65 वर्षीय पहाड़ी महिला ने गुलदार से मुकाबला कर बचाई जान, लिया अद्वितीय साहसिक कदम
अगस्त्यमुनि (रुद्रप्रयाग): पहाड़ की महिलाएं कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत और साहस का परिचय देने के लिए जानी जाती हैं। रुद्रप्रयाग जनपद की बसुकेदार तहसील के कोटी पठालीधार गांव…
65 वर्षीय पहाड़ी महिला ने गुलदार से मुकाबला कर बचाई जान
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कम शब्दों में कहें तो, रुद्रप्रयाग जिले की एक साहसी महिला ने गुलदार के जानलेवा हमले को न केवल चुनौती दी बल्कि अपनी जान भी बचाई।
अगस्त्यमुनि (रुद्रप्रयाग): पहाड़ की महिलाएं कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत और साहस का परिचय देने के लिए जानी जाती हैं। रुद्रप्रयाग जनपद की बसुकेदार तहसील के कोटी पठालीधार गांव की 65 वर्षीय नारायणी देई देवी ने गुलदार के जानलेवा हमले के दौरान अदम्य साहस का प्रदर्शन किया।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार दोपहर को नारायणी देई देवी, जो पुष्कर सिंह रावत की पत्नी हैं, गांव के खेतों में घास काट रही थीं। तभी अचानक झाड़ियों में छिपा गुलदार उन पर हमला कर दिया। इस हमले में उनके हाथ, पैर और शरीर के कई हिस्सों में गहरे घाव हो गए और वह लहूलुहान हो गईं।
हालांकि, इस कठिन परिस्थिति में भी नारायणी देवी ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने हाथ में मौजूद घास काटने वाली दरांती से डटकर गुलदार का सामना किया। महिला के प्रतिरोधी आचरण के कारण गुलदार पीछे हट गया और जंगल की ओर भाग गया।
गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद नारायणी देवी ने साहस बनाए रखा और किसी तरह अपने घर तक पहुंचीं। उनकी घायल अवस्था देख उनके पुत्र पंकज ने तुरंत उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अगस्त्यमुनि पहुंचाया, जहां उनका इलाज किया गया।
सीएचसी अगस्त्यमुनि में तैनात डॉ. निधि ने जानकारी दी कि महिला के हाथ, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों में गहरे जख्म हैं, लेकिन प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति फिलहाल खतरे से बाहर है।
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम अस्पताल पहुंची और एक अन्य टीम कोटी गांव भेजी गई, जहां घटनास्थल का निरीक्षण करके आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
रुद्रप्रयाग में बढ़ते गुलदार के हमले
रुद्रप्रयाग जिले में गुलदार के हमलों की बढ़ती घटनाओं ने ग्रामीणों में दहशत फैला दी है। जंगलों और खेतों में काम करने वाली महिलाएं एवं किसान सबसे अधिक जोखिम का सामना कर रहे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग से अनुरोध किया है कि प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई जाए, गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखी जाए और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
नारायणी देई देवी का साहस आज की ग्रामीण महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बन गया है। परंतु यह घटना पहाड़ों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर स्थिति को भी उजागर करती है।
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टीम नेटा नगरी, साक्षी शर्मा
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