उत्तराखंड: वन विभाग के एसडीओ राजीव नयन नौटियाल का निलंबन रद्द, खनन माफिया के खिलाफ हुई कार्रवाई

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वन विभाग के चर्चित अधिकारी और तत्कालीन कालसी वन प्रभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी (एसडीओ) राजीव नयन नौटियाल के निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने 10 जुलाई 2026 को यह फैसला सुनाया। राजीव नयन नौटियाल … The post वन विभाग के एसडीओ का निलंबन रद्द, खनन माफिया के विरुद्ध खोल चुके मोर्चा appeared first on Round The Watch.

Jul 10, 2026 - 18:37
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उत्तराखंड: वन विभाग के एसडीओ राजीव नयन नौटियाल का निलंबन रद्द, खनन माफिया के खिलाफ हुई कार्रवाई
उत्तराखंड: वन विभाग के एसडीओ राजीव नयन नौटियाल का निलंबन रद्द, खनन माफिया के खिलाफ हुई कार्रवाई

उत्तराखंड: वन विभाग के एसडीओ राजीव नयन नौटियाल का निलंबन रद्द, खनन माफिया के खिलाफ हुई कार्रवाई

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वन विभाग के चर्चित अधिकारी राजीव नयन नौटियाल का निलंबन रद्द कर दिया है। यह निर्णय खनन माफियाओं के खिलाफ उनकी कड़ी कार्रवाई को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजकुमार धिमान, देहरादून: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण निर्णय में वन विभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी (एसडीओ) राजीव नयन नौटियाल के निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया। यह निर्णय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनाया।

राजीव नयन नौटियाल वर्तमान में सहायक वन संरक्षक के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें 25 जून 2026 को निलंबित किया गया था। उनके खिलाफ दो मुख्य आरोप थे: पहला, उन्होंने अपनी सेवा नियमितीकरण के दौरान एक आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई और दूसरा, वे राज्य के वन मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में अनुपस्थित रहे।

आरोपों का विस्तृत विश्लेषण

राजीव नयन नौटियाल की ओर से अदालत में इसकी शिकायत की गई कि आरोप इतने गंभीर नहीं थे कि उन्हें कार्यवाही का सामना करना पड़े। उनका कहना था कि निलंबन आदेश में उचित कानूनी शर्तों का पालन नहीं किया गया था।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता ने आरोपों का समर्थन करने का प्रयास किया, लेकिन यह स्वीकार किया कि निलंबन के लिए आवश्यक गंभीरता का कोई उल्लेख नहीं था। खंडपीठ ने कहा कि उत्तराखंड सरकारी सेवक नियमावली के नियम 4(1) के तहत निलंबन आदेश में स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए कि आरोप गंभीर हैं।

निलंबन का रद्द होना और सरकारी विभागों को संदेश

हाईकोर्ट ने निलंबन को केवल इस कानूनी आधार पर रद्द किया। अदालत ने सुझाव दिया कि यदि विभाग उचित समझे तो नया निलंबन आदेश जारी कर सकता है। यह फैसले सरकारी विभागों के लिए आवश्यक प्रक्रिया और नियमों का पालन करने का एक महत्वपूर्ण संदेश है।

खनन माफिया के खिलाफ राजीव नयन नौटियाल का संघर्ष

राजीव नयन नौटियाल ने पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। वह कैलसी, विकासनगर और चकराता क्षेत्रों में खनन माफियाओं के खिलाफ कट्टर बने रहे हैं। उनके समर्थक उन्हें ईमानदार और सख्त अधिकारी मानते हैं।हालांकि, उनके विभागीय व्यवहार और कार्यशैली को लेकर विवाद भी रहे हैं।

नौटियाल के कार्यों की प्रमुख विशेषताएँ

  • खनन माफिया के खिलाफ अभियान: उन्होंने यमुना नदी के क्षेत्रों में अवैध खनन के खिलाफ कई बार सख्ती से कार्रवाई की।
  • कमियों की पहचान: उन्होंने बार-बार तबादलों का विरोध किया, जिसे उन्होंने कानून के खिलाफ बताया।
  • सुरक्षा की मांग: अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के चलते उन्हें जान का खतरा महसूस हुआ और उन्होंने सुरक्षा की मांग की।

एक मामले में, विकासनगर के क्षेत्र में अवैध खनन के दौरान उन्होंने कुछ व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की। इस मामले में हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई को संज्ञान में लिया और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।

नौटियाल के समर्थकों का मानना है कि यह निलंबन अवैध खनन पर उनकी कड़ी कार्रवाई का परिणाम है। दूसरी ओर, वन विभाग ने बताया कि यह कार्रवाई विभागीय कारणों पर आधारित थी। यह मामला अब उत्तराखंड में अवैध खनन बनाम प्रशासनिक अनुशासन की बहस का एक बड़ा उदाहरण बन गया है।

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टीम नेटaa नगरी

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