Bareilly: कुक्कुट मेले में छाई अमेरिकन आरआईआर प्रजाति...मांस और अंडा उत्पादन का बेहतर विकल्प

बरेली, अमृत विचार। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की अधीनस्थ केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) में रविवार को 47 वें स्थापना दिवस पर आयोजित कुक्कुट मेले में इस बार एक नई प्रजाति ने सबका ध्यान खींचा। पहली बार प्रदर्शित की गई अमेरिकन मूल की मल्टीकलर रॉड आइलैंड रेड (आरआईआर) मुर्गी किसानों के लिए अंडा और मांस दोनों के उत्पादन में बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। इस प्रजाति की खासियत यह है कि यह सालभर में लगभग 240 अंडे देने की क्षमता रखती है और केवल छह सप्ताह में दो किलोग्राम तक वजन प्राप्त कर लेती है। इससे यह प्रजाति ड्यूल...

Nov 3, 2025 - 09:37
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Bareilly: कुक्कुट मेले में छाई अमेरिकन आरआईआर प्रजाति...मांस और अंडा उत्पादन का बेहतर विकल्प

बरेली, अमृत विचार। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की अधीनस्थ केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) में रविवार को 47 वें स्थापना दिवस पर आयोजित कुक्कुट मेले में इस बार एक नई प्रजाति ने सबका ध्यान खींचा। पहली बार प्रदर्शित की गई अमेरिकन मूल की मल्टीकलर रॉड आइलैंड रेड (आरआईआर) मुर्गी किसानों के लिए अंडा और मांस दोनों के उत्पादन में बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।

इस प्रजाति की खासियत यह है कि यह सालभर में लगभग 240 अंडे देने की क्षमता रखती है और केवल छह सप्ताह में दो किलोग्राम तक वजन प्राप्त कर लेती है। इससे यह प्रजाति ड्यूल परपज यानी अंडा और मांस दोनों उत्पादन के लिए अत्यंत लाभकारी बन जाती है। किसानों और उद्यमियों ने मेले में इस प्रजाति की खूब सराहना की। साथ ही पालन की विधियों के बारे में जानकारी ली।

सीएआरआई के वैज्ञानिकों के अनुसार यह प्रजाति स्थानीय जलवायु में आसानी से अनुकूल हो जाती है और कम चारे में अधिक उत्पादन देती है। इसके शरीर का मल्टीकलर पंख, आकर्षक आकार और तेज विकास दर इसे अन्य देशी नस्लों से अलग बनाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह नस्ल रोग प्रतिरोधी भी है। छोटे पैमाने पर पोल्ट्री व्यवसाय करने वाले किसानों के लिए यह अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है। मेले में बड़ी संख्या में किसान, पोल्ट्री उद्यमी और विद्यार्थी पहुंचे। संस्थान की विभिन्न इकाइयों ने मुर्गी पालन, अंडा प्रसंस्करण, हर्बल फीड सप्लीमेंट और रोग नियंत्रण से जुड़ी नवीनतम तकनीक का प्रदर्शन किया।

मेले में करीब 2000 किसानों ने भाग लिया, जबकि 35 आकर्षक स्टॉलों पर नई प्रजातियों का प्रदर्शन किया गया। 350 किलोग्राम अंडों की बिक्री हुई, जबकि 3,500 बटेर के अंडे और 100 किलोग्राम चिकन मांस किसानों और आगंतुकों ने खरीदा। 105 पैकेट चिकन बाइट्स भी बिके। एग बिस्किट, एग बटर, पेड़ा, रसमलाई और अंडे का अचार विशेष आकर्षण रहे।

पोल्ट्री में एआई से लागत कम करने पर होना चाहिए अधिक शोध : डीडीजी
कुक्कुट मेले के मुख्य अतिथि उप महानिदेशक (कृषि प्रसार) डॉ. राजवीर सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से पोल्ट्री में होने वाली लागत को कम करने की दिशा में अभी और शोध कार्य होना बाकी है। उन्होंने कैरी के वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करते हुए लागत कम करने के साथ ही स्मार्ट मॉनिटर और डिसीजन स्पॉट सिस्टम विकसित करने पर भी विचार करने का सुझाव दिया। साथ ही कार्बन क्रेडिट के संबंध में भी शोध कार्य के लिए प्रोत्साहित किया।

मुर्गीपालन का बीसी रेश्यो तीन : डॉ दीक्षित
विशिष्ट अतिथि आईसीएआर के सहायक महानिदेशक (पीआईएम) डॉ. अनिल कुमार दीक्षित ने ऑनलाइन माध्यम से किसानों को संबोधित करते हुए कहा की पोल्ट्री उद्योग में बेनिफिट कॉस्ट (बीसी) रेश्यो तीन है। यानी कोई निवेशक अगर मुर्गीपालन में एक रुपये का निवेश करता है, तो तीन रुपये तक लाभ पा सकता है। उन्होंने जीनोमिक कन्वर्जन ऑफ जेनेटिक डाइवर्सिटी पर किए जा रहे शोधों की सराहना की।

एडीजी और किसानों ने देखा गंध रहित अंडा
सीएआरआई की ओर से बनाई गई तकनीक के सहयोग से पूरनपुर के एक जागरूक उद्यमी ने गंधहीन अंडा का काउंटर खोला। मेले के निरीक्षण के दौरान एडीजी डॉ. गौड़ ने इस अंडे के बारे में विस्तार से जानकारी ली। किसानों को भी ये उत्पाद पसंद आया।

घरेलू कुक्कुट पालन तकनीकी प्रशिक्षण पुस्तिका का विमोचन
संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से तैयार की गई "देसी परंपरा, नया विज्ञान" घरेलू कुक्कुट पालन तकनीकी प्रशिक्षण पुस्तिका का विमोचन अतिथियों ने किया। ये पुस्तिका प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सिम्मी तोमर ने लिखी है। यह पुस्तिका ग्रामीण एवं घरेलू कुक्कुट पालकों के लिए तैयार की गई है।

 

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