लोकतंत्र दिवस: कन्या गुरुकुल में लोकतांत्रिक मूल्यों पर शिक्षाप्रद कार्यक्रम का आयोजन
कन्या गुरुकुल परिसर देहरादून में विद्यार्थियों ने प्रश्नोत्तरी, पोस्टर प्रदर्शनी और ओपन माइक के माध्यम से व्यक्त किए विचार लोकतंत्र
लोकतंत्र दिवस पर कन्या गुरुकुल परिसर में विशेष कार्यक्रम का आयोजन
कम शब्दों में कहें तो, देहरादून के कन्या गुरुकुल परिसर में छात्रों ने प्रश्नोत्तरी, पोस्टर प्रदर्शनी, और ओपन माइक के माध्यम से लोकतंत्र के मूल्यों पर अपने विचार व्यक्त किए।
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कन्या गुरुकुल परिसर, देहरादून में भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग और अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से लोकतंत्र दिवस के अवसर पर लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक प्रेरणादायी एवं संवादात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की विशेषताएँ
यह कार्यक्रम विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक आदर्शों और नागरिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक प्रयास था। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का संचालन डॉ. अर्चना डिमरी ने किया जो कि इस दिन की आयोजन समिति की प्रमुख सदस्य थीं।
मुख्य वक्ता श्री नसीम, अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के प्रतिनिधि, ने लोकतंत्र के मूल उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि लोकतंत्र केवल एक शासन व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह समानता, स्वतंत्रता, न्याय, सहभागिता और जिम्मेदारी की जीवनशैली है। उन्होंने युवाओं को संविधान के मूल मूल्यों को समझने और उन्हें अपनी नागरिकता में लागू करने के लिए प्रेरित किया।
प्रो. हेमंन पाठक, कार्यक्रम की समन्वयक, ने कहा कि आज के समय में युवाओं के लिए लोकतंत्र के सही अर्थ और उनके कर्तव्यों को समझना आवश्यक है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं।
कार्यक्रम के अंतर्गत “भारतीय स्वतंत्रता संग्राम” विषय पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता की गई जिसमें छात्रों ने अपने ज्ञान का प्रदर्शन करते हुए भाग लिया। इसी के साथ “लोकतंत्र, स्वतंत्रता एवं संवैधानिक मूल्य” विषय पर पोस्टर प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसने विद्यार्थियों की रचनात्मकता को उजागर किया।
कार्यक्रम का सबसे जीवंत भाग ओपन माइक सत्र था, जहाँ छात्रों ने लोकतंत्र, संविधान, और सामाजिक उत्तरदायित्व के विषय पर अपने विचार खुलकर साझा किए। इस सत्र ने सभी प्रतिभागियों को विचार-विमर्श करने और अपनी बात रखने का एक शानदार मंच दिया।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. अर्चना डिमरी ने सभी प्रतिभागियों, अतिथियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल एक शासन प्रणाली नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की जागरूकता, सहभागिता और संवाद पर निर्भर करता है।
इस तरह का कार्यक्रम न केवल छात्रों में लोकतंत्र की समझ को बढ़ाता है, बल्कि युवा पीढ़ी में सामाजिक उत्तरदायित्व और नागरिकता के प्रति जागरूकता भी पैदा करता है। जागरूक युवा ही एक मजबूत लोकतंत्र और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।
इस कार्यक्रम के माध्यम से स्पष्ट संदेश मिला कि शिक्षण संस्थानों में इस तरह के संवादात्मक सत्रों की आवश्यकता है, ताकि युवा अपनी सोच को प्रकट कर सकें और वास्तविक लोकतंत्र की भावना को समझ सकें।
अंत में, हम सभी को यह समझने की आवश्यकता है कि लोकतंत्र को मजबूत करने में हम सभी की जिम्मेदारी है। अधिक जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक करें.
संपादक: सिमरन कौर
टीम नेतानगरी
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