ई-वेस्ट कारोबार में करोड़ों की धोखाधड़ी: जांच में खुलासा
Rajkumar Dhiman, Dehradun: ई-वेस्ट कारोबार की आड़ में कागजों पर करोड़ों रुपये की खरीद दिखाकर सरकार को राजस्व का चूना लगाने और बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हासिल करने का मामला सामने आया है। राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने हरिद्वार संभाग की एक ई-वेस्ट फर्म के खिलाफ जांच और तलाशी की … The post कागजों पर खरीद डाला 6.55 करोड़ का माल, सरकार को लगाया करोड़ों का चूना appeared first on Round The Watch.
ई-वेस्ट कारोबार की आड़ में 6.55 करोड़ का चूना, सरकार के राजस्व को हुआ नुकसान
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के हरिद्वार में ई-वेस्ट कारोबार में करोड़ों रुपये की फर्जी खरीद दिखाने का मामला सामने आया है, जिसमें सरकार को राजस्व का भीषण नुकसान हुआ है। राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने इस संदर्भ में एक फर्म के खिलाफ जांच शुरू की है।
जांच के दिनांक: शनिवार, 10 सितंबर 2023
फर्म द्वारा दिखाए गए 6.55 करोड़ रुपये का माल
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि ई-वेस्ट कारोबारी फर्म ने लगभग 6.55 करोड़ रुपये के माल की खरीद का रिकॉर्ड प्रस्तुत किया है। हालाँकि, इस खरीद की वास्तविकता पर जांचकर्ताओं को त्वरित संदेह हुआ। एक ऐसा मामला जिसमें कागजों पर दिखाए गए माल को लेकर बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा किया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार को राजस्व का चूना लगाया गया है।
ई-वे बिल की विसंगतियाँ
अधिकारी बताते हैं कि इस फर्म द्वारा बनाए गए ई-वे बिल में जिन वाहनों का उल्लेख किया गया था, आरएफआईडी आंकड़ों में उनकी उत्तराखंड में कोई आवाजाही नहीं मिली है। यह दर्शाता है कि या तो तो ये वाहनों से माल वास्तव में लाया ही नहीं गया, या फिर फर्म ने जानबूझकर धोखाधड़ी की है।
बोगस आईटीसी का मामला
जांच में पता चला है कि फर्म ने दूसरे राज्यों में पंजीकृत फर्मों से माल खरीदने का दावा किया, जिसके आधार पर उसने बोगस आईटीसी का दावा किया। जहाँ आईटीसी वास्तव में केवल वास्तविक खरीद पर ही लागू हो सकता है, वहीं इस मामले में स्थिति बिलकुल उलटी लगी।
शून्य स्टॉक के दस्तावेज
जांच के दौरान, जब अधिकारियों ने फर्म के व्यापार स्थल पर पहुंचकर स्टॉक की जांच की, तो वहाँ किसी प्रकार का भौतिक स्टॉक नहीं मिला। इस स्थिति ने फर्म की विश्वसनीयता पर और सवाल खड़े कर दिए। एक ऐसा फर्म जिसे कागजों में करोड़ों की खरीद दर्शाने के बावजूद, वास्तविक रूप में कुछ भी उपलब्ध नहीं था, उसे लेकर विभागीय जांच के सवाल गहन होते जा रहे हैं।
अर्थदंड की तैयारी
इन सब के बीच, फर्म ने विभागीय जांच शुरू होते ही 1.18 करोड़ रुपये जमा कराए हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह रकम चोरी की गई धनराशि का सही रूपांतरण है या मात्र जांच को भटकाने का प्रयास?
अगले कदम: कर और जुर्माना
राज्य कर विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है। जांच पूरी होने के बाद उचित कर, ब्याज और अर्थदंड की वसूली की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि भारत के टैक्स सिस्टम में ई-वे बिल प्रणाली का दुरुपयोग नहीं हो। इसलिए, सरकार को और भी सख्त नियमों की आवश्यकता है, ताकि ऐसे धोखाधड़ी वाले मामलों में दिशा निर्देश सुनिश्चित किए जा सकें।
निष्कर्ष
मामले में यह साफ है कि 6.55 करोड़ रुपये की फर्जी खरीद, ई-वे बिल की अस्थायी निगरानी में विसंगतियाँ, और शून्य स्टॉक इस पूरे मामले को गंभीर बनाते हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह जांच अन्य फर्मों में भी ऐसे अंसुलझे मामलों को उजागर कर पाएगी या नहीं।
फिलहाल, सरकार को आगे आने वाले सभी ऐसे मामलों में कड़ी सावधानी बरतने की आवश्यकता है, ताकि ई-वे बिल और आईटीसी का सही तरीके से उपयोग हो सके।
आप सभी से निवेदन है कि इस मामले में और फॉलो-अप करने के लिए यहाँ क्लिक करें.
सादर, नीति शर्मा
टीम नेट aa नगरी
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