उत्तराखंड में सलाउद्दीन की गिरफ्तारी से उभरे चौंकाने वाले राज, STF जांच में गंभीर साक्ष्य
Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड एसटीएफ ने गदरपुर से जिस कट्टरपंथी युवक सलाउद्दीन को गिरफ्तार किया, उसकी जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। प्रारंभिक जांच और पूछताछ में संकेत मिले हैं कि सलाउद्दीन कट्टरपंथी विचारधारा से इस हद तक प्रभावित हो चुका था कि वह खुद को … The post उत्तराखंड में मानव बनने की राह पर बढ़ा सलाउद्दीन, STF जांच में चौंकाने वाले खुलासे appeared first on Round The Watch.
उत्तराखंड में सलाउद्दीन की गिरफ्तारी से उभरे चौंकाने वाले राज, STF जांच में गंभीर साक्ष्य
कम शब्दों में कहें तो: उत्तराखंड एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार कट्टरपंथी युवक सलाउद्दीन की जांच में ऐसे कई तथ्य सामने आए हैं, जिनसे सुरक्षा एजेंसियों में चिंता बढ़ गई है।
लेखिका: सुमन कुमारी, टीम नेटाआ नगरी
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देहरादून: उत्तराखंड एसटीएफ ने गदरपुर से एक कट्टरपंथी युवक सलाउद्दीन को गिरफ्तार किया है, जिसके पीछे की कहानी अब जांच एजेंसियों के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है। शुरुआती पूछताछ और जांच में यह पता चला है कि सलाउद्दीन कट्टरपंथी विचारधारा की गिरफ्त में आ चुका था और वह खुद को 'फिदायीन' या मानव बम बनने की मानसिकता में ढाल रहा था।
खतरनाक विचारधारा का प्रभाव
जांच के दौरान यह सामने आया है कि सलाउद्दीन की सोच में परिवर्तन तब आया जब उसने उत्तराखंड में मस्जिदों और मजारों पर हुई सरकारी कार्रवाइयों को लेकर नाराजगी महसूस की। इस प्रभाव में आने के बाद, वह इंटरनेट की मदद से कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़ता चला गया और धीरे-धीरे जिहादी सोच को अपनाने लगा।
एसटीएफ के अनुसार, वह ‘फी सबीलिल्लाह’ यानी अल्लाह के लिए संघर्ष जैसे विचारों से प्रभावित हो रहा था। उसकी इस गतिविधि का सिलसिला उसके खुद को किसी बड़े धार्मिक मिशन का हिस्सा मानने तक पहुंच गया, जो कि खतरनाक दिशा में बढ़ रहा था। हालांकि, एसटीएफ ने अभी तक किसी संभावित लक्ष्य या हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन उनके पास मौजूद डिजिटल साक्ष्य और मोबाइल चैट्स गंभीर साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं।
सोशल मीडिया में उग्रवाद का जाल
जांच में यह भी पता चला है कि सलाउद्दीन ने टेलीग्राम, सिग्नल और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्मों पर कई संदिग्ध समूहों और अकाउंट्स के साथ जुड़ाव बनाया हुआ था। इन समूहों में जिहाद और शहादत जैसी विषयों से जुड़ी सामग्री का आदान-प्रदान किया जा रहा था।
एसटीएफ अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि सलाउद्दीन को कौन लोग प्रभावित कर रहे थे और उसके पीछे कौन सा नेटवर्क काम कर रहा है। इसका उद्देश्य उसके हर डिजिटल संपर्क, वित्तीय लेनदेन और सोशल मीडिया गतिविधियों को जोड़कर एक व्यापक तस्वीर तैयार करना है।
तेलंगाना कनेक्शन और नए खुलासे
इस मामले में अब तेलंगाना के एक व्यक्ति 'जुबैर' का नाम भी सामने आया है, जो सलाउद्दीन के संपर्क में था और कथित रूप से उसे हथियार और विस्फोटक सामग्री उपलब्ध कराए थे। इस संदर्भ में, एसटीएफ को संदेह है कि जुबैर का नाम भी पहले अल-कायदा से जुड़े मामलों में आ चुका है, इसलिए इस कनेक्शन की जांच को प्राथमिकता दी जा रही है।
जांच के दौरान, सलाउद्दीन के मोबाइल फोन से मिले संदिग्ध चैट्स में हथियारों और विस्फोटक सामग्री के भंडारण से संबंधित चर्चाएँ हुई हैं, जो कि संभावित साजिश के संकेत दे रही हैं।
डॉक्यूमेंट डेटा की अहमियत
सलाउद्दीन ने पूछताछ में यह स्वीकार किया है कि उसने अपने मोबाइल से कई संदेहास्पद चैट्स और नंबर डिलीट कर दिए थे। साइबर विशेषज्ञ अब उन डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने की कोशिश में लगे हुए हैं, क्योंकि इस जानकारी में महत्वपूर्ण सुराग छिपे हो सकते हैं।
एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने कहा कि प्रारंभिक जांच के आधार पर सीमापार और विदेशी तत्वों की संलिप्तता के संकेत मिल रहे हैं। इस संदर्भ में अब जांच एजेंसियों ने यह निर्धारित करने की कोशिश की है कि कहीं सलाउद्दीन को विदेश में बैठे किसी नेटवर्क द्वारा प्रभावित या निर्देशित तो नहीं किया जा रहा था।
पिछले दिनों में, जब सलाउद्दीन की डिजिटल गतिविधियों और संपर्कों का प्रबंधन किया जा रहा था, तो यह साफ हुआ कि इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
अधिकारियों का मानना है कि आगामी दिनों में डिलीट किए गए डेटा की रिकवरी और डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट से इस मामले में और गंभीर तथ्यों का पता चल सकता है।
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टीम नेटाआ नगरी
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