चमोली: विष्णुगाड-पीपलकोटी हाइड्रो प्रोजेक्ट की टनल में फंसे 18 मजदूरों की रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
चमोली। जिले के पीपलकोटी क्षेत्र में विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में अचानक भारी मात्रा में मलबा और पानी
चमोली: विष्णुगाड-पीपलकोटी हाइड्रो प्रोजेक्ट की टनल में फंसे 18 मजदूरों की रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
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कम शब्दों में कहें तो चमोली के पीपलकोटी क्षेत्र में विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में भारी मात्रा में मलबा और पानी घुसने के कारण 18 मजदूर फंस गए हैं।
चमोली में एक गंभीर दुर्घटना घटित हुई है जहां निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की टनल में अचानक मलबे और पानी का गंभीर प्रवाह आ गया। जिससे 18 मजदूर अंदर फंस गए हैं। घटना के बाद से मलबा हटाने और मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया गया है।
घटना का विवरण
यह घटना तब हुई जब टनल में खुदाई का काम जारी था। अचानक मलबा और पानी का तेज बहाव अंदर आया, जिससे टनल का रास्ता पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया। इस तरह की घटनाएँ भारत में निर्माण स्थलों पर नई नहीं हैं, लेकिन यह घटना विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि यह न केवल मजदूरों की सुरक्षा से संबंधित है, बल्कि परियोजना की प्रगति को भी प्रभावित करती है।
रेस्क्यू ऑपरेशन की पूरी जानकारी
सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं। रेस्क्यू ऑपरेशन को सुनिश्चित करने के लिए भारी मशीनरी को तैनात किया गया है। टनल के अंदर जमा पानी को निकालने के लिए पंप भी लगाए गए हैं। प्रशासन की प्राथमिकता फंसे हुए मजदूरों से संपर्क स्थापित करना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए वैकल्पिक रास्ता तैयार करना है।
खास बात यह है कि चमोली के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी खुद घटनास्थल पर रेस्क्यू अभियान की निगरानी कर रहे हैं। मेडिकल टीमें भी अलर्ट पर हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति का सामना किया जा सके। मार्च 2023 में उत्तरकाशी में हुए इसी प्रकार के हादसे के बाद प्रशासन ने सुरक्षा मानकों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।
परियोजना का महत्व
विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना अलकनंदा नदी पर निर्मित 444 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना है। यह परियोजना उत्तराखंड की बिजली आवश्यकता को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। ऐसे में इस परियोजना का स्थायी रूप से प्रभावित होना राज्य की बिजली वितरण की स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
इस घटना ने उत्तरकाशी के सिलक्यारा टनल हादसे की याद भी ताजा कर दी है, जब निर्माणाधीन सुरंग में भूस्खलन के बाद 41 श्रमिक कई दिनों तक फंसे रहे थे। उस वक़्त संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
अधिकारियों का कहना है कि टनल में फंसे मजदूरों से संपर्क स्थापित करने के प्रयास लगातार जारी हैं। फिलहाल किसी जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और सभी आशाओं के साथ रेस्क्यू अभियान रातभर जारी रहने की संभावना है।
प्रशासन का मुख्य फोकस अब उन मजदूरों को सुरक्षित निकालने पर है जो कई सौ मीटर की दूरी पर फंसे हुए हैं। टनल की संरचनात्मक स्थिति और आगे मलबा आने की आशंका को देखते हुए परियोजना के इंजीनियर भी मौके पर स्थिति का आकलन कर रहे हैं।
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सादर, टीम नेटा नगरी - सुमिता शर्मा
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