उत्तराखंड पुलिस के खिलाफ सीबीआई जांच: फर्जी चरस बरामदगी का मामला 6 साल बाद फिर खुला

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड में 06 वर्ष पुराने एक NDPS मामले में अब पुलिस की कार्रवाई ही जांच के घेरे में आ गई है। वर्ष 2020 में ढाबा संचालक अनिल शर्मा को 97.70 ग्राम चरस के साथ गिरफ्तार करने का दावा करने वाली पुलिस के खिलाफ फर्जी बरामदगी, मारपीट, अवैध हिरासत, दस्तावेजों में हेरफेर और … The post उत्तराखंड पुलिस के खिलाफ सीबीआई जांच आगे बढ़ेगी, फर्जी चरस बरामदग्गी की फाइल 06 साल बाद फिर खुली appeared first on Round The Watch.

Sep 5, 2026 - 09:37
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उत्तराखंड पुलिस के खिलाफ सीबीआई जांच: फर्जी चरस बरामदगी का मामला 6 साल बाद फिर खुला
उत्तराखंड पुलिस के खिलाफ सीबीआई जांच: फर्जी चरस बरामदगी का मामला 6 साल बाद फिर खुला

उत्तराखंड पुलिस के खिलाफ सीबीआई जांच: फर्जी चरस बरामदगी का मामला 6 साल बाद फिर खुला

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में छह साल पुराने एक NDPS मामले में पुलिस की कार्यवाई अब सवालों के घेरे में है। वर्ष 2020 में ढाबा संचालक अनिल शर्मा के खिलाफ की गई चरस की फर्जी बरामदगी, पुलिस की क्रूरता और दस्तावेजों में हेरफेर जैसे गंभीर आरोप अब सीबीआई द्वारा दोबारा जांच के दायरे में आ गए हैं।

6 साल पुराना NDPS मामला फिर से सुर्खियों में

राजकुमार धिमन, देहरादून: उत्तराखंड राज्य में स्थित सड़को के किनारे की ढाबों में से एक पर वर्ष 2020 में ढाबा संचालक अनिल शर्मा को 97.70 ग्राम चरस के साथ गिरफ्तार करने का दावा करने वाली पुलिस अब जांच के घेरे में है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले की पुनः खोजबीन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामले में पुलिस पर आरोप हैं कि उन्होंने फर्जी बरामदगी की, मारपीट की, अनिल शर्मा को अवैध रूप से हिरासत में लिया और महत्वपूर्ण सूचनाओं, जैसे CCTV फुटेज को मिटा दिया।

पुलिस की क्रूरता और फर्जी कार्रवाई का आरोप

पुलिस द्वारा कार्रवाई के कथित तौर पर ढाबा संचालक अनिल शर्मा को जबरन हिरासत में लेने के आरोप हैं। शिकायत में कहा गया है कि पुलिसकर्मी ने ढाबे के कर्मचारी के साथ मारपीट की और अनिल शर्मा को भी बर्बरता से लिया गया। इसके बाद, पुलिस ने अनिल के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज कर दिया।

शिकायतकर्ता का कहना है कि पुलिस ने दूसरे दिन फिर से ढाबे पर जाकर CCTV कैमरों की फुटेज को डिलीट कर दिया। इस तरह पुलिस ने न केवल अपने साक्ष्यों को मिटाया बल्कि ढाबे के रजिस्टर के कुछ महत्वपूर्ण पन्नों को भी फाड़ दिया।

जांच की दिशा बदलती है

प्रथम जांच में सामने आए तथ्यों ने यह संकेत दिया है कि पुलिस की बताई गई बरामदगी कहानी में खामियां हैं। अनिल शर्मा के पास वास्तव में मौके पर चरस नहीं मिली थी और पुलिस द्वारा उसे बाद में बरामदगी की तरह प्रस्तुत किया गया। यह जांच इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रही है कि क्या वास्तव में अनिल शर्मा के पास चरस थी या यह केवल पुलिस की मनगढ़ंत कहानी है।

