उत्तराखंड सचिवालय में अंबेडकर के योगदान पर विमर्श, राष्ट्रीय एकता का प्रतीक घोषित
Rajkumar Dhiman, Dehradun: भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर सोमवार को उत्तराखंड सचिवालय में श्रद्धा, सम्मान और वैचारिक विमर्श का आयोजन किया गया। उत्तराखंड सचिवालय अनुसूचित जाति एवं जनजाति समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बाबा साहेब की प्रतिमा और भगवान बुद्ध की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें … The post सचिवालय में कानून, न्याय और संविधान में योगदान पर गहन विमर्श, अंबेडकर को बताया राष्ट्रीय एकता का प्रतीक appeared first on Round The Watch.
उत्तराखंड सचिवालय में अंबेडकर के योगदान पर विमर्श, राष्ट्रीय एकता का प्रतीक घोषित
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कम शब्दों में कहें तो, भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर उत्तराखंड सचिवालय में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में डॉ. अंबेडकर के विचारों पर चर्चा की गई और उन्हें राष्ट्रीय एकता का प्रतीक माना गया।
रिपोर्टर राजकुमार धिमान, देहरादून: सोमवार को उत्तराखंड सचिवालय में श्रद्धा, सम्मान और वैचारिक विमर्श का आयोजन हुआ। यह कार्यक्रम अनुसूचित जाति एवं जनजाति समिति के तत्वावधान में आयोजित किया गया था। इस अवसर पर बाबा साहेब की प्रतिमा और भगवान बुद्ध की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ अपर सचिव समाज कल्याण प्रकाश चंद्र आर्य ने किया। इस मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में विक्रम सिंह यादव, दीपक जोशी, पूर्व अध्यक्ष सचिवालय संघ और सुनील कुमार लाखेड़ा अध्यक्ष सचिवालय संघ भी मौजूद रहे। इस अवसर पर डॉ. अंबेडकर के व्यक्तित्व और उनके कार्यों पर विस्तृत चर्चा हुई।
अगले वर्ष राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाने का आह्वान
पूर्व अध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि बाबा साहेब के विचार समतामूलक समाज का निर्माण करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि अगली वर्ष 14 अप्रैल को डॉ. अंबेडकर की जयंती को 26 जनवरी और 15 अगस्त की तरह भव्य राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाना चाहिए। साथ ही सचिवालय परिसर में उनके प्रतीक का शीघ्र अनावरण कराने का आश्वासन भी दिया गया।
सचिवालय में अंबेडकर की तस्वीरें
कार्यक्रम में यह भी निर्णय लिया गया कि सचिवालय संघ की ओर से सभी सभागारों और अनुभागों में डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरें लगाई जाएंगी। यह कदम कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच उनके विचारों और प्रेरणाओं को जीवित रखने के लिए उठाया गया है।
कानून और न्याय में अंबेडकर का योगदान
वक्ताओं ने डॉ. अंबेडकर की कानून एवं न्याय मंत्री के रूप में भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया। कमल कुमार ने कहा कि स्वतंत्र भारत की न्यायिक और संवैधानिक संरचना को मजबूत करने के लिए उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही है। उनके विचार आज भी लोकतंत्र की आत्मा माने जाते हैं।
डॉ. अंबेडकर के अर्थशास्त्र पर विमर्श
कार्यक्रम में डॉ. अंबेडकर के अर्थशास्त्री रूप पर भी चर्चा की गई। ऋचा ने बताया कि उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पीएचडी की है और उनकी प्रसिद्ध शोध "The Problem of the Rupee: Its Origin and Its Solution" भारतीय मुद्रा प्रणाली पर महत्वपूर्ण अध्ययन प्रस्तुत करती है।
सामाजिक उद्धारक के रूप में अंबेडकर का स्थान
वक्ताओं ने डॉ. अंबेडकर को सामाजिक न्याय और दलित उत्थान का प्रतीक माना। उन्होंने समाज के वंचित वर्गों को सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार दिलाने के लिए आजीवन संघर्ष किया है। उनकी विचारधारा स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित समाज का निर्माण करती है।
Annihilation of Caste और लोकतंत्र
कार्यक्रम में विनय कुमार आर्य ने डॉ. अंबेडकर के प्रसिद्ध विचारों की व्याख्या की, जिसमें उन्होंने कहा था कि "मेरा आदर्श स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे पर आधारित समाज होगा, जो लोकतंत्र का ही दूसरा नाम है।" इस दौरान उनके शोध पत्र 'Annihilation of Caste' के सामाजिक और वैचारिक महत्व पर भी चर्चा हुई।
सामाजिक लोकतंत्र का महत्व
वक्ता वर्षा ने कहा कि केवल राजनीतिक लोकतंत्र से काम नहीं चलने वाला, बल्कि सामाजिक लोकतंत्र की स्थापना भी अनिवार्य है। डॉ. अंबेडकर के उस ऐतिहासिक वक्तव्य का भी उल्लेख किया गया, जिसमें कहा गया था "बंधुत्व के बिना समानता और स्वतंत्रता का महत्व रंग-रोगन से अधिक कुछ नहीं होगा।"
समाज के लिए विरोधाभासी जीवन की चेतावनी
कार्यक्रम में चिरंजी लाल ने डॉ. अंबेडकर के संविधान सभा के कथन "26 जनवरी 1950 को हम एक विरोधाभासी जीवन में प्रवेश करेंगे।" पर विचार किया। उन्होंने कहा कि यह चेतावनी आज भी साबित होती है, क्योंकि सामाजिक असमानता और आर्थिक विषमता की चुनौती जारी है। इस अवसर पर प्रमिला टम्टा, निधि अरोड़ा आदि ने भी अपने विचार रखे।
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संपादित: प्रियंका वाघेला
टीम नेटaa नागरी
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