21 साल बाद फर्जी वसीयत का पर्दाफाश: संपत्ति हड़पने के मामले में चार के खिलाफ मुकदमा दर्ज, देहरादून
Amit Bhatt, Dehradun: देहरादून में करीब ढाई दशक पुराने संपत्ति विवाद ने अब आपराधिक मामले का रूप ले लिया है। कोतवाली नगर पुलिस ने फर्जी वसीयत तैयार कर संपत्ति हड़पने, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में 04 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। मामला दिवंगत कुंवर चंद्र बहादुर सिंह की संपत्तियों … The post 21 साल बाद खुला फर्जी वसीयत और करोड़ों की संपत्ति हड़पने का मामला, देहरादून में 04 लोगों पर मुकदमा दर्ज appeared first on Round The Watch.
21 साल बाद फर्जी वसीयत का पर्दाफाश: संपत्ति हड़पने के मामले में चार के खिलाफ मुकदमा दर्ज, देहरादून
Amit Bhatt, Dehradun: देहरादून में एक संपत्ति विवाद, जो करीब ढाई दशक पुराना है, अब एक आपराधिक मामले में बदल गया है। कोतवाली नगर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ फर्जी वसीयत बनाकर करोड़ों की संपत्ति हड़पने, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। यह मामला दिवंगत कुंवर चंद्र बहादुर सिंह और उनकी दत्तक पुत्री उपासना मेहता के अधिकारों से संबंधित है।
कम शब्दों में कहें तो, यह मामला 21 साल बाद सामने आया है, और इससे जुड़ी कानूनी पेचीदगियों ने सभी को चौंका दिया है।
कोतवाली देहरादून में एफआईआर संख्या 0248 दिनांक 9 जुलाई 2026 में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 420, 467, 468 और 471 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायत अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने दर्ज कराई है, जिन्होंने खुद को बेंगलुरु स्थित उपासना मेहता का पंजीकृत मुख्तारआम बताया है।
एफआईआर में कहा गया है कि उपासना मेहता बचपन से दिवंगत कुंवर चंद्र बहादुर सिंह के साथ रह रही थीं और उन्हें दत्तक पुत्री के रूप में माना गया था। उनकी बेहतरी के लिए न्यायालय ने चंद्र बहादुर सिंह को उपासना का संरक्षक नियुक्त किया था। 9 सितंबर 2001 को चंद्र बहादुर सिंह के निधन के समय उपासना की उम्र करीब 9 से 10 वर्ष थी। उनके निधन के बाद कमल प्रसाद को उपासना का नया संरक्षक बना दिया गया।
शिकायत में बताया गया है कि उपासना को 2023 में जानकारी मिली कि चंद्र बहादुर सिंह ने उनके नाम पर बड़ी मात्रा में संपत्ति छोड़ी थी। इस संपत्ति के निष्पादक के रूप में अधिवक्ता मनोजित सिन्हा का नाम सामने आया, जो बाद में वसीयत को जिला जज न्यायालय में जमा करने के बाद निष्पादक पद से हटना चाहते थे। लेकिन 25 नवंबर 2025 को मनोजित सिन्हा का निधन हो गया।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि चंद्र बहादुर सिंह ने अपने जीवनकाल में “उपासना मेहता ट्रस्ट” का गठन किया था, जिसके नाम पर बैंक ऑफ बड़ौदा में खाता संचालित होता था। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस खाते में पांच लाख रुपये से अधिक की राशि थी, लेकिन 2019 में कमल प्रसाद ने करीब पांच लाख रुपये निकालकर खाता बंद करा दिया और पूरी राशि हड़प ली।
मामले में सबसे गंभीर आरोप फर्जी वसीयत के संबंध में हैं। शिकायत में बताया गया है कि चंद्र बहादुर सिंह ने 21 अगस्त 2001 को एक वैध वसीयत तैयार की थी, जो 1 सितंबर 2001 को पंजीकृत की गई। इसके बाद उनकी मृत्यु के बाद 2 सितंबर 2001 को एक दूसरी वसीयत तैयार की गई, जिसके आधार पर उनकी संपत्तियां कमल प्रसाद और कुमुद वैद्य ने अपनी मां और मौसी के नाम करवा लीं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह दूसरी वसीयत चंद्र बहादुर सिंह की मृत्यु के बाद बनी थी और इसका कभी पंजीकरण नहीं हुआ।
एफआईआर में फर्जी वसीयत के गवाहों के रूप में उदशी और जगराज मान का नाम भी शामिल किया गया है। इसके अलावा, पहली वसीयत के अनुसार कुछ संपत्तियां आरती कुमार के नाम भी छोड़ी गई थीं, और कोमुद वैद्य तथा आरती कुमार के बीच इसके आधार पर मुकदमा भी चला। बाद में कथित तौर पर चाय बागान की जमीन और लगभग 12 लाख रुपये देकर इस पर समझौता किया गया।
शिकायतकर्ता ने कमल प्रसाद, कुमुद वैद्य, उदशी और जगराज मान पर सुनियोजित साजिश के तहत जाली दस्तावेज तैयार करने और संपत्तियों की बिक्री तथा हेराफेरी का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि कमल प्रसाद और उनके सह-आरोपियों पर पहले से भी धोखाधड़ी के मामले चल रहे हैं, हालांकि इन आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।
पुलिस ने आरोपियों के नाम क्रमशः कमल प्रसाद निवासी 8-बी लक्ष्मी रोड, देहरादून; कुमुद वैद्य, पत्नी दीपक वैद्य, निवासी 251 सूरज अपार्टमेंट्स, वॉकेश्वर मार्ग, मुंबई; उदशी निवासी 30 मोहिनी रोड, देहरादून; और जगराज मान निवासी 7 लक्ष्मी रोड, देहरादून बताए हैं।
कोतवाली देहरादून पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर इसकी जांच उपनिरीक्षक संदीप कुमार को सौंप दी है। थाना प्रभारी निरीक्षक कैलाश चंद्र भट्ट के हस्ताक्षर से दर्ज इस मुकदमे में अब दो दशक पुराने संपत्ति हस्तांतरण, वसीयत और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी। जांच का परिणाम बताएगा कि क्या यह वास्तव में करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा करने का सुनियोजित खेल था या एक पारिवारिक और उत्तराधिकार विवाद।
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सादर,
टीम नेेता नागरी, सुमन कौर
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