उत्तराखंड: 57 होटल-रेस्तरां से वापस खींचे गए 7 करोड़, 1.78 करोड़ नकद वसूले
Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड में होटल और रेस्तरां कारोबार पर राज्य कर विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जीएसटी से जुड़ी करोड़ों रुपये की अनियमितताओं का खुलासा किया है। विशेष अभियान के दौरान 57 होटल और रेस्तरां प्रतिष्ठानों की जांच में करीब 9 करोड़ रुपये की कर गड़बड़ी सामने आई। कार्रवाई के बाद संबंधित कारोबारियों … The post उत्तराखंड के 57 होटल-रेस्तरां के हजम करने से पहले वापस खींचे 07 करोड़, 1.78 करोड़ नकद वसूले appeared first on Round The Watch.
उत्तराखंड: 57 होटल-रेस्तरां से वापस खींचे गए 7 करोड़, 1.78 करोड़ नकद वसूले
कम शब्दों में कहें तो: उत्तराखंड में राज्य कर विभाग ने होटल और रेस्तरां के 57 प्रतिष्ठानों की जांच में जीएसटी से संबंधित 9 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का खुलासा किया, जिसमें से 7 करोड़ का इनपुट टैक्स क्रेडिट वापस लिया गया और 1.78 करोड़ रुपये नकद वसूले गए।
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राजकुमार ढिमन, देहरादून: उत्तराखंड में होटल और रेस्तरां उद्योग पर राज्य कर विभाग की एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। इस विशेष अभियान के तहत 57 होटल और रेस्तरां में जीएसटी से जुड़े करोड़ों रुपये की अनियमितताएँ पाई गई हैं। जांच के दौरान लगभग 9 करोड़ रुपये की कर गड़बड़ी का खुलासा हुआ। इसके फलस्वरूप संबंधित कारोबारियों को मजबूर होकर 7 करोड़ रुपये का गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) वापस करना पड़ा, साथ ही 1.78 करोड़ रुपये नकद सरकारी खजाने में जमा कराए गए।
विशेष अभियान की शुरूआत
उत्तराखंड, जो एक प्रमुख पर्यटन राज्य है, में होटल और रेस्तरां से अपेक्षित जीएसटी राजस्व में कमी के चलते राज्य कर आयुक्त प्रतीक जैन के आदेश पर जून में एक विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान देहरादून, हरिद्वार, और हल्द्वानी जैसे स्थानों पर विभागीय टीमों ने व्यापक सर्वेक्षण और सत्यापन किया।
जांच में अनियमितताओं का खुलासा
जांच में कई प्रतिष्ठानों द्वारा गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट के लाभ लेने, गलत जीएसटी दर लागू करने, और अपने वास्तविक कारोबार की तुलना में कम कर देनदारी घोषित करने के मामले सामने आए। राज्य कर विभाग की सख्ती के कारण, संबंधित फर्मों ने मौके पर ही अपनी कर देनदारी स्वीकार कर ली और करोड़ों रुपये का समायोजन किया।
विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई
इस अभियान में सबसे अधिक कार्रवाई देहरादून में हुई, जहां 46 फर्मों ने कुल 5.26 करोड़ रुपये का आईटीसी सरेंडर किया और 77 लाख रुपये नकद जमा कराए। हरिद्वार की फर्मों ने 95 लाख रुपये जबकि हल्द्वानी की फर्मों ने 5 लाख रुपये नकद जमा किए। इन सभी गतिविधियों के दौरान कुल 7 करोड़ रुपये का आईटीसी रिवर्स कराया गया और 1.78 करोड़ रुपये को राजकोष में जमा किया गया।
आगे की कार्रवाई और निगरानी
राज्य कर आयुक्त प्रतीक जैन ने कहा कि इस जांच में ऐसे कई मामले उजागर हुए हैं, जिनमें कारोबारियों ने गलत तरीके से आईटीसी का लाभ उठाया और सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाया। विभाग ने इन वित्तीय अनियमितताओं को गंभीरता से लिया है और भविष्य में भी ऐसे मामलों पर सतत निगरानी रखने की बात की है।
उन्होंने बताया कि फर्जी आईटीसी और कर चोरी के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। राज्य कर विभाग का मुख्य उद्देश्य कर अनुपालन को मजबूत करना और राजस्व रिसाव को प्रभावी रूप से रोकना है।
इसके साथ ही, यह आवश्यक है कि सभी व्यापार प्रतिष्ठान जीएसटी अनुपालन के नियमों का पालन करें ताकि राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी हो सके और सरकारी खजाने को दीर्घकालिक स्थिरता प्राप्त हो सके।
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— टीम नेटा नगरी, राधिका शर्मा
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