ईद-उल-अज़हा पर मुफ़्ती शमून क़ासमी का मुस्लिम समुदाय के नाम शांति और भाईचारे का संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के “सड़क पर नमाज़ न पढ़ने” वाले बयान का किया समर्थन खटीमा/उधम सिंह नगर। उत्तराखंड मदरसा
ईद-उल-अज़हा पर मुफ़्ती शमून क़ासमी का मुस्लिम समुदाय के नाम शांति और भाईचारे का संदेश
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ़्ती शमून क़ासमी ने आगामी ईद-उल-अज़हा के अवसर पर मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि वे शांति और सौहार्द बनाए रखें। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के "सड़क पर नमाज़ न पढ़ने" संबंधी बयान का समर्थन किया है।
खटीमा/उधम सिंह नगर। इस बार ईद का पर्व केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक जिम्मेदारी को आगे बढ़ाने का एक जरिया बन गया है। उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ़्ती शमून क़ासमी ने ईद-उल-अज़हा के मौके पर मुस्लिम समुदाय को शांति और अनुशासन बनाए रखने की सलाह दी है।
मुफ़्ती शमून क़ासमी ने कहा कि "ईद का त्योहार भाईचारे, कुर्बानी और इंसानियत का संदेश देता है। सभी लोगों को कानून और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।" उन्होंने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा जताई गई चिंता को सही ठहराते हुए कहा कि "धार्मिक आयोजनों के दौरान आम जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए।" उनका मानना है कि नमाज़ केवल मस्जिदों और ईदगाहों में अदा की जानी चाहिए ताकि यातायात और जनजीवन प्रभावित न हो।
मुफ़्ती क़ासमी ने मुस्लिम समुदाय से यह भी अनुरोध किया कि वे ईद-उल-अज़हा का पर्व आपसी प्रेम और सद्भावना के साथ मनाएं, साथ ही प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड का समाज हमेशा से सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक रहा है, और हमें इसे मजबूत करने के लिए मिल-जुलकर प्रयास करना चाहिए।
इस सन्देश के जरिए मुफ़्ती क़ासमी ने न केवल धार्मिक अनुशासन को बढ़ावा दिया है, बल्कि उन्होंने समाज में आपसी भाईचारे और समझदारी की आवश्यकता को भी रेखांकित किया है। ऐसे समय में जब कई तरह की असहमति और नफरत के बीज बोए जा रहे हैं, मुफ़्ती क़ासमी का यह कदम एक सकारात्मक पहल है।
इस ईद पर जब मुस्लिम समुदाय एकत्र होकर आज़ादी के साथ अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करेगा, यह उम्मीद की जाती है कि वे एक बार फिर एकता और भाईचारे का मिसाल कायम करेंगे।
इस अवसर पर समुदाय का सामाजिक दायित्व भी महत्वपूर्ण है। मुहर्रम, रमजान और ईद जैसे त्योहारों के दौरान समुदाय की एकता और सहयोग की भावना को देखना चाहिए, जिससे SOCIETY की बुनियाद और मजबूती बने।
जैसे की हम सभी जानते हैं, त्योहार सिर्फ मजहब या संस्कृति तक सीमित नहीं होते, बल्कि यह हर किसी को एक साथ लाने का एक मौका होते हैं। इस ईद-उल-अज़हा के पर्व पर, हर एक व्यक्ति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शांति, सद्भाव और एकता का संदेश हर बुनियाद में मौजूद हो।
अंत में, जब त्योहार का समय आता है, तो यह एक महत्वपूर्ण अवसर होता है हम सभी को एक सकारात्मक रवैये के साथ मनाने का। यदि हमसे कोई गलती होती है, तो हमें उसके लिए माफी मांगनी चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए। इस प्रकार, प्यार, समझदारी और सम्मान हमारे जीवन का हिस्सा बनते हैं।
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— टीम नेटाआ नागरी, प्रियंका शर्मा
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