बारिश के चलते फंसे 1500 यात्रियों को SDRF, NDRF और DDRF की टीमों ने किया सुरक्षित रेस्क्यू

देहरादून/रुद्रप्रयाग केदारनाथ यात्रा मार्ग पर चीड़बासा के पास देर रात स्लाइडिंग के चलते फंसे करीब 1500 यात्रियों को SDRF, NDRF और DDRF की संयुक्त टीमों ने सुरक्षित रेस्क्यू कर गौरीकुंड…

Sep 28, 2026 - 18:37
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बारिश के चलते फंसे 1500 यात्रियों को SDRF, NDRF और DDRF की टीमों ने किया सुरक्षित रेस्क्यू
बारिश के चलते फंसे 1500 यात्रियों को SDRF, NDRF और DDRF की टीमों ने किया सुरक्षित रेस्क्यू

बारिश के चलते फंसे 1500 यात्रियों को SDRF, NDRF और DDRF की टीमों ने किया सुरक्षित रेस्क्यू

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कम शब्दों में कहें तो, केदारनाथ यात्रा मार्ग पर बारिश के कारण हुए भूस्खलन में लगभग 1500 यात्रियों को SDRF, NDRF और DDRF की टीमों ने सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया।

देहरादून/रुद्रप्रयाग: बीती रात केदारनाथ यात्रा मार्ग पर स्थित चीड़बासा के निकट भूस्खलन के कारण फंसे 1500 से अधिक यात्रियों का रेस्क्यू किया गया। इसी दौरान अधिकारियों ने बताया कि यह घटना तब हुई जब DCR रुद्रप्रयाग को जानकारी मिली कि गौरीकुंड से लगभग तीन किलोमीटर आगे स्थित चीड़बासा में बड़ी मात्रा में मलबा गिरने के कारण कई यात्री रास्ते के दूसरी ओर फंस गए हैं।

इस सूचना मिलते ही SDRF की सोनप्रयाग टीम के सब इंस्पेक्टर आशीष डिमरी के नेतृत्व में तत्काल मौके पर रवाना हुई। पहुंचने पर उन्हें चीड़बासा हैलीपैड के पास रास्ते पर मलबा जमा हुआ मिला। स्थिति को और खतरनाक बनाते हुए पहाड़ों से लगातार पत्थर गिर रहे थे, जिससे वहां की आवाजाही बेहद जोखिमपूर्ण हो गई थी।

Rescue operation

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए SDRF, NDRF और DDRF की टीमों ने संयुक्त रूप से एक रेस्क्यू अभियान शुरू किया। उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्लाइडिंग जोन को सावधानीपूर्वक पार कराया, जिससे करीब 1500 यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया गया। यह रेस्क्यू अभियान चुनौतीपूर्ण था, लेकिन टीमों ने समन्वय के साथ इसे सफलतापूर्वक पूरा किया।

ग्रामीण एवं स्थानीय प्रशासन के अनुसार, लगातार गिरते हुए पत्थर और भूस्खलन के खतरे के बावजूद रेस्क्यू टीमों ने अपनी फुर्ती और दक्षता का परिचय दिया। इस अभियान ने न केवल यात्रियों को सुरक्षित किया बल्कि यात्रा मार्ग पर अन्य यात्रियों के लिए भी सुरक्षा सुनिश्चित की।

इस तरह के अभियानों से यह स्पष्ट होता है कि हमारी सुरक्षा और बचाव टीमें किस हद तक तत्पर और प्रभावी हैं। इससे अगले समय में इस तरह की आपात स्थितियों में बेहतर व्यवस्था और त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन की उम्मीद भी जगी है।

इस रेस्क्यू ऑपरेशन ने यह भी दर्शाया कि जरूरत के समय पर किस प्रकार विभिन्न एजेंसियां एक साथ मिलकर कार्य करती हैं। आने वाले समय में इस प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए और भी तैयारियों की आवश्यकता महसूस होती है।

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सादर,
टीम नेट नागरी

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