देहरादून बैंक के पूर्व अधिकारियों पर मुकदमा, करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आया

Rajkumar Dhiman, Dehradun: देहरादून स्थित अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं और हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद बैंक के 05 पूर्व अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। फॉरेंसिक ऑडिट में बैंक के खातों और लेजर रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ियां मिलने के बाद यह कार्रवाई की … The post डूबने के कगार पर खड़े बैंक के 05 पूर्व अधिकारियों पर मुकदमा, करोड़ों रुपये का घपला पकड़ा appeared first on Round The Watch.

May 15, 2026 - 18:37
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देहरादून बैंक के पूर्व अधिकारियों पर मुकदमा, करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आया
देहरादून बैंक के पूर्व अधिकारियों पर मुकदमा, करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आया

देहरादून बैंक के पूर्व अधिकारियों पर मुकदमा, करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आया

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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में स्थित अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक के पांच पूर्व अधिकारियों के खिलाफ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के कारण मुकदमा दर्ज किया गया है। फॉरेंसिक ऑडिट से मिले सबूतों के आधार पर यह कार्रवाई हुई है, जिसमे बैंक के खाते और लेजर रिकॉर्ड की गड़बड़ियों का खुलासा हुआ था।

पुलिस द्वारा कार्रवाई की गई
राजकुमार धीमन, देहरादून: देहरादून के अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक में करोड़ों रुपये की वित्तीय हेराफेरी की घटना के बाद, पुलिस ने बैंक के पांच पूर्व अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। फॉरेंसिक ऑडिट में गंभीर गड़बड़ियां सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया। इससे पहले, जब बैंक में वित्तीय संकट पाया गया, Reserve Bank of India (RBI) ने फरवरी 2026 में इसके लेनदेन पर रोक लगा दी थी। इस स्थिति के चलते सात हजार से अधिक खाताधारकों के 124 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं।

फॉरेंसिक ऑडिट में उजागर हुईं अनियमितताएं
फॉरेंसिक ऑडिट के दौरान 2013-14 से 2015-16 के बीच कई संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और रिकॉर्ड में छेड़छाड़ के मामले का पता चला। जांच के बाद, बैंक की मुख्य शाखा के प्रबंधक रिंकू गौतम ने कोतवाली देहरादून में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया।

गबन का आरोप
पुलिस की शिकायत में बैंक के तत्कालीन सचिव आर.के. बंसल, सॉफ्टवेयर इंजीनियर गणेश चंद्र वार्ष्णेय, शाखा प्रबंधक महावीर सिंह, संजय गुप्ता और कार्यकारी शाखा प्रबंधक विजय मोहन भट्ट को नामजद किया गया है। आरोप है कि इन सभी ने आपसी मिलीभगत से बैंक रिकॉर्ड में फर्जी एंट्री कीं और धनराशि का दुरुपयोग किया, जिससे बैंक को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

बैंक की साख पर बढ़ा संकट
बैंक प्रबंधन का कहना है कि इस वित्तीय गड़बड़ी से न केवल संस्था को आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि ग्राहकों का भरोसा भी हिल गया है। फॉरेंसिक ऑडिट और विभागीय जांच से यह भी पता चला है कि आरोपियों ने कथित तौर पर बैंक के पैसों से संपत्तियां अर्जित कीं। हालाँकि, इन संपत्तियों की स्थिति का खुलासा पुलिस जांच के बाद ही हो पाएगा।

ऋण और संकट का इतिहास
आरबीआई का यह कदम भले ही अब लिया गया हो, लेकिन बैंक की मुश्किलें 2013-14 में ही शुरू हुई थीं। उस समय बैंक प्रबंधन ने निजी व्यक्तियों को बड़े पैमाने पर ऋण वितरित किए और समय के साथ ये ऋण बकाया बन गए। न तो इनकी वसूली के लिए कोई ठोस कदम उठाए गए, और न ही रिस्क मैनेजमेंट के नियमों का पालन किया गया।

NPA और जमा का संकट
बैंक के फंसे ऋण (NPA) की राशि लगभग 38 करोड़ रुपये है, जबकि करीब नौ हजार खाताधारकों की 124 करोड़ रुपये से अधिक की जमा राशि अब संकट में है। इस स्थिति ने बैंक को दिवालियेपन के कगार पर पहुंचा दिया है।

प्रोविजनिंग की कमी से हुई चूक
बैंकों को नियमों के तहत फंसे ऋण और दिए गए ऋणों के अनुपात में प्रोविजनिंग (ऋण हानि प्रावधान) करनी होती है। लेकिन अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के प्रबंधन ने इस प्रक्रिया को नजरअंदाज कर दिया, जिससे их वास्तविक वित्तीय स्थिति का पता नहीं चल पाया।

आरबीआई की भूमिका पर सवाल
इस घटना से खाताधारकों ने RBI की निगरानी पर भी सवाल उठाए हैं। चार करोड़ रुपये की जमा राशि रखने वाले खाताधारक अचिन गुप्ता ने बताया कि हर साल बैंक का ऑडिट हुआ लेकिन फिर भी गंभीर अनियमितताएं नहीं पकड़ी जा सकीं। यदि समय रहते इन गड़बड़ियों की पहचान कर ली जाती, तो आज हजारों लोगों को इस संकट का सामना नहीं करना पड़ता।

व्यापार पर प्रभाव
बैंक से जुड़े कई कारोबारी और ठेकेदारों के कार्य प्रभावित हुए हैं। निकासी पर रोक लगने से उनके व्यापार ठप हो गए हैं, जिससे लोगों को रोजमर्रा की ज़रूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

प्रबंधन पर आरोप
खाताधारकों का कहना है कि बैंक की बदहाली के पीछे एक ही परिवार का नियंत्रण मुख्य कारण है। पहले बैंक के चेयरमैन रमेश ममगाईं रहे और फिर उनके बेटे मयंक ममगाईं ने यह पद संभाला। आरोप है कि इसी दौरान अनियामक ऋण वितरण किए गए, जिससे बैंक में वित्तीय स्थिति कमजोर हो गई।

इस व्यथा को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि यह घटना न केवल बैंक के आर्थिक ताने-बाने को प्रभावित करती है, बल्कि इससे जुड़े लोगों के जीवन पर भी गहरा असर डालती है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सख्त सजा मिलनी चाहिए और भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए।

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Team Netaa Nagari, प्रिया जोशी

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