2027 का ताज फिर सजेगा धामी के सिर?

उत्तराखंड में जीत की हैट्रिक की तैयारी, भाजपा के चुनावी अभियान में धामी की भूमिका अहम कैलाश जोशी ‘अकेला’ देहरादून।

Oct 20, 2026 - 18:37
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2027 का ताज फिर सजेगा धामी के सिर?

उत्तराखंड में जीत की हैट्रिक की तैयारी, भाजपा के चुनावी अभियान में धामी की भूमिका अहम

कैलाश जोशी ‘अकेला’

देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी), नकल विरोधी कानून, रोजगार, निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे मुद्दों के सहारे पार्टी जनता के बीच अपनी उपलब्धियां रखने की तैयारी में है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या धामी एक बार फिर भाजपा को सत्ता तक पहुंचाकर तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ कर पाएंगे?

उत्तराखंड की राजनीति में 2027 का चुनाव भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य गठन के बाद से यहां सत्ता परिवर्तन की परंपरा रही, लेकिन वर्ष 2017 और 2022 में लगातार दो बार जीत दर्ज कर भाजपा ने इस राजनीतिक धारणा को तोड़ा। अब पार्टी की निगाहें जीत की हैट्रिक पर हैं। हालांकि, इस लक्ष्य की राह सरकार के कामकाज, स्थानीय मुद्दों, संगठन की मजबूती और मतदाताओं के रुख पर निर्भर करेगी।

बड़े फैसलों से बनी धामी की राजनीतिक पहचान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने कार्यकाल में कई बड़े नीतिगत फैसलों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाने का प्रयास किया है। समान नागरिक संहिता लागू करना, भर्ती परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए सख्त कानून बनाना और भूमि संबंधी नियमों में बदलाव उनकी सरकार के प्रमुख कदमों में शामिल हैं।

27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू की गई। इसके साथ उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना। भाजपा इसे अपनी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल कर सकती है।

इसी तरह प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और नकल माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए बनाए गए कानून को युवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण कदम के रूप में पेश किया जा सकता है। हालांकि, चुनाव के दौरान इन फैसलों की वास्तविक सफलता और आम जनता पर उनके प्रभाव का आकलन भी अहम रहेगा।

युवाओं के रोजगार पर रहेगी सबकी नजर

उत्तराखंड में बेरोजगारी और पलायन लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। धामी सरकार ने सरकारी भर्तियों में तेजी और पारदर्शिता पर जोर दिया है। सरकार की ओर से अपने कार्यकाल में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां देने की उपलब्धि भी बताई गई है।

लेकिन 2027 के चुनाव में केवल सरकारी नियुक्तियों का आंकड़ा ही पर्याप्त नहीं होगा। युवाओं की अपेक्षा निजी क्षेत्र में रोजगार, स्वरोजगार, उद्योगों के विस्तार और अपने ही प्रदेश में बेहतर अवसरों की भी है।

यदि निवेश और औद्योगिक गतिविधियों से स्थानीय युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, तो यह भाजपा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है। दूसरी ओर, रोजगार की तलाश में पहाड़ से हो रहे पलायन को रोकना भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती बना रहेगा।

निवेश और विकास के सहारे नई तस्वीर बनाने की कोशिश

उत्तराखंड में सड़क, रेल, पर्यटन और औद्योगिक विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। धामी सरकार ने निवेश आकर्षित करने और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया है। निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारना और उनसे स्थानीय लोगों को रोजगार दिलाना सरकार के लिए महत्वपूर्ण होगा।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, दिल्ली-देहरादून संपर्क परियोजना और सड़क नेटवर्क का विस्तार राज्य की कनेक्टिविटी तथा पर्यटन की संभावनाओं से जुड़ा है। इन परियोजनाओं का लाभ तभी व्यापक होगा, जब बेहतर संपर्क के साथ स्थानीय कारोबार, रोजगार और दूरस्थ क्षेत्रों की सुविधाओं में भी सुधार आए।

मैदानी जिलों में औद्योगिक विकास और पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन, होमस्टे तथा स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है।

पलायन रोकना सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता आज भी महत्वपूर्ण विषय है। गांवों से पलायन रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर आय के स्थायी साधन विकसित करना जरूरी है।

