उत्तराखंड में फर्जी बैंक खातों का मामला: 150 करोड़ के सरकारी आवंटन पर गंभीर आरोप

उत्तराखंड में सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़ी भारतीय को-ऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। संस्था के पूर्व अध्यक्ष एवं निदेशक जितेंद्र कुमार अग्रवाल की ओर से दिए गए शपथपत्र में आरोप लगाया गया है कि संस्था को उत्तराखंड सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यदायी संस्था के रूप में … The post देहरादून में फर्जी बैंक खाते, उत्तराखंड में 150 करोड़ के सरकारी आवंटन का आरोप, सहकारी संस्था पर गंभीर सवाल appeared first on Round The Watch.

Oct 2, 2026 - 09:37
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उत्तराखंड में फर्जी बैंक खातों का मामला: 150 करोड़ के सरकारी आवंटन पर गंभीर आरोप
उत्तराखंड में फर्जी बैंक खातों का मामला: 150 करोड़ के सरकारी आवंटन पर गंभीर आरोप

उत्तराखंड में फर्जी बैंक खातों का मामला: 150 करोड़ के सरकारी आवंटन पर गंभीर आरोप

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़ी संस्था पर गंभीर आरोप लगे हैं, जिसमें 150 करोड़ रुपये के सरकारी धन के दुरुपयोग का संदर्भ है।

उत्तराखंड में सरकारी निर्माण कार्यों से संबंधित भारतीय को-ऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। संस्था के पूर्व अध्यक्ष एवं निदेशक जितेंद्र कुमार अग्रवाल ने एक शपथपत्र में आरोप लगाते हुए कहा है कि संस्था ने उत्तराखंड सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यदायी संस्था के रूप में खुद को प्रस्तुत कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया।

जांच की प्रक्रिया और सरकार की प्रतिक्रिया

शिकायत के आधार पर, उत्तराखंड सरकार ने 2 जून 2026 को जांच के आदेश दिए। सचिव, नियोजन विभाग को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया हैं। इसके बाद, जितेंद्र कुमार अग्रवाल ने हाईकोर्ट का रुख किया, जहां उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को मामले का निस्तारण करते हुए जांच को तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया।

फर्जी बैंक खातों की पहचान

शपथपत्र में उल्लेख किया गया है कि संस्था की प्रबंध समिति का कार्यकाल 4 जनवरी 2024 को समाप्त हो गया था। आरोप है कि इसके बाद वैध प्रबंध समिति के बिना ही देहरादून में फर्जी प्रस्तावों के आधार पर बैंक खाते खोले गए थे। शिकायत में बैंक ऑफ इंडिया, राजपुर रोड, देहरादून में दो खाते और एचडीएफसी बैंक, जाखन रोड, देहरादून में तीन खाते शामिल हैं।

इन खातों के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों से स्वीकृत धनराशि का उपयोग, सेंटीज चार्ज और ब्याज को लेकर भी गंभीर अनियमितताएँ बताई गई हैं। आरोपितों ने सरकारी धन का दुरुपयोग किया है और इसके खिलाफ तात्कालीक कदम उठाने की आवश्यकता जताई गई है।

संस्था की सामूहिक भूमिका

इस संस्था का नाम उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में सरकारी परियोजनाओं में कार्यदायी संस्था के रूप में सामने आता रहा है। ऊधमसिंह नगर में मिनी स्टेडियम के निर्माण के लिए संस्था को कार्यदायी संस्था नामित किया गया। इसी तरह से विभिन्न परियोजनाओं में संस्था का महत्वपूर्ण रोल रहा है।

हालांकि, यह बात ध्यान देने योग्य है कि किसी भी परियोजना में कार्यदायी संस्था का नाम होना अपने आप में वित्तीय गड़बड़ी का प्रमाण नहीं है। इस मामले में वास्तविक खर्च, कार्य की गुणवत्ता और धन के अंतिम उपयोग की जांच आवश्यक है।

संस्थान की पहचान एवं नाम को लेकर विवाद

शपथपत्र में संस्था के नाम और पहचान को लेकर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि संस्था ने केंद्र सरकार के निर्देशों का उल्लंघन किया और सरकारी संस्थाओं जैसा भ्रम पैदा किया। इन सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

फर्जी दस्तावेज और आरोप

जितेंद्र कुमार अग्रवाल ने शपथपत्र में कई लोगों के नाम का उल्लेख किया है, जिन पर फर्जी दस्तावेजों और लेटरहेड के उपयोग का आरोप है। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम आरोप में आना अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करता।

ऑडिट और उच्चस्तरीय तकनीकी समिति की मांग

शिकायतकर्ता ने उच्चस्तरीय तकनीकी समिति से निर्माण कार्यों और रिकॉर्ड का ऑडिट करने, कथित खातों पर रोक लगाने, सरकारी धन की वसूली करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, यह जानने के लिए सभी की नजरें जांच पर रहती हैं।

इस मामले में सभी महत्वपूर्ण सवालों के जवाब अभी भी अधूरे हैं। जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि 4 जनवरी 2024 के बाद बैंक खातों का संचालन किसने किया, किन दस्तावेजों के आधार पर खाते चलाए गए, विभिन्न विभागों से कितनी राशि प्राप्त हुई और वास्तविक खर्च किन परियोजनाओं पर हुए।

कुल मिलाकर, इस मामले का भविष्य जांच के परिणामों पर निर्भर करता है। अब देखना है कि उत्तराखंड सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और आरोप सही साबित होने पर कैसे जिम्मेदारी तय की जाती है।

इसके साथ ही, सरकार को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि इस तरह के मामलों में पारदर्शिता हो और जनता का भरोसा बना रहे।

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सभी सवालों के जवाब अभी मिलना बाकी है, मामले का पर्दाफाश होना अभी बाकी है।

Team Netaa Nagari द्वारा, जया शर्मा

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