मुख्यमंत्री धामी का साहित्यकारों के साथ संवाद: दो ‘साहित्य ग्राम’ की स्थापना की घोषणा
रविवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के गांधी पार्क में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अमर शहीदों को नमन करते हुए कारगिल विजय दिवस (शौर्य दिवस) के अवसर पर…
मुख्यमंत्री धामी का साहित्यकारों के साथ संवाद: दो ‘साहित्य ग्राम’ की स्थापना की घोषणा
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर साहित्यकारों से संवाद करते हुए दो 'साहित्य ग्राम' की स्थापना की घोषणा की है, जो साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है।
रविवार को, देहरादून के गांधी पार्क में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री धामी ने अमर शहीदों को नमन करते हुए शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने कारगिल युद्ध के अमर बलिदानियों के परिजनों को सम्मानित करते हुए यह सुनिश्चित किया कि उनके बलिदानों को हमेशा याद रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण दिन पर यह घोषणा की कि परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों के लिए अनुग्रह राशि को ₹1.5 करोड़ से बढ़ाकर ₹2 करोड़ किया जाएगा।
साहित्यकार: समाज के दर्पण और मार्गदर्शक
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि साहित्यकार हमारे समाज का दर्पण होते हैं और वे न केवल समाज की समस्याओं को उजागर करते हैं, बल्कि उन्हें हल करने के लिए मार्गदर्शक का कार्य भी करते हैं। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर में साहित्य का विशेष स्थान होता है और यह शांति, सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
‘साहित्य ग्राम’ की स्थापना: एक नई पहल
आगामी ‘साहित्य ग्राम’ की योजना के बारे में जानकारी देते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल साहित्य और संस्कृति की रक्षा और संवर्धन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। साहित्य ग्रामों का उद्देश्य स्थानीय लेखकों, कवीयों और कला प्रेमियों को एक मंच प्रदान करना है, जहां वे अपनी कला और लेखनी का प्रदर्शन कर सकें। इसके माध्यम से वे न केवल अपनी प्रतिभा को निखार सकेंगे, बल्कि नवोदित लेखकों के लिए भी एक मार्गदर्शक बन सकेंगे।
साहित्य का विकास: एक सामूहिक जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने समाज के हर वर्ग से आग्रह किया कि वे साहित्य और संस्कृति के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं। यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर सदस्य को मिलकर इस दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, "साहित्यकारों का सम्मान करना, उनकी कृतियों को पढ़ना और अपने बच्चों को सांस्कृतिक मूल्यों का ज्ञान देना, यह हम सभी की जिम्मेदारी है।"
मुख्यमंत्री धामी ने यह भी बताया कि उनकी सरकार इस दिशा में कई कदम उठा रही है। उन्होंने साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में कार्यरत व्यक्तियों के लिए सहायता योजनाओं की भी घोषणा की।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ कार्यक्रम में हुई बातचीत और उनकी योजनाएँ, साहित्य और संस्कृति के महत्व को उजागर करती हैं। 'साहित्य ग्राम' की स्थापना के साथ, यह उम्मीद की जा रही है कि उत्तराखंड में साहित्य का विकास और संवर्धन होगा और आनेवाली पीढ़ियाँ इससे प्रेरित होंगी।
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दीप्ति कुमारी
Team Netaa Nagari
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