जिलाधिकारी ने फार्म फेंसिंग नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश किए जारी

के एस असवाल गौचर चमोली 31 जुलाई, 2026 फार्म फेंसिंग नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर जिलाधिकारी ने दिए निर्देश, फार्म

Aug 1, 2026 - 09:37
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जिलाधिकारी ने फार्म फेंसिंग नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश किए जारी
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जिलाधिकारी ने फार्म फेंसिंग नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश किए जारी

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कम शब्दों में कहें तो, जिलाधिकारी गौरव कुमार ने फार्म फेंसिंग नीति के सही क्रियान्वयन के लिए निर्देश दिए हैं, जिससे किसानों को लाभ होगा।

गौचर, चमोली - 31 जुलाई, 2026

फार्म फेंसिंग नीति, जो किसानों की सुरक्षा के लिए बनाई गई है, अब प्रभावी रूप से लागू होने जा रही है। जिलाधिकारी गौरव कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस नीति की कार्यान्वयन प्रक्रियाओं पर चर्चा की गई।

फार्म फेंसिंग नीति

घेरबाड़ नीति: किसानों की ढाल

जिलाधिकारी ने कहा कि यह नई नीति किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में काम करेगी। सामुदायिक घेरबाड़ नीति का उद्देश्य न केवल फसलों की सुरक्षा करना है बल्कि किसानों को लाभकारी खेती में मदद करना भी है।

बैठक में मुख्य कृषि अधिकारी जय प्रकाश तिवारी ने बताया कि नई नीति के तहत घेरबाड़ निर्माण की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। पहले यह लागत 1800 से 2000 रुपये प्रति रनिंग मीटर थी, जो अब घटकर लगभग 572 रुपये प्रति रनिंग मीटर हो जाएगी। इस बदलाव से अधिक किसान अपनी फसलों को कम लागत में सुरक्षित कर पाएंगे।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्राम सभाओं, कृषक समूहों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और महिला स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से सामुदायिक स्तर पर घेरबाड़ का कार्य किया जाए। इस प्रक्रिया में गुणवत्ता युक्त जाली का उपयोग करना आवश्यक होगा।

मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, मुख्य कृषि अधिकारी जय प्रकाश तिवारी, एवं अन्य विभागों के अधिकारी इस बैठक में उपस्थित रहे। उन्होंने सभी संबंधित विभागों से आपसी समन्वय व सहयोग की बात भी की, ताकि उत्पादन में वृद्धि हो सके।

चाय उत्पादन को बढ़ावा

बैठक में चाय उत्पादन को बढ़ावा देने और चमोली की चाय की ब्रांडिंग के लिए भी सुझाव दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि स्थानीय उत्पादों की पहचान को मजबूत करने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि किसानों की आय में सुधार हो सके।

इस नीति का मुख्य उद्देश्य किसानों को जंगली जानवरों से अपनी फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और कृषि उत्पादन में वृद्धि करना है। संबंधित अधिकारियों को पात्र समूहों की पहचान करने और योजना का अधिकतम लाभ किसानों तक पहुँचाने की जिम्मेदारी दी गई है।

ऐसी योजनाएं न केवल किसानों के हित में हैं, बल्कि इससे कृषि विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। इस प्रकार, फार्म फेंसिंग नीति कृषकों के लिए एक नई उम्मीद जगेगी।

इस विषय पर और जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाइट Netaa Nagari पर जाएं।

सादर,
टीम Netaa Nagari
(शिल्पा शर्मा)

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