हल्द्वानी: सूर्पनखा नासिका छेदन और सीता हरण की अद्भुत लीला ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
सूपनखा नासिका छेदन व सीता हरण की लीला ने सभी को रोमांचित किया।हल्द्वानी।एसआरआई संस्था द्वारा
हल्द्वानी: सूर्पनखा नासिका छेदन और सीता हरण की अद्भुत लीला ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
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कम शब्दों में कहें तो, सूर्पनखा नासिका छेदन और सीता हरण की लीला ने सबको रोमांचित कर दिया। हल्द्वानी। एसआरआई संस्था द्वारा आयोजित प्रथम महिला रामलीला के छठे दिन यह अद्भुत मंचन किया गया।
लीला का मंचन और दर्शक प्रतिक्रिया
हल्द्वानी के शीशमहल रामलीला मैदान में शनिवार को सूर्पनखा की नाक काटने और सीता हरण का दृश्य प्रस्तुत किया गया। इस मंचन में कलाकारों ने अपनी अदाकारी से भगवान की जीवंत लीला को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया। पंचवटी में रावण की बहन सूर्पनखा, जिसने राम को देखा, उस पर मोहित हो गई। अपने प्रेम का इजहार करते हुए उसने राम के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा।
संस्थान की पहल और सांस्कृतिक संजीवनी
इस रामलीला के आयोजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करना भी है। रामायण के पात्रों के माध्यम से समाज को नैतिक शिक्षा देने का प्रयास किया गया है। ऐसे आयोजनों के जरिए न केवल नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से अवगत कराया जा रहा है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण की भूमिका भी निभा रहा है।
विशेष आकर्षण
इस बार की रामलीला में महिला पात्रों की विशेष भूमिका दिखाई दी, जो दर्शकों के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। यह कार्यक्रम न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि बाहरी लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना है। आयोजक ने इस बात पर जोर दिया कि इस प्रकार के मंचन से न केवल महिलाएं, बल्कि सभी वर्गों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है।
सामाजिक संयोग और सहयोग
इस आयोजन के माध्यम से स्थानीय समाज के लोगों ने भी सहयोग किया है। कलाकारों के साथ ही, हजारों की संख्या में दर्शक इस विशेष लीला का आनंद लेने आए। आयोजक संस्था ने स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों को भी इसके सफल आयोजन में महत्वपूर्ण सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
निष्कर्ष
हल्द्वानी में यह रामलीला पारंपरिक संस्कृति का एक अद्भुत उदाहरण पेश करती है। सांस्कृतिक कार्यक्रम न केवल मनोरंजन का माध्यम होते हैं, बल्कि यह समाज में सामंजस्य और एकता को बढ़ावा देने का कार्य भी करते हैं। आशा व्यक्त की जा रही है कि इस तरह के आयोजन आगे भी होते रहेंगे, जिससे हमारी सांस्कृतिक धरोहर और भी मजबूती से आगे बढ़ सके।
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सादर,
टीम नेटaa नगरी अनुश्री
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