाया गया। पहले ही दिन प्रदेशभर से 8.50 करोड़ रुपये जमा कराए गए, जिसमें देहरादून संभाग की हिस्सेदारी सबसे अधिक 4.04 करोड़ रुपये रही।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कर चोरी के खिलाफ सख्त नीति के तहत चल रहे इस अभियान में राज्य कर विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच का कार्य अभी जारी है, और दोषी पाए जाने वाले कारोबारियों से कर, ब्याज और जुर्माना नियमानुसार वसूला जाएगा। आयुक्त प्रतीक जैन ने कहा कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तुओं के कारोबार पर विशेष निगरानी रखना जारी रहेगा और कर चोरी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

कम शब्दों में कहें तो, यह मामला जीएसटी चोरी के नए तरीकों को उजागर करता है, जो न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है, बल्कि समाज के स्वास्थ्य पर भी असर डालता है। अधिक जानकारी के लिए, यहाँ पर क्लिक करें: Netaa Nagari.

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सादर,
टीम नेटा नागरी

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