यूआईआईडीबी के बारे में प्रमुख सचिव मीनाक्षी सुंदरम ने 7,000 बीघा भूमि आवंटन की खबरों को किया खारिज

देहरादून राज्य में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने, रोजगार के नए अवसर सृजित करने तथा उपलब्ध सरकारी भूमि एवं संसाधनों के सुनियोजित एवं आर्थिक उपयोग के उद्देश्य से गठित उत्तराखंड…

Sep 13, 2026 - 00:37
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यूआईआईडीबी के बारे में प्रमुख सचिव मीनाक्षी सुंदरम ने 7,000 बीघा भूमि आवंटन की खबरों को किया खारिज
यूआईआईडीबी के बारे में प्रमुख सचिव मीनाक्षी सुंदरम ने 7,000 बीघा भूमि आवंटन की खबरों को किया खारिज

यूआईआईडीबी के बारे में प्रमुख सचिव मीनाक्षी सुंदरम ने 7,000 बीघा भूमि आवंटन की खबरों को किया खारिज

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में यूआईआईडीबी की भू-संपत्ति आवंटन से जुड़ी खबरें गलत साबित हुई हैं। प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उन्हें केवल 45 एकड़ भूमि ही मिली है, न कि 7,000 बीघा।

देहरादून में उत्तराखंड इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट बोर्ड (यूआईआईडीबी) की कार्यप्रणाली पर हाल में उठे सवालों को लेकर राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। इसका उद्देश्य राज्य में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करना, नए रोजगार के अवसर सृजित करना और उपलब्ध सरकारी संसाधनों का सही और आर्थिक उपयोग करना है।

प्रमुख सचिव मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि हालिया रिपोर्टों में जो ये बताया गया था कि यूआईआईडीबी को 7,000 बीघा भूमि आवंटित की गई है, वह गलत है। उन्होंने बताया कि असल में केवल 45 एकड़ भूमि ही यूआईआईडीबी को उपलब्ध कराई गई है और ऐसा कोई भी प्रक्रिया नहीं है जिससे इतनी बड़ी मात्रा में भूमि आवंटन की बात सही ठहराई जा सके।

रोजगार और विकास के नए आयाम

सुंदरम ने बताया कि यूआईआईडीबी का गठन राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए किया गया था। उनका लक्ष्य है कि आगामी पांच वर्षों में राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) को दोगुना किया जाए। इसके लिए पूंजी निवेश, रोजगार सृजन और आधारभूत संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।

राज्य में पिछले कुछ समय से निवेशकों की ओर से कई प्रस्ताव आए हैं। इन निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए उचित भूमि और अन्य संसाधनों की जरूरत है, जिससे निवेशकों को सुविधाएँ उपलब्ध करवाना है। यूआईआईडीबी का पूरा संकल्प इसी दिशा में है।

पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश

सुंदरम ने बताया कि राज्य में औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्रों में निवेश के लिए पहले से सिडकुल जैसी संस्थागत व्यवस्थाएं कार्य कर रही हैं। यूआईआईडीबी के माध्यम से पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश को आकर्षित करने की योजना है।

उन्होंने कहा, "राज्य को एक प्रमुख पर्यटन और वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले होटल, रिसॉर्ट और अन्य सुविधाओं में पूंजी निवेश आवश्यक है।" उन्हें उम्मीद है कि यूआईआईडीबी की मदद से राज्य में आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर

तथा इसके अलावा, उत्तराखंड को शिक्षा के क्षेत्र में भी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जाएगा। सुंदरम ने कहा कि राज्य में कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान हैं, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में बड़े एवं गुणवत्तापूर्ण पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।

इससे उत्तराखंड के युवाओं को दिल्ली, बेंगलुरु और अन्य बड़े शहरों की बजाय अपने राज्य में बेहतर शैक्षणिक अवसर प्राप्त होंगे। यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा।

सरकारी भूमि का सही उपयोग

एक चुनौती के रूप में, सुंदरम ने उल्लेख किया कि उत्तराखंड में उचित भूमि उपलब्ध कराने में जटिलताएं हैं। उन्होंने बताया कि यूआईआईडीबी का प्रमुख उद्देश्य सरकारी भूमि का अनियोजित हस्तांतरण नहीं है, बल्कि आवश्यकता अनुसार उसे योग्य तरीके से उपयोग में लाना है।

उन्होंने आगे कहा कि "डाक्यूमेंट्स और नियमों के अनुसार भूमि का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए सरकारी व्यवस्था का सही उपयोग जरूरी है।" ऐसे में जो भूमि अनुपयोगी हो चुकी है, उसे सही तरीके से चिन्हित कर यूआईडीबी के माध्यम से सेवाओं के क्षेत्र में दिखाया जा सकेगा।

उन्होंने उम्मीद जताई कि यह निवेश न केवल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सशक्त करेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि यूआईडीबी से संबंधित प्रक्रियाएं पूरी पारदर्शिता से चलाई जाएं। इसलिए, किसी भी प्रकार की भ्रांति से बचने के लिए सही और तथ्यात्मक जानकारी को ही आधार मानना आवश्यक है।

इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार का यह भी प्रयास है कि यूआईआईडीबी की मदद से उत्तराखंड को निवेश, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा और सेवा क्षेत्रों का एक प्रमुख केंद्र बनाया जा सके।

सरकार का यह मानना है कि अगर इन सभी योजनाओं को सही तरीके से लागू किया गया तो निश्चित ही उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिलेगी।

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— Team Netaa Nagari (सारा गिरी)

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