जांच के दौरान, पुलिस के दस्तावेजों में भी हेरफेर का संदिग्ध मामला सामने आया है, जिसमें जनरल डायरी और अन्य दस्तावेज शामिल हैं। CCTV फुटेज को मिटाने की प्रक्रिया जांच में एक महत्वपूर्ण बिंदु बनती जा रही है।

CBI ने लिया मामले की फिर से जांच का आदेश

2020 में हाईकोर्ट ने मामले की प्रारंभिक जांच के लिए CBI को निर्देशित किया था। इसके परिणामस्वरूप, पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया गया था। इसके चलते CBI ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत मामले की जांच की, जिसमें फर्जी मुकदमा गढ़ने, साक्ष्य मिटाने और मारपीट की धाराएं शामिल थीं।

सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ता विवाद

हालांकि, CBI की जांच को पुलिसकर्मियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसमें से एक हिस्से पर रोक भी लगी। लेकिन बाद में यह याचिका वापस ले ली गई, जिससे मामला फिर से हाईकोर्ट के समक्ष पहुंच गया। इस तरह, छह साल से अधिक समय तक इस विवाद ने कानूनी दांवपेंचों में उलझे रहने का सामना किया।

नैतिकता और निष्पक्षता पर सवाल

11 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट के आदेश ने जांच की दिशा बदल दी। न्यायालय ने नीचले पुलिस तंत्र पर सवाल उठाते हुए CBI को पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच की विश्वसनीयता के साथ सुनिश्चित करने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह माना कि जब आरोपी खुद पुलिसकर्मियों हों, तो उसी संस्था के माध्यम से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा उचित नहीं होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जड़ों को छूने का आदेश दिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ किबहुत से प्रमुख सबूत, जैसे CCTV फुटेज, रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों को जानबूझकर मिटाने का संदिग्ध मामला भी उजागर हो सकता है।

सीबीआई के सामने प्रमुख सवाल

आगे की जांच का मुख्य ध्यान इस बात पर रहेगा कि क्या चरस वास्तव में अनिल शर्मा के कब्जे से बरामद हुई थी या नहीं। यदि बरामदगी झूठी साबित होती है, तो यह प्रश्न उठता है कि क्या पुलिस ने जानबूझकर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की।

पुलिस का परीक्षण औरलिया गया और उनका पक्ष भी सामने आया

पुलिस ने अपने कार्यों को बचाते हुए कहा कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी कि ढाबे पर चरस और शराब की बिक्री हो रही थी, जिस आधार पर कार्रवाई की गई। पुलिस ने CCTV फुटेज को आंशिक रूप से गलत बताया और कुछ बाद में शिकायतों को वापस लेने का हवाला भी दिया।

आखिरी निष्कर्ष

अब इस पुरानी मामले की जाँच CBI द्वारा की जा रही है। सबहैश चंदर, जो कि डायरेक्टर/एसपी स्तर के अधिकारी हैं, इस मामले की जिम्मेदारी संभालेंगे। CBI अब पुलिस रिकॉर्ड, केस डायरी, CCTV फुटेज और अन्य बनी-बनाई घटनाओं की पूरी जांच करेगी।

इस स्थिति का मतलब यह है कि 2020 में शुरू होने वाला यह मामला अब केवल एक व्यक्ति के खिलाफ आरोप नहीं है, बल्कि यह पुलिस की कार्यप्रणाली, बरामदगी की वास्तविकता और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ का भी मामला बन गया है।

फिर से जांच की इस प्रक्रिया की अगुवाई करने में CBI के काम का ध्यान समाज और न्याय व्यवस्था की विफलता की ओर है, जो कि एक गंभीर विषय है।

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सूचना दी गई है कि इसी क्रम में आगे की कार्रवाई की जाएगी। हमें आगे की रिपोर्ट का इंतजार है।

— टीम नेटा नागरी, सोनी कुमारी

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