देवीधुरा में ऐतिहासिक बग्वाल मेले का आयोजन: लाखों श्रद्धालुओं ने देखी पारंपरिक रस्में, मुख्यमंत्री धामी ने नगर पंचायत बनाने का किया ऐलान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चम्पावत जिले के प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ वाराही धाम, देवीधुरा में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर आयोजित ऐतिहासिक बग्वाल मेले में प्रतिभाग कर पूजा-अर्चना की और…
देवीधुरा में ऐतिहासिक बग्वाल मेले का आयोजन
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कम शब्दों में कहें तो, चम्पावत जिले के देवीधुरा में रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित ऐतिहासिक बग्वाल मेले में लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
मुख्यमंत्री का सम्मानित आगमन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चम्पावत जिले के प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ वाराही धाम में आयोजित ऐतिहासिक बग्वाल मेले में भाग लिया। उन्होंने इस अवसर पर पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। मुख्यमंत्री धामी ने इस समारोह में अपने उद्बोधन में कहा कि बग्वाल केवल एक खेल नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपराओं का एक अभिन्न हिस्सा है।
बग्वाल खेल की खासियत
बग्वाल मेले के दौरान चार खामों—वालिक, चम्याल, गहड़वाल और लमगड़िया—के योद्धाओं ने बांस और रिंगाल की ढालों के साथ 8 मिनट तक फलों और फूलों से पारंपरिक बग्वाल खेल का प्रदर्शन किया। यह नजारा देखकर दर्शकों में उत्साह की लहर दौड़ गई। सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक इस अद्भुत कार्यक्रम के साक्षी बने।
नगर पंचायत का ऐलान
मुख्यमंत्री धामी ने इस ऐतिहासिक अवसर पर देवीधुरा को नगर पंचायत बनाने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में विकास की नई राहें खुलेंगी और स्थानीय निवासियों के लिए बेहतर सुविधाओं का निर्माण होगा। इस ऐलान से स्थानीय लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
स्थानीय संस्कृति का प्रतीक
देवीधुरा का बग्वाल मेला स्थानीय संस्कृति और परंपरा का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह सिर्फ धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर का भी उत्सव है।
परंपरागत तौर पर, बग्वाल में भाग लेने वाले योद्धा अपनी वीरता और साहस का प्रदर्शन करते हैं, जिससे युवा पीढ़ी को भी प्रेरणा मिलती है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
इस प्रकार के मेले और त्यौहार स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देते हैं। मेले के दौरान व्यापारियों और स्थानीय कारीगरों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने का मौका मिलता है। इससे न सिर्फ संसाधनों की बिक्री में बढ़ोतरी होती है, बल्कि इससे स्थानीय रोजगार भी बढ़ता है।
देवीधुरा की रस्मों और इसकी अद्भुतता की चर्चा हर ओर हो रही है। ऐसे आयोजनों से न केवल लोगों की धार्मिक आस्था को बल मिलता है, बल्कि एकता और सांस्कृतिक धरोहर की भी बुनियाद मजबूत होती है।
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Team Netaa Nagari, सुमिता कुमारी
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