बालिका से दरिंदगी का मामला: सैनेटरी पैड से मिला DNA, आरोपी को 20 साल की सजा

Amit Bhatt, Dehradun: वैज्ञानिक साक्ष्यों और पुख्ता गवाहों के दम पर अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी मनोज कुमार के झूठ को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। देहरादून से बहला-फुसलाकर उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ ले जाकर 12 साल की मासूम के साथ कई बार जबरन शारीरिक संबंध बनाने वाले आरोपी मनोज कुमार को … The post सैनेटरी पैड से मैच DNA से खुला बालिका से दरिंदगी का राज, आरोपी को 20 साल का कठोर कारावास appeared first on Round The Watch.

Jul 14, 2026 - 18:37
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बालिका से दरिंदगी का मामला: सैनेटरी पैड से मिला DNA, आरोपी को 20 साल की सजा
बालिका से दरिंदगी का मामला: सैनेटरी पैड से मिला DNA, आरोपी को 20 साल की सजा

बालिका से दरिंदगी का मामला: सैनेटरी पैड से मिला DNA, आरोपी को 20 साल की सजा

कम शब्दों में कहें तो, वैज्ञानिक साक्ष्यों की मदद से अदालत ने आरोपी मनोज कुमार की दुष्कर्म की कहानी को बेनकाब किया और उसे 20 साल की सजा सुनाई। यह मामला नाबालिग से दुष्कर्म का है, जिसमें सैनेटरी पैड से मिले DNA ने आरोपी को दोषी साबित किया।

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पूरे मामले का विवरण

Amit Bhatt, Dehradun: 28 फरवरी 2025 को देहरादून के थाना बसंत विहार में पीड़िता के पिता ने अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। इस रिपोर्ट के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए त्वरित कार्रवाई की। मात्र तीन दिन के अंदर, पुलिस ने आरोपी मनोज कुमार के चंगुल से 12 साल की मासूम को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से सकुशल बरामद कर लिया। जानकारी के अनुसार, आरोपी ने लड़की को बहला-फुसलाकर देहरादून ISBT से बस के द्वारा अलीगढ़ स्थित अपनी बहन के घर ले जाकर कई बार बलात्कार किया।

अदालत में गवाहों की बातें

पुलिस ने चार्जशीट दाखिल करने के बाद मामला अदालत में लाया, जहां अभियोजन पक्ष ने 7 गवाहों को पेश किया। इनमें पीड़िता, उसके पिता, तथा डॉ. हुमा परवीन शामिल थे, जिन्होंने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण किया था। स्कूल की शिक्षिका और मामले के विवेचक भी गवाह बने।

उम्र का प्रमाण और FSL रिपोर्ट

अभियोजन ने अदालत में पीड़िता की उम्र को साबित करने के लिए स्कूल के Scholars Register और जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग किया। इसके बाद, फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की DNA रिपोर्ट ने मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आरोपी ने खुद को बेकसूर बताते हुए पूरे मामले से इनकार किया, लेकिन सैनेटरी पैड से पाए गए DNA का मिलान उसके ब्लड सैंपल से हुआ। ये सब सबूत उसे दोषी ठहराने के लिए काफी थे।

अदालत का फैसला

अदालत ने वैज्ञानिक और मेडिकल साक्ष्यों के इस मेल को बेहद गंभीरता से लिया और मनोज कुमार को दोषी करार दिया। उसे 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। यह मामला न केवल एक नाबालिग के साथ हुई दरिंदगी का संकेत है, बल्कि विज्ञान के माध्यम से न्याय दिलाने का भी एक उदाहरण है।

समाज के लिए एक सीख

इस मामले ने हमें यह भी बताया है कि समाज में सुरक्षा और न्याय की व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है। बालिकाओं को सशक्त बनाना और उनकी रक्षा करना आज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

इस मामले के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि हमारे कानून में जिस तरह से तकनीकी साक्ष्यों का महत्व बढ़ रहा है, उससे अपराधियों को बचने का कोई अवसर नहीं मिलता। वैज्ञानिक साक्ष्यों का इस्तेमाल करते हुए महिला सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

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ध्यान रहे, इस मामले में नाबालिग की स्थिति और न्याय की व्यवस्था के प्रति हमारी जिम्मेदारी को समझना आवश्यक है।

सादर,
शर्मिष्ठा किंगर
Team Netaa Nagari

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