सिमली में 200 बेड का अस्पताल बनाने की मांग, 200 किमी पैदल चलकर दून पहुंचे आंदोलनकारी

Rajkumar Dhiman, Dehradun: पहाड़ में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर चमोली जिले के सिमली से 200 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर देहरादून पहुंचे क्षेत्रवासियों का आक्रोश मंगलवार को सड़क पर दिखाई दिया। सिमली में 200 बेड का अस्पताल बनाने और मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री आवास कूच … The post सिमली में 200 बेड का अस्पताल बनाने की मांग, 200 किमी पैदल चलकर दून पहुंचे आंदोलनकारी appeared first on Round The Watch.

Oct 21, 2026 - 00:37
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Rajkumar Dhiman, Dehradun: पहाड़ में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर चमोली जिले के सिमली से 200 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर देहरादून पहुंचे क्षेत्रवासियों का आक्रोश मंगलवार को सड़क पर दिखाई दिया। सिमली में 200 बेड का अस्पताल बनाने और मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री आवास कूच कर रहे आंदोलनकारियों को पुलिस ने हाथीबड़कला में बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इससे नाराज प्रदर्शनकारियों की पुलिस से तीखी नोकझोंक हुई। काफी देर तक चले घटनाक्रम के बाद पुलिस ने आंदोलनकारियों को हिरासत में लेकर एकता विहार स्थित धरना स्थल पहुंचा दिया।

बेस अस्पताल संघर्ष समिति सिमली के बैनर तले देहरादून पहुंचे आंदोलनकारी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगों को सामने रखना चाहते थे। हाथीबड़कला में पुलिस की बैरिकेडिंग के सामने प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और आगे बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि से वार्ता कराने का आश्वासन भी दिया गया। हालांकि, काफी देर तक वार्ता नहीं होने पर आंदोलनकारियों का धैर्य जवाब दे गया। उन्होंने सड़क पर धरना देकर विरोध जताया। इसके बाद पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर एकता विहार ले गई।

घोषणा के बावजूद 200 बेड का अस्पताल नहीं

आंदोलनकारियों का कहना है कि सिमली में 200 बेड का अस्पताल बनाने की घोषणा पूर्ववर्ती विजय बहुगुणा सरकार के कार्यकाल में की गई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार की ओर से भी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की घोषणा की गई, लेकिन धरातल पर स्थिति अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है। वर्तमान में यहां करीब 100 बेड का अस्पताल संचालित हो रहा है। समिति का आरोप है कि अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सक और जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को बेहतर उपचार के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

पांच जिलों के सीमांत क्षेत्रों को मिलेगा लाभ

बेस अस्पताल संघर्ष समिति के अनुसार, सिमली में 200 बेड का अस्पताल बनने से केवल चमोली ही नहीं, बल्कि रुद्रप्रयाग, पौड़ी, बागेश्वर और अल्मोड़ा के सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों को भी लाभ मिलेगा। पहाड़ी क्षेत्रों में गंभीर मरीजों को उपचार के लिए दूरस्थ शहरों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में सिमली में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से युक्त अस्पताल स्थापित होने से स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार उपलब्ध हो सकेगा और मरीजों को लंबी दूरी तय करने की मजबूरी से राहत मिलेगी।

11 अक्टूबर को शुरू की थी पदयात्रा

आंदोलनकारियों के 30 सदस्यीय दल ने बताया कि वे 11 अक्टूबर को सिमली से देहरादून के लिए रवाना हुए थे। करीब 10 दिन तक अलग-अलग पड़ावों पर रुकते हुए उन्होंने लगभग 200 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी की और मंगलवार को देहरादून पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि लंबी पदयात्रा का उद्देश्य सरकार का ध्यान पहाड़ की बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं और अस्पताल की जरूरत की ओर आकर्षित करना है।

वार्ता के इंतजार में आंदोलनकारी

आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध एकता विहार धरना स्थल ले जाया गया। उन्होंने वहां ठहरने की उचित व्यवस्था नहीं होने की बात भी कही। फिलहाल आंदोलनकारी मुख्यमंत्री से वार्ता के लिए आमंत्रण मिलने का इंतजार कर रहे हैं। समिति ने स्पष्ट किया कि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे बढ़ाने के विकल्पों पर विचार किया जाएगा। आंदोलन की अगली रणनीति बुधवार को तय की जाएगी। प्रदर्शन में देवेंद्र सिंह नेगी, रविंद्र खंडूरी, जयदीप गैरोला, भास्करानंद डिमरी, अनिल, जगमोहन रावत और कमल सिंह नेगी समेत कई लोग शामिल रहे।

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