भनाली तोक में आकाशीय बिजली गिरने से मारी गई बकरियों का प्रशासन ने पशुपालकों को वितरित किया मुआवजा

के एस असवाल चमोली :  प्रशासन ने 30 पशुपालकों को 16 लाख 52 हजार की सहायता राशि प्रदान की चमोली

May 9, 2026 - 00:37
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भनाली तोक में आकाशीय बिजली गिरने से मारी गई बकरियों का प्रशासन ने पशुपालकों को वितरित किया मुआवजा
भनाली तोक में आकाशीय बिजली गिरने से मारी गई बकरियों का प्रशासन ने पशुपालकों को वितरित किया मुआवजा

भनाली तोक में आकाशीय बिजली गिरने से मारी गई बकरियों का प्रशासन ने पशुपालकों को वितरित किया मुआवजा

कम शब्दों में कहें तो चमोली जिले के प्रशासन ने 30 पशुपालकों को कुल 16 लाख 52 हजार रुपये की सहायता राशि वितरित की है। यह सहायता राशि उन बकरियों के लिए है जो आकाशीय बिजली गिरने से मारी गई थीं।

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उत्तराखंड के चमोली जिले के गौणा गांव के भनाली तोक में हाल ही में आकाशीय बिजली गिरने की एक दुखद घटना में 30 पशुपालकों की 413 बकरियां मारी गई थीं। इस आमदनी का मुख्य स्रोत इन बकरियों की मृत्यु से इन पशुपालकों के जीवन पर बुरा असर पड़ा है।

प्रशासन ने इस घटना के प्रभावितों की सहायता के लिए संबंधित किसानों को राहत राशि प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू की। शुक्रवार को, राज्य सभा सांसद महेंद्र भट्ट और उप जिलाधिकारी राजकुमार पांडे ने प्रभावित पशुपालकों को राहत राशि के चेक वितरित किए। इस अवसर पर तहसीलदार दिप्ती शिखा और अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

भनाली तोक बिजली हादसा

प्रशासन की ओर से दिये गए चेक में कुल 16 लाख 52 हजार रुपये की सहायता राशि शामिल है, जिसे उन पशुपालकों के बीच बांटा गया जिन्होंने इस घटना से आर्थिक हानि उठाई थी। यह सहायता राशि एक आवश्यक कदम है जिससे प्रभावित पशुपालकों को अपने पैरों पर खड़े होने में मदद मिलेगी।

गौरतलब है कि 4 मई को भनाली तोक में आकाशीय बिजली गिरने से बकरियों की मौत की घटना ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया था। इसके बाद, जिलाधिकारी गौरव कुमार ने घटना की जांच के लिए वन विभाग और तहसील प्रशासन की टीम को निर्देशित किया ताकि सही रिपोर्ट तैयार की जा सके। इसके आधार पर ही राहत राशि वितरण का निर्णय लिया गया।

इस अवसर पर कई किसान, जिन्होंने अपनी बकरियों को खो दिया था, अपनी समस्या को व्यक्त कर रहे थे और प्रशासन के प्रयासों की सराहना कर रहे थे। कई पशुपालकों ने कहा कि इस सहायता राशि से उन्हें अपनी जिंदगी की बुनियाद को फिर से खड़ा करने में मदद मिलेगी।

संक्षेप में कहें तो, यह घटना न केवल पशुपालकों के लिए बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए भी एक बड़ा सदमा है। ऐसे प्राकृतिक आपदाओं के दौरान प्रशासन की सक्रियता महत्वपूर्ण होती है, ताकि प्रभावित लोगों को राहत प्रदान की जा सके। भविष्य में इस तरह की दरिद्रता से बचने के लिए समाज के सभी सदस्यों को एकजुट होकर कार्य करने की आवश्यकता है।

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Team Netaa Nagari

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