NEET-UG 2025 में फर्जी आश्रित प्रमाण-पत्र के मामले में SIT ने की गहन जांच, आरोपियों के पते निकले फर्जी
देहरादून *NEET-UG 2025 में फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण-पत्र के आधार पर एमबीबीएस में प्रवेश लेने के प्रकरण में SIT ने शुरू की गहन जांच* *अब तक की विवेचना…
NEET-UG 2025: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के फर्जी आश्रित प्रमाण-पत्र के आवेदन में जारी जांच में उजागर हुए फर्जी पते
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कम शब्दों में कहें तो, NEET-UG 2025 में फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण-पत्र के जरिए एमबीबीएस में दाखिले के मामलों की जांच में SIT ने महत्वपूर्ण परिणाम जुटाए हैं।
देहरादून में NEET-UG 2025 के लिए मांगी गई फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण-पत्र की जांच में एसआईटी (विशेष जांच दल) ने गहन दृष्टिकोण के साथ एक कड़ी कार्रवाई शुरू की है। इस मामले में फर्जी पते का खुलासा हुआ है, जिनका उपयोग कुछ अभ्यर्थियों ने अनधिकृत लाभ प्राप्त करने के लिए किया था।
जांच की प्रगति और उपलब्धियाँ
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिल किये गए इन आवेदनों की जांच में डीडीटी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत कोटों में मामलों को सुर्खियों में लाया गया है। एसआईटी की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि आवेदकों ने एक विशेष नाम 'धर्मवीर' का प्रयोग कर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्रेणी के तहत लाभ लिया है।
पुलिस अधीक्षक की भूमिका
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून ने 18 सितंबर 2026 को एसआईटी का गठन किया, जिसमें पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश को नेतृत्व सौंपा गया। अब तक की विशेषज्ञ जांच में पाया गया है कि अभियुक्तों द्वारा प्रदान की गई संपूर्ण जानकारी में गंभीर विसंगति है। पुलिस अधीक्षक के अंतर्गत जांचकर्ताओं ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिवार से संपर्क किया और उनके बयान दर्ज किए।
फर्जी पते की पहचान
सुरक्षा जांच के दौरान इन अभियुक्तों के पते फर्जी पाए गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि इन अभ्यर्थियों ने किस हद तक धोखाधड़ी को अंजाम दिया था। इसके अलावा, प्रमाण-पत्रों की मान्यता और वैधता के संदर्भ में संबंधित शैक्षणिक संस्थानों से भी पत्राचार किया जा रहा है।
भविष्य की विधिक कार्रवाई
देहरादून पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रकरण की जांच पूर्ण रूप से निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से की जा रही है। यदि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके शैक्षणिक प्रवेश या आरक्षण का अनुचित लाभ लेने की पुष्टि होती है, तो उसके खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
यह घटना समाज में भ्रामक और असत्य के उपयोग का एक गंभीर उदाहरण है। इससे न केवल छात्रों के भविष्य पर असर पड़ता है, बल्कि यह पूरे शैक्षणिक क्षेत्र की सत्यता को भी प्रश्न में डालता है। ऐसे मामलों की जांच अपेक्षित है और उच्च अधिकारियों को ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए।
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सादर,
टीम नेटा नगरी - स्नेहा वर्मा
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