उत्तराखंड पेपर लीक मामले में सुमन, खालिद और साबिया को आजीवन कारावास हो सकता है
Round The Watch News: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच को अदालत से अहम आधार मिल गया है। विशेष CBI न्यायालय ने मुख्य आरोपी मोहम्मद खालिद, उसकी बहन साबिया और सह आरोपी तत्कालीन सहायक प्रोफेसर सुमन के खिलाफ आरोप … The post पेपर लीक में असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन समेत खालिद और साबिया को हो सकती है उम्रकैद appeared first on Round The Watch.
उत्तराखंड पेपर लीक मामले में सुमन, खालिद और साबिया को आजीवन कारावास हो सकता है
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अदालत से महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है, जिससे तीनों आरोपी सुमन, खालिद और साबिया पर गंभीर आरोप लग सकते हैं।
विशेष CBI न्यायालय ने मायने रखती स्थिति में मुख्य आरोपी मोहम्मद खालिद, उसकी बहन साबिया और सह आरोपी, तत्कालीन सहायक प्रोफेसर सुमन के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य माना है। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
पहले की स्थिति का आकलन
अदालत के इस निर्णय के बाद, तीनों आरोपियों पर उत्तराखंड के सख्त नकल विरोधी कानून के अंतर्गत मुकदमा चलाने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। यदि उन्हें आरोपित किया जाता है और अदालत में आरोप सिद्ध होते हैं, तो उन्हें 10 साल से लेकर आजीवन कारावास की सजा मिल सकती है। इसके अलावा, एक करोड़ से दस करोड़ रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान है।
खालिद का फोन परीक्षा केंद्र में
CBI की जांच में स्पष्टता से दिखा है कि पेपर लीक की शुरुआत परीक्षा केंद्र से हुई थी। 21 सितंबर 2025 को आयोजित परीक्षा में खालिद आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज, बहादुरपुर जट स्थित परीक्षा केंद्र पहुंचा, जहां उसने मोबाइल फोन ले जाने में कामयाबी हासिल की।
परीक्षा के दौरान, खालिद ने प्रश्नपत्र के कुछ पन्नों की तस्वीरें खींची। इस प्रक्रिया में वह शौचालय जाने की अनुमति लेकर वहाँ गया, जहां कोई जैमर नहीं था। खालिद ने इसका फायदा उठाते हुए तस्वीरें खींचीं और उन तस्वीरों को परीक्षा केंद्र से बाहर भेज दिया।
पूरी जांच में सामने आया है कि खालिद ने उन तस्वीरों को अपनी बहन साबिया को भेजा, जिसने उन्हें टिहरी गढ़वाल में तैनात सहायक प्रोफेसर सुमन चौहान तक पहुंचा दिया।
सुमन की संलिप्तता
CBI की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि सुमन ने खालिद को जवाब तैयार करने और भेजने में सहायता की। प्रश्नपत्र की तस्वीरें प्राप्त करने के तुरंत बाद, सुमन ने व्हाट्सऐप के जरिए खालिद को उत्तर भेज दिए।
जांच में पाया गया कि सुमन ने खालिद की गिरफ्तारी के डर से प्रश्नपत्र की तस्वीरें और संबंधित संदेश अपने मोबाइल से मिटा दिए थे, लेकिन CBI ने डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर उनकी गतिविधियों को ले कर पर्याप्त सबूत इकट्ठा किये हैं।
बचाव पक्ष की दलील
सुनवाई के दौरान सुमन ने अपने बचाव में कहा कि उसे यह जानकारी नहीं थी कि प्रश्न पत्र असली है। लेकिन CBI के अधिवक्ताओं ने अदालत में बताया कि प्रश्नपत्र पर एक विशिष्ट QR कोड था, जो इस दावे को खारिज करता है। अदालत ने सुमन की प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रियाओं के प्रति जागरूकता को मान्यता देते हुए, तीनों आरोपियों की संबंधितता के लिए पर्याप्त साक्ष्य माना।
कड़े नकल विरोधी कानून के प्रावधान
यह मामला उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम एवं निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023 के तहत गंभीर श्रेणी में आता है। यदि दोष सिद्ध होते हैं, तो आरोपियों को 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा, कानून के तहत अर्जित संपत्ति की जब्ती का प्रावधान भी है।
यदि किसी अभ्यर्थी की प्रतियोगी परीक्षा में अनुचित साधनों में संलिप्तता साबित होती है, तो उसे दो से पांच वर्ष तक प्रतियोगी परीक्षाओं से प्रतिबंधित किया जा सकता है।
आंदोलन के बाद CBI को जांच सौंपी गई
जब UKSSSC की स्नातक स्तरीय परीक्षा का पेपर लीक मामला सामने आया, तब पूरे उत्तराखंड में छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों में आक्रोश फैल गया। देहरादून का परेड ग्राउंड इसी मुद्दे पर बेरोजगार युवाओं के आंदोलन का केंद्र बना।
राज्य सरकार ने इस मामले की बढ़ती माँग के कार्रवाई के बाद CBI को इस मामले की जांच सौंपने का निर्णय लिया। बाद में, CBI ने खालिद, साबिया और सुमन के खिलाफ कार्रवाई तेज की और दिसंबर 2025 में विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।
अगली सुनवाई का विवरण
अभी अदालत का आदेश केवल संभवत: आरोपों को तय करने के संदर्भ में है। अब 18 अगस्त को अगली सुनवाई होगी, जहां यह तय होगा कि तीनों आरोपियों के खिलाफ कौन सी धाराओं में औपचारिक तौर पर आरोप लगाये जाते हैं।
अंतिम निष्कर्ष के लिए हमें अगली सुनवाई का इंतजार करना होगा, जिसमें देखा जाएगा कि CBI अपनी योजित साक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्रस्तुत कर पाती है या नहीं।
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सादर, सारिका मिश्रा, Team Netaa Nagari
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