सिंचाई विभाग पर मुकदमा, वन विभाग की कार्रवाई से दो विभागों में टकराव, जानें पूरी जानकारी
Rajkumar Dhiman, Dehradun: रिजर्व फॉरेस्ट की भूमि पर अतिक्रमण के गंभीर मामले में सिंचाई विभाग पर मुकदमा दर्ज किया गया है। मुकदमा स्वयं वन विभाग ने दर्ज किया है। संभवतः यह पहली दफा है, जब वन विभाग ने किसी भूमाफिया या निजी व्यक्तियों की जगह सरकारी विभाग पर ही केस दर्ज कर दिया। इस कार्रवाई … The post सिंचाई विभाग पर मुकदमा, कराने वाला वन विभाग, दो विभागों में टकराव से हड़कंप appeared first on Round The Watch.
सिंचाई विभाग पर मुकदमा, वन विभाग की कार्रवाई से दो विभागों में टकराव, जानें पूरी जानकारी
कम शब्दों में कहें तो, चौंकाने वाली घटना में वन विभाग ने सिंचाई विभाग पर मुकदमा दर्ज किया है, जो सरकारी विभागों के बीच टकराव को दर्शाता है। यह मामला देहरादून के चिलियानौला नगर क्षेत्र का है।
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राजकुमार धीमान, देहरादून: रिजर्व फॉरेस्ट की भूमि पर अतिक्रमण के गंभीर मामले में सिंचाई विभाग पर मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मुकदमा स्वयं वन विभाग ने दर्ज किया है। यह घटना इस कारण महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पहली बार है कि जहां वन विभाग ने किसी सरकारी विभाग के खिलाफ केस दर्ज किया है। इस कार्रवाई के बाद सरकारी मशीनरी में हड़कंप मचा हुआ है।
घटनास्थल का विवरण
यह मामला चिलियानौला नगर क्षेत्र के पास है, जहां हैड़ाखान-दाड़िमी रोड से ऊपर लगभग 40 मीटर की ऊँचाई पर सिंचाई विभाग का कार्यालय स्थित है। रिपोर्ट के अनुसार, आरोप लगा है कि सिंचाई विभाग ने कार्यालय तक वाहन पहुंचाने के लिए रिजर्व वन भूमि से होकर एक कच्चा रास्ता कटवा दिया था। यह कार्य भारी मशीनों का उपयोग करते हुए किया जा रहा था।
सोशल मीडिया पर मामला उछाला
शुक्रवार को जैसे ही यह मामला सोशल मीडिया पर फैल गया, वन विभाग हरकत में आया। वन क्षेत्राधिकारी तापस मिश्रा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। हालांकि, विभागीय टीम के पहुंचने से पहले ही लोडर मशीन को वहां से हटा दिया गया था, पर तब तक लगभग 37 मीटर लंबाई तक वन भूमि की कटान हो चुकी थी।
जांच और कार्रवाई
जांच के परिणामस्वरूप यह स्पष्ट हुआ कि रास्ते की कटान किसी निजी व्यक्ति द्वारा नहीं की गई, बल्कि यह कार्य सिंचाई विभाग द्वारा किया गया था। इसके चलते, वन विभाग ने इसे वन कानून का उल्लंघन मानते हुए तुरंत निर्माण कार्य को रोक दिया और विभाग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। साथ ही, विभाग पर लगभग 20,000 रुपये का जुर्माना भी प्रस्तावित किया गया है।
वन विभाग की सख्ती और सिंचाई विभाग का बचाव
वन विभाग का कहना है कि रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में किसी भी प्रकार की खुदाई, सड़क निर्माण या भूमि को नुकसान पहुँचाने से पहले विधिवत अनुमति लेना अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी करने पर कार्रवाई तय है। क्षेत्राधिकारी तापस मिश्रा ने स्पष्ट किया कि यदि सिंचाई विभाग को मार्ग बनवाना था तो उसे पहले सक्षम स्तर से अनुमति लेनी चाहिए थी।
वहीं सिंचाई विभाग ने अपने कदम को आवश्यकता आधारित बताते हुए कहा है कि उनके कार्यालय तक कोई सड़क नहीं है और उन्हें विभागीय वाहनों को सड़क किनारे खड़ा करना पड़ता है। यह भी आरोप लगाया गया है कि अराजक तत्वों ने कई बार वाहनों में तोड़फोड़ की है। इस वजह से कार्यालय तक वाहन पहुंचाने के लिए हल्का कच्चा रास्ता बनाना पड़ा।
भविष्य में क्या होगा?
अब यह मामला दो सरकारी विभागों के बीच नियमों और जिम्मेदारियों के टकराव का रूप ले चुका है। एक ओर, वन विभाग इसे अवैध निर्माण मानकर सख्त कार्रवाई पर अड़ा है, वहीं दूसरी ओर, सिंचाई विभाग इसे सुरक्षा का मुद्दा बताते हुए अपनी स्थिति को सही ठहरा रहा है। आने वाले दिनों में जांच पूरी होने के बाद इस मामले में और कार्रवाई की संभावना है।
जो भी हो, यह घटना सरकारी विभागों की आपसी टकराव और कानून की अनदेखी की गंभीरता को दर्शाती है। इसे सुलझाने के लिए उच्च स्तर पर संवाद और सहयोग की आवश्यकता होगी।
इसके बारे में और अपडेट्स के लिए, कृपया देखें https://netaanagari.com.
टीम नेटaa नागरी, सुमिता वर्मा
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