हल्द्वानी: प्राथमिक शिक्षक संघ ने टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने और पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर DM को सौंपा ज्ञापन
टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने और पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ ने सौंपा ज्ञापननैनीताल। उत्तरांचल स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन (उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ) जनपद नैनीताल ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी नैनीताल के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर आरटीई अधिनियम लागू होने […] Source
हल्द्वानी में प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा टीईटी अनिवार्यता समाप्त करने की मांग
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के नैनीताल जनपद में प्राथमिक शिक्षक संघ ने टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने और पुरानी पेंशन को बहाल करने के लिए एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा है। यह कदम शिक्षकों की हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है और इसमें संगठन ने केंद्र व राज्य सरकार से उचित कार्यवाही की मांग की है।
ज्ञापन का उद्देश्य
उत्तरांचल स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन (उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ) ने यह ज्ञापन जिलाधिकारी नैनीताल के माध्यम से प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के नाम प्रस्तुत किया। संघ ने मांग की है कि टीईटी (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए क्योंकि यह अनेक योग्य शिक्षकों के लिए एक रोड़ा बन चुकी है। इसके साथ ही, पुरानी पेंशन योजना की बहाली की भी आवश्यकता है ताकि शिक्षकों को उनके सेवा काल के दौरान एक सुरक्षित भविष्य प्राप्त हो सके।
टीईटी के प्रभाव
टीईटी की अनिवार्यता के चलते बहुत से शिक्षकों को उनकी योग्यताओं के बावजूद नौकरी पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। संघ का मानना है कि आम शिक्षक दायित्वों को निभाने में असमर्थ हो जाते हैं क्योंकि उन्हें परीक्षा की तैयारियों में समय और संसाधनों का बड़ा हिस्सा खर्च करना पड़ता है। यह स्थिति खासकर उन शिक्षकों के लिए अधिक गंभीर है जो पहले से ही सेवा में कार्यरत हैं और जिनकी योग्यताएँ पहले से सुनिश्चित की गई हैं।
पुरानी पेंशन योजना की बहाली
पुरानी पेंशन योजना (OPS) का कार्यान्वयन कई शिक्षकों के लिए रोजगार की सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण पहलू है। शिक्षकों के अनुसार, नई पेंशन योजनाएँ उनकी आय पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं और उन्हें भविष्य में वित्तीय असुरक्षा का सामना करना पड़ सकता है। संघ ने पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने के लिए मांग की ताकि शिक्षकों को उनके कार्यकाल के अंत में एक सुरक्षित और स्थिर पेंशन मिल सके।
आगे की कार्रवाई
इस ज्ञापन में प्राथमिक शिक्षक संघ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार हैं। संघ के सदस्य मानते हैं कि यदि शिक्षकों के अधिकारों का सम्मान नहीं किया गया तो यह शिक्षा के क्षेत्र में भी भयानक परिणाम ला सकता है। इसके लिए उन्हें समाज और अभिभावकों का भी समर्थन प्राप्त है।
समाज में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और इसलिए उन्हें उचित मान्यता और सम्मान मिलना आवश्यक है। प्राथमिक शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया है कि वे लगातार अपनी मांगों को उठाते रहेंगे, ताकि शिक्षा का स्तर और बेहतर हो सके।
इस बीच, शिक्षकों ने मीडिया और जनता से अपील की है कि वे उनके संघर्ष का समर्थन करें। इसके अलावा, संघ ने राज्य सरकार से भी अपेक्षा की है कि वह शिक्षकों की भलाई के लिए तुरंत कदम उठाए।
महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने के बाद, प्राथमिक शिक्षक संघ ने न केवल शिक्षकों के लिए बल्कि समाज के समग्र विकास के लिए एक सशक्त सन्देश दिया है।
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सादर,
टीम नेटaa नगरी - सुमिता कुमारी
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