लोकतंत्र दिवस पर लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित
कन्या गुरुकुल परिसर देहरादून में विद्यार्थियों ने प्रश्नोत्तरी, पोस्टर प्रदर्शनी और ओपन माइक के माध्यम से व्यक्त किए विचार लोकतंत्र
कन्या गुरुकुल परिसर देहरादून में विद्यार्थियों ने प्रश्नोत्तरी, पोस्टर प्रदर्शनी और ओपन माइक के माध्यम से व्यक्त किए विचार
लोकतंत्र दिवस पर प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, कन्या गुरुकुल परिसर देहरादून एवं अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन
डॉ अर्चना डिमरी
15 सितम्बर 2026
प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग (AIHCA), कन्या गुरुकुल परिसर, देहरादून द्वारा लोकतंत्र दिवस के अवसर पर अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से एक प्रेरणादायी एवं संवादात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक आदर्शों, नागरिक उत्तरदायित्व तथा लोकतंत्र में सक्रिय सहभागिता के प्रति जागरूकता विकसित करना था। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए लोकतंत्र के विभिन्न आयामों पर अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के श्री नसीम जी ने लोकतंत्र के मूल उद्देश्यों, उसके आदर्शों तथा वर्तमान सामाजिक एवं राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में उसकी प्रासंगिकता पर विस्तृत एवं प्रेरक व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि समानता, स्वतंत्रता, न्याय, सहभागिता और उत्तरदायित्व पर आधारित जीवन-दृष्टि है। उन्होंने विद्यार्थियों को संविधान में निहित मूल्यों को समझते हुए एक जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति नागरिकों की सक्रिय भागीदारी, आपसी संवाद और विविध विचारों के सम्मान में निहित है।
परिसर की समन्वयक प्रो. हेमंन पाठक ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज के समय में युवाओं के लिए लोकतंत्र के वास्तविक अर्थ, उसकी गरिमा एवं नागरिक दायित्वों को समझना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल अधिकारों की जानकारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि कर्तव्यों के प्रति सजग रहना भी एक सशक्त लोकतंत्र की आधारशिला है। उन्होंने विद्यार्थियों से लोकतांत्रिक मूल्यों को अपने व्यवहार और जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत “भारतीय स्वतंत्रता संग्राम” विषय पर एक रोचक एवं ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने ज्ञान का परिचय दिया। इसके साथ ही “लोकतंत्र, स्वतंत्रता एवं संवैधानिक मूल्य” विषय पर आयोजित पोस्टर प्रदर्शनी ने विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच एवं लोकतांत्रिक चेतना को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया। प्रदर्शित पोस्टरों ने संविधान, स्वतंत्रता, समानता, सामाजिक न्याय और नागरिक सहभागिता जैसे विषयों को आकर्षक एवं सारगर्भित रूप में प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक एवं संवादात्मक सत्र ओपन माइक रहा, जिसमें विद्यार्थियों ने लोकतंत्र, संविधान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा अपने व्यक्तिगत अनुभवों पर खुलकर अपने विचार साझा किए। विद्यार्थियों ने लोकतांत्रिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए विभिन्न समसामयिक विषयों पर सार्थक चर्चा की। इस सत्र ने सभी प्रतिभागियों को विचार-विमर्श एवं अभिव्यक्ति का एक सशक्त मंच प्रदान किया। कार्यक्रम में डॉ. अंजुलता, डॉ. रेखा राजपूत सहित विभिन्न विभागों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी प्रतिभागियों ने कार्यक्रम की विषयवस्तु एवं संवादात्मक स्वरूप की सराहना करते हुए इसे अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायी बताया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अर्चना डिमरी द्वारा किया गया। उन्होंने कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों का कुशलतापूर्वक संचालन करते हुए सभी वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के बीच सार्थक संवाद स्थापित किया। अंत में सभी अतिथियों, प्रतिभागियों तथा सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए लोकतंत्र को मजबूत बनाने में युवाओं की सक्रिय एवं सकारात्मक भूमिका पर बल दिया गया। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि— लोकतंत्र केवल एक शासन प्रणाली नहीं, बल्कि नागरिकों की जागरूकता, सहभागिता, संवाद और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान से सशक्त होने वाली जीवन-पद्धति है। जागरूक युवा ही सशक्त लोकतंत्र और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।”
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