उत्तराखंड कांग्रेस ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर गोदियाल के नेतृत्व में किया विधानसभा के सामने धरना प्रदर्शन

देहरादून बृहस्पतिवार को।महिला आरक्षण के मुद्दे पर जनता को गुमराह किये जाने के खिलाफ आज प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विधानसभा भवन…

Apr 24, 2026 - 09:37
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उत्तराखंड कांग्रेस ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर गोदियाल के नेतृत्व में किया विधानसभा के सामने धरना प्रदर्शन
उत्तराखंड कांग्रेस ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर गोदियाल के नेतृत्व में किया विधानसभा के सामने धरना प्रदर्शन

उत्तराखंड कांग्रेस ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर गोदियाल के नेतृत्व में किया विधानसभा के सामने धरना प्रदर्शन

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड कांग्रेस ने पीसीसी अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में महिला आरक्षण के मुद्दे पर विधानसभा के सामने धरना प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने 33 प्रतिशत महिलाओं के आरक्षण की मांग की।

देहरादून, बृहस्पतिवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ अपने अधिकारों की मांग को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का उद्देश्य महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने का था, जिसे विधानसभा में लागू करने की मांग की गई। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में आयोजित इस धरने में सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। महासभा में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल थे।

गणेश गोदियाल ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि "महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023) को साल 2023 में पूर्ण बहुमत से पास किया गया था। लेकिन भाजपा ने इसे लागू करने में आनाकानी शुरु कर दी है।" उन्होंने कहा कि जनगणना के बिना मनमाने तरीके से परिसीमन विधेयक पेश किया गया है, जिससे महिलाओं की संस्थागत भूमिका और अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का विधेयक लाया था, जिससे आज 15 लाख महिलाएं राजनीतिक स्तर पर सक्रिय हैं। "हम कांग्रेस में महिलाओं के राजनैतिक अधिकारों के लिए हमेशा से समर्थक रहे हैं," उन्होंने कहा।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने याद दिलाया कि 2008 में उनकी सरकार ने महिला आरक्षण बिल को राज्यसभा में भारी बहुमत से पेश किया था, लेकिन तब भाजपा ने इसका विरोध किया था। उन्होंने भाजपा के महिला आरक्षण बिल को लाने के निर्णय का स्वागत किया, यह कहते हुए कि "देर आए, दुरुस्त आए।"

प्रीतम सिंह ने कहा कि महिलाएं अब खुद को उपेक्षित महसूस कर रही हैं और भाजपा को इस पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, "कांग्रेस पार्टी हमेशा से महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने के लिए प्रयासरत रही है।" उन्होंने यह भी बताया कि नारी शक्ति वंदन बिल का समर्थन केवल कांग्रेस ने ही किया है।

डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि महिला आरक्षण अधिनियम 2023 के पास होने पर भाजपा ने इसे लागू करने से बचने का कुचक्र रचा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महिला शक्ति भाजपा के इस रवैये को कभी माफ नहीं करेगी।

कार्यक्रम में कई अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता भी उपस्थित थे, जिन्होंने चुनावी रणनीतियों और महिला आरक्षण पर अपने विचार रखे। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए कार्यकर्ताओं ने एकजुटता का प्रदर्शन किया और अपने हक के लिए आवाज उठाई।

यह धरना प्रदर्शन न केवल महिला आरक्षण के मामले में कांग्रेस की सख्ती को दर्शाता है, बल्कि महिला सशक्तिकरण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट करता है।

मीडिया में कांग्रेस के इस आंदोलन से यह उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार जनता की मांगों की अनदेखी नहीं कर पाएगी। इसके साथ ही, कांग्रेस ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि वे महिला आरक्षण को लेकर संजीदा हैं और इसे पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

भविष्य में होने वाले चुनावों में महिला आरक्षण एक प्रमुख मुद्दा बनने की संभावना है, और कांग्रेस ने इस संदेश को सब तक पहुंचाने की कोशिश की है।

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सादर, टीम नेटा नगर

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