फल, सब्जियां, शहद, मसाले और अन्य स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण तथा विपणन को बढ़ावा देकर ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाई जा सकती है। पर्यटन, धार्मिक यात्राओं और साहसिक गतिविधियों से भी स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल सकता है।

अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चंपावत जैसे जिलों में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सरकार की प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण होना चाहिए। 2027 के चुनाव में पहाड़ के लोगों का अनुभव और उनकी अपेक्षाएं भी निर्णायक मुद्दे बन सकती हैं।

महिला सशक्तीकरण भी रहेगा अहम मुद्दा

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। धामी सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की है। महिला स्वयं सहायता समूहों, स्वरोजगार और स्थानीय उत्पादों से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहित करना भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।

महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन चुनावी विमर्श का हिस्सा बन सकता है। सरकार के सामने इन योजनाओं के लाभ अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंचाने की चुनौती भी होगी।

कानून-व्यवस्था और सुशासन की परीक्षा

निवेश, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए सुरक्षित वातावरण तथा जवाबदेह प्रशासन आवश्यक हैं। अपराध नियंत्रण, सरकारी सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता और आम नागरिकों की शिकायतों का समाधान सरकार के प्रति विश्वास को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

भाजपा आगामी चुनाव में अपनी सरकार के नीतिगत फैसलों और प्रशासनिक कार्यशैली को प्रमुखता दे सकती है। वहीं विपक्ष सरकार के कामकाज, बेरोजगारी, महंगाई, पलायन और स्थानीय समस्याओं को लेकर सवाल उठा सकता है। ऐसे में चुनावी मुकाबला उपलब्धियों के दावों और जनता के अनुभवों के बीच भी दिखाई देगा।

क्या 2027 में धामी ही होंगे भाजपा का चेहरा?

पुष्कर सिंह धामी की भूमिका आगामी विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण रहने की संभावना है। हालांकि, भाजपा की ओर से चुनावी नेतृत्व और मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम फैसला पार्टी का संसदीय एवं संगठनात्मक नेतृत्व ही करेगा।

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में खटीमा सीट से हारने के बावजूद भाजपा नेतृत्व ने धामी पर भरोसा जताया था। बाद में उन्होंने चंपावत उपचुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया और मुख्यमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारी जारी रखी। यह घटनाक्रम उनके राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

अब 2027 में भाजपा के सामने 70 विधानसभा सीटों पर प्रभावी प्रदर्शन करने की चुनौती होगी। पार्टी को संगठनात्मक मजबूती, उम्मीदवारों के चयन, क्षेत्रीय समीकरणों और सरकार की उपलब्धियों के बीच संतुलन बनाना होगा।

यदि भाजपा जीत हासिल करती है और विधायक दल धामी को अपना नेता चुनता है, तो उनके तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने का रास्ता खुल सकता है। लेकिन इस संभावना का अंतिम निर्धारण चुनाव परिणाम और पार्टी के फैसले से ही होगा।

निष्कर्ष: जीत की हैट्रिक आसान नहीं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ सकती है। यूसीसी, भर्ती प्रक्रिया में सुधार, निवेश, महिला सशक्तीकरण और आधारभूत ढांचे के विकास जैसे विषय पार्टी के चुनावी अभियान का हिस्सा बन सकते हैं।

हालांकि, 2027 का चुनाव केवल सरकार की उपलब्धियों के प्रचार तक सीमित नहीं रहेगा। युवाओं का रोजगार, पहाड़ से पलायन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्थानीय समस्याएं भी मतदाताओं के फैसले को प्रभावित करेंगी।

भाजपा के लिए यह जीत की हैट्रिक का अवसर है और पुष्कर सिंह धामी के लिए अपने नेतृत्व को फिर साबित करने की बड़ी परीक्षा। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सरकार की उपलब्धियां और जनता का विश्वास चुनाव में किस तरह सामने आते हैं।

क्या 2027 में फिर सजेगा धामी के सिर मुख्यमंत्री पद का ताज? इसका जवाब चुनाव परिणाम देंगे, लेकिन उत्तराखंड की सियासत में इस सवाल ने अभी से चर्चा तेज कर दी है।

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