देहरादून कॉलेज में धार्मिक भेदभाव को लेकर मानवाधिकार आयोग हुआ सख्त
Amit Bhatt, Dehradun: उत्तरांचल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में छात्रों के साथ कथित धार्मिक भेदभाव के आरोप अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंच गए हैं। आयोग ने शिकायत का प्रारंभिक परीक्षण करने के बाद इसे प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों के संभावित उल्लंघन से जुड़ा मामला माना है और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), उत्तराखंड सरकार, कॉलेज प्रशासन … The post देहरादून में उत्तरांचल कॉलेज उतरवा रहा छात्राओं की बिंदी और पूजा का लाल धागा, सख्त हुआ मानवाधिकार आयोग appeared first on Round The Watch.
देहरादून कॉलेज में धार्मिक भेदभाव को लेकर मानवाधिकार आयोग हुआ सख्त
Amit Bhatt, Dehradun: उत्तरांचल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में हाल ही में छात्रों के बीच धार्मिक भेदभाव के आरोपों ने एक बड़ा मोड़ लिया है। यह मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंच गया है। आयोग ने शिकायत का प्रारंभिक परीक्षण किया और इसे मानवाधिकारों के संभावित उल्लंघन से जुड़ा मामला माना है। इसके अंतर्गत, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), उत्तराखंड सरकार, कॉलेज प्रशासन तथा देहरादून जिला प्रशासन को नोटिस जारी किया गया है। आयोग ने निर्दिष्ट सभी पक्षों से दो सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) पेश करने को कहा है।
कम शब्दों में कहें तो: उत्तरांचल कॉलेज में हिंदू छात्रों के साथ बिंदी और कलावा के मुद्दे पर भेदभाव के आरोप मानवाधिकार आयोग के पास पहुंच गए हैं। यह मामला अब उच्च स्तरीय जांच की ओर बढ़ रहा है।
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शिकायत में क्या कहा गया?
मानवाधिकार आयोग के समक्ष प्रस्तुत शिकायत में कहा गया है कि कॉलेज परिसर में हिंदू छात्राओं को बिंदी लगाने और पुरुष छात्रों को माथे पर तिलक तथा हाथ में पूजा का लाल धागा (कलावा) पहनने से रोका गया। शिकायत के अनुसार, यदि कोई छात्र इस दिशा-निर्देश का पालन नहीं करता था, तो उन्हें अनुपस्थित भी दर्ज किया गया। इसके अलावा, उनके हाथों से पूजा का धागा उतारने की कार्रवाई भी की गई और अनुशासनात्मक कदम उठाने के लिए उनकी तस्वीरें भी ली गईं।
एसी शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि दूसरी ओर मुस्लिम छात्राओं को बुर्का पहनने की अनुमति दी जा रही थी, जिससे कॉलेज प्रशासन पर धार्मिक आधार पर भेदभाव करने का आरोप लगा है।
संवैधानिक अधिकारों का हवाला
शिकायतकर्ताओं ने आयोग से यह भी कहा है कि अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह नागरिकों के लिए प्रदान की गई समानता, धार्मिक स्वतंत्रता, गरिमा और अंतरात्मा की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा। उन्होंने प्रतिवेदन में निष्पक्ष जांच, छात्रों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम, और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही, धार्मिक प्रतीकों को लेकर स्पष्ट और भेदभाव रहित नीति लागू करने का भी आग्रह किया गया।
NHRC ने क्या कदम उठाया?
7 जुलाई 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान NHRC ने शिकायत का परीक्षण किया और मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से उत्तर मांगा। आयोग ने UGC के अध्यक्ष, उच्च शिक्षा सचिव, चिकित्सा शिक्षा सचिव, उत्तरांचल (पीजी) कॉलेज के प्राचार्य, जिलाधिकारी देहरादून, और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को नोटिस जारी किए हैं। सभी अधिकारियों को मामले की जांच करके दो सप्ताह के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट आयोग को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
विवाद कैसे शुरू हुआ?
इस विवाद की शुरुआत 29 जून 2026 को हुई थी, जब कॉलेज के कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें तिलक लगाकर और हाथ में पूजा का लाल धागा बांधकर कॉलेज आने से रोका गया। छात्रों का यह भी कहना था कि प्रशासन ने ड्रेस कोड का हवाला देते हुए धार्मिक प्रतीकों को हटाने के लिए कहा था, और ऐसा न करने पर प्रवेश रोके जाने की चेतावनी दी गई थी।
घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, मामला और गरमा गया। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कॉलेज पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने तिलक और पूजा का धागा प्रतिबंधित करने को धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ बताया। उन्होंने कॉलेज प्रशासन से इस तरह के निर्देशों को वापस लेने की मांग की थी।
बाद में इसी मुद्दे को ध्यान में रखते हुए, शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दर्ज कराई गई, जिस पर अब आयोग ने संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
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लिखित है: टीम नेटा नगरी
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