लोक भवन में राज्यपाल से उत्तराखंड कांग्रेस के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात, सौपा ज्ञापन

देहरादून उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने वीरवार को राज्यपाल से मुलाकात की। राज्य की बेशकीमती जमीनों को औने पौने दामों पर बेचने का लगाया आरोप। सरकारी जमीने बेचने…

Nov 5, 2026 - 18:37
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लोक भवन में राज्यपाल से उत्तराखंड कांग्रेस के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात, सौपा ज्ञापन

देहरादून

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने वीरवार को राज्यपाल से मुलाकात की।

राज्य की बेशकीमती जमीनों को औने पौने दामों पर बेचने का लगाया आरोप। सरकारी जमीने बेचने के निर्णयों को निरस्त कर संपत्तियों को उनके मूल विभागों को लौटाने की की गई मांग।

मंत्री गणेश जोशी की आय से अधिक सम्पत्ति मामले में न्यायालय के निर्देशों का पालन करने। सहकारिता विभाग मे कोरोना काल में हुई नियुक्तियों की जांच करने तथा एमबीबीएस में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुए एडमिशनों की जांच करने की मांग।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने आज राज्यपाल से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन प्रेषित करते हुए धामी सरकार पर राज्य की बेशकीमती जमीनों को औने-पौने दामों पर बेचने का आरोप लगाते हुए सरकार के निर्णयों को निरस्त करने की मांग की।

राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 154 के अनुसार राज्य की कार्यपालिका शक्ति आपमें निहित है और अनुच्छेद 166 के अनुसार राज्य सरकार की समस्त कार्यवाही आपके नाम से होती है। जिन शासनादेशों से उत्तराखंड की सरकारी जमीनें और धरोहर भवन निजी हाथों में सौंपे जा रहे हैं, वे भी “श्री राज्यपाल की स्वीकृति” के नाम से जारी हुए हैं। इसलिए राज्य की इन संपत्तियों के संवैधानिक संरक्षक आप हैं। इसी विश्वास के साथ उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी आपके संज्ञान में निम्न तथ्य को लेकर आपसे निवेदन है कि ….

(1). जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट से संबंधित सभी पत्रावलियाँ मँगाई जाएँ, नियम विरुद्ध की गई जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की लीज निरस्त की जाए और पूरे मामले की उच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जाँच कराई जाए।

(2). 20 दिसंबर 2022 के कैबिनेट निर्णय के अंतर्गत मुख्यमंत्री द्वारा अकेले लिए गए सभी निर्णय तथा उनसे जारी शासनादेश निरस्त किए जाएँ।

(3) यूआईआईडीबी के तीनों टेंडर, पटवाडांगर (टेंडर संख्या 97862/2026), अलकनंदा होटल हरिद्वार (टेंडर संख्या 99265/2026) और ऋषिकेश निरीक्षण भवन (टेंडर संख्या 99301/2026), तत्काल निरस्त किए जाएँ।

(4). यूआईआईडीबी और सिडकुल को दी गई सभी जमीनें और संपत्तियाँ उनके मूल विभागों को वापस की जाएँ, और लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवनों को पीपीपी मोड में देने की प्रक्रिया रोकी जाए।

उपरोक्त के अलावा निम्नलिखित महत्वपूर्ण प्रकरणों की ओर भी आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहते हैं …

1. कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति का मामला….

राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में माननीय न्यायालय द्वारा मुकदमा दर्ज करने की अनुमति से संबंधित निर्देश दिये जाने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा अभी तक आवश्यक अनुमति प्रदान नहीं की गई है। यह अत्यंत गंभीर विषय है कि जब किसी जनप्रतिनिधि के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामले में न्यायालय द्वारा निर्देश दिये गये हों, तब सरकार की ओर से कार्रवाई में देरी क्यों की जा रही है? इससे सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति कथित जीरो टॉलरेंस की नीति पर भी सवाल उठते हैं। अतः इस मामले में तत्काल वैधानिक अनुमति एवं निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए।

 

2. कोरोना काल में सहकारिता विभाग की भर्तियों में कथित घोटाला….

कोरोना महामारी के दौरान जब आम नागरिकों को घरों से बाहर निकलने तक की अनुमति नहीं थी तथा पूरा देश अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा था, उस समय प्रदेश के सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत के कार्यकाल में राज्य से बाहर प्रतियोगी परीक्षा आयोजित कर सहकारिता विभाग में भर्तियां की गईं। इन भर्तियों में कथित रूप से अभ्यर्थियों से 20-20 लाख रुपये लेकर नौकरियां बेचे जाने के गंभीर आरोप सामने आये हैं। यह प्रकरण न केवल युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि प्रदेश की भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच एजेंसी से जांच कराई जानी अत्यंत आवश्यक है, ताकि दोषियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सके।

3. एमबीबीएस दाखिलों में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला…

विगत वर्ष प्रदेश में एमबीबीएस की कई सीटों पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिले किये जाने का मामला प्रकाश में आया था। चिकित्सा शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में इस प्रकार की अनियमितताएं न केवल योग्य एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के अधिकारों का हनन हैं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और गुणवत्ता के लिए भी गंभीर खतरा हैं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने गंभीर मामले में अभी तक प्रभावी एवं निर्णायक जांच सामने नहीं आई है।

अतः इस प्रकरण की समयबद्ध जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए तथा अनुचित तरीके से प्राप्त दाखिलों के संबंध में नियमानुसार निर्णय लिया जाना चाहिए।

महोदय, उपरोक्त तीनों प्रकरण राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया एवं भ्रष्टाचार पर नियंत्रण से सीधे जुड़े हुए हैं।

इन मामलों में सरकार की चुप्पी और कार्रवाई में देरी से यह संदेश जा रहा है कि सत्ता में बैठे प्रभावशाली व्यक्तियों को संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि आम नागरिकों एवं युवाओं के लिए न्याय प्राप्त करना कठिन होता जा रहा है।

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रतिनिधिमंडल ने कहा इस ज्ञापन की प्राप्ति के 10 दिनों के भीतर उपरोक्त निर्णयों को निरस्त करने और संपत्तियों को उनके मूल विभागों को लौटाने की कार्यवाही की जाए। यदि इस अवधि में राज्य सरकार और मुख्यमंत्री के ये निर्णय वापस नहीं लिए गए और जमीनें विभागों को नहीं लौटाई गईं, तो उत्तराखंड की जनता की संपत्ति बचाने के लिए कांग्रेस को मजबूरन माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ेगी।

प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष डॉ हरक सिंह रावत, विधायक मदन बिष्ट, फुरकान अहमद, पूर्व विधायक मनोज रावत, प्रदेश उपाध्यक्ष सीपी सिंह, राजीव महर्षि, प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र शाह, महिला अध्यक्ष जयोति रौतेला, सुरेन्द्र सिंह रांगड, राजेश चमोली आदि शामिल थे।

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