हर गाँव का यही पैगाम: एक पेड़ माँ के नाम - कार्बेट टाइगर रिजर्व और PNG PG कॉलेज में हरेला पर्व 2026 मनाया गया
उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक परम्परा और प्रकृति संरक्षण के प्रतीक हरेला पर्व-2026 को रामनगर में बेहद उत्साह और जनसहभागिता के साथ मनाया गया। “हर गाँव का यही पैगाम, एक पेड़…
हर गाँव का यही पैगाम: एक पेड़ माँ के नाम - कार्बेट टाइगर रिजर्व और PNG PG कॉलेज में हरेला पर्व 2026 मनाया गया
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक परम्परा और प्रकृति संरक्षण के प्रतीक हरेला पर्व-2026 को रामनगर में उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर का उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इससे जुड़ने के लिए जन-भागीदारी को प्रोत्साहित करना था।
एक पेड़ माँ के नाम: कार्यक्रम की थीम
"हर गाँव का यही पैगाम, एक पेड़ माँ के नाम” की खूबसूरत थीम पर आधारित इस कार्यक्रम का आयोजन पी.एन.जी. पी.जी. कॉलेज और कार्बेट टाइगर रिजर्व के मुख्यालय में किया गया। इस पर्व का मुख्य उद्देश्य न केवल प्रकृति के प्रति प्रेम को जागरूक करना था, बल्कि इसे एक जन-आंदोलन बनाना भी था। उत्तराखण्ड की पहाड़ी संस्कृति में हरेला पर्व का विशेष महत्व है, जहाँ लोग पेड़-पौधों की रक्षा और संवर्धन के प्रति अपनी जिम्मेदारी का अनुभव करते हैं।
कार्यक्रम में जनसहभागिता
इस वर्ष का हरेला पर्व रामनगर में लोगों को एक मंच पर लाने का अद्भुत अवसर बना, जहाँ विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य, और गीत प्रस्तुत किए गए। स्थानीय स्कूलों के बच्चों ने भी इस उत्सव में भाग लिया और अपनी-अपनी प्रस्तुतियों से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। युवा और बुजुर्ग दोनों ने मिलकर इस पर्व को मनाने में विशेष रुचि दिखाई।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम
हरेला पर्व के दौरान वृक्षारोपण गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया गया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों को एक पेड़ लगाने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे कि वे पर्यावरण संरक्षण के इस महत्वपूर्ण कार्य में सक्रिय भाग ले सकें। आयोजकों ने बताया कि यह पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि पर्यावरण और प्रकृति की सुरक्षा के लिए एक सामुदायिक प्रयास है।
समुदाय की सहभागिता
कार्बेट टाइगर रिजर्व और PNG PG कॉलेज ने मिलकर इस कार्यक्रम की परिकल्पना की थी, जिसमें न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि वन विभाग के अधिकारियों और शिक्षकों ने भी हिस्सा लिया। इस पहल ने यह स्पष्ट किया कि जब हम सभी मिलकर काम करते हैं, तो कोई भी बड़ी समस्या हमें रोक नहीं सकती।
उपसंहार
हरेला पर्व-2026 ने न केवल उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक परंपरा को जीवित रखा, बल्कि इसके माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी दी। इस कार्यक्रम ने हम सभी को यह याद दिलाया कि प्रकृति की रक्षा हमारी जिम्मेदारी है और हमें इसे संजोकर रखना चाहिए।
इस उत्सव के सफल आयोजन के लिए सभी आयोजकों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का धन्यवाद। इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में बदलाव लाने का कार्य करते हैं और हमें अपने पर्यावरण के प्रति सजग बनाते हैं।
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सादर,
टीम नेटा नगरी
सुमन चौहान